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धान व्यापारियों ने अवैध उगाही व धमकाने का लगाया आरोप

Updated at : 13 Jan 2025 11:19 PM (IST)
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धान व्यापारियों ने अवैध उगाही व धमकाने का लगाया आरोप

मुफस्सिल थाना के सामने धान व्यापारियों ने जताया विरोध

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गोड्डा जिला मुख्यालय में किसानों से सीधे धान खरीदने वाले व्यापारियों ने अवैध उगाही का आरोप लगाते हुए विरोध जताया है. व्यापारियों का कहना है कि सरकार को जीएसटी चुकाने के बावजूद उन्हें धमकाया और परेशान किया जा रहा है. आरोप है कि हाल ही में व्यापारियों को जेल भेजने की धमकी देकर उनसे अवैध वसूली की जा रही है, जिससे उनके बीच भय का माहौल है. धान व्यापारियों ने अधिकारी पर दो-तीन व्यापारियों से राशि की उगाही करने का भी आरोप लगाया है. कहा कि उनके वाहन को जबरन पकड़ लिया गया है. उन्हें थाने ले जाने की धमकी दी गयी. इससे बचने के लिए व्यापारियों ने 15 से 20 हजार रुपये तक दिये, जिसके बाद उनके धान लदे वाहन को छोड़ा गया. पथरगामा के अनिश कुमार भगत ने 20 हजार रुपये अवैध वसूली का आरोप लगाते हुए कहा कि, विभाग के ही किसी संजय को उन्होंने यह रकम दी, तब जाकर उनके वाहन को छोड़ा गया है. वहीं संतोष कुमार भगत जिनको पुलिस की हिरासत में रखा गया हैं एक वाहन से 5 हजार रूपये शनिवार को दिन में लिया गया है् जबकि दूसरे वाहन से जब रात में धान की ढुलायी की जा रही थी तब भी पैसे की मांग की जा रही थी जिसको देने में संतोष ने इंकार कर दिया तब जाकर संतोष को हिरासत में लेकर मुफस्सिल थाना परिसर में रखा गया है. हालांकि खबर लिखे जाने तक मामले में एफआईआर दर्ज नहीं किया गया था. लेकिन इस मामले में धान व्यापारियों में खासा अक्रोश है. पूरे मामले को लेकर धान व्यापारी एकजुट होने लगे हैं तथा धान व्यापारियों में जिला प्रशासन के खिलाफ अक्रोश बन रहा है. बताया कि पूरे मामले की शिकायत डीसी, एसडीओ आदि से आज की जायेगी. जिले के मंत्री व विधायक को भी पूरे मामले से अवगत करा दिया गया है.

हर साल 20-25 लाख क्विंटल होती है ऊपज, धान क्रय केंद्रों पर दो लाख क्विंटल खरीदारी का लक्ष्य

जिले में काफी संख्या में किसान खुदरा बाजार में गांव के साहूकारों तथा व्यापारियों को धान बेचते हैं. अधिकांश छोटे व मंझोले किसान होने के कारण साहूकारों के हाथों में धान बेचकर तत्काल नकद राशि ले लेते हैं. सरकारी क्रय सेंटर में बेचे गये धान के एवज में तत्काल 50 प्रतिशत व बाद में 50 प्रतिशत बची राशि का भुगतान होने का प्रावधान है. छोटे-छोटे साहूकार धान की खरीदारी कर बड़े व्यापारी को बेचते हैं और वहां से धान जमा कर बड़े-बड़े ट्रकों में बंगाल भेजा जाता है. इसी धान से चावल की तैयारी कर संताल के बाजार में भी पैकेटिंग आदि कर बड़ी मात्रा में खपाया जाता है. एक जानकारी के मुताबिक हरेक साल 15 लाख क्विंटल से ऊपर धान प्रत्येक सीजन में यहां से बंगाल भेजा जाता है, जबकि जिले में कम से कम हरेक साल 20 लाख क्विंटल से ऊपर की उपज होती है. गोड्डा जिला को संताल का धान का कटोरा कहा जाता है, जबकि जिला प्रशासन द्वारा हरेक साल दो लाख क्विंटल धान क्रय का लक्ष्य रखा जाता है. कुल उपज की खरीदारी करना भी विभाग के लिए मुश्किल है. इस कारोबार में छोटे से लेकर बड़े व्यापारियों का एक वर्ग है, जो सालों भर इस धंधे में रहता है.अवैध वसूली की जानकारी नहीं है. किसानों से क्रय सेंटर में धान बेचने की अपील की गयी है. यह आवश्यक वस्तु अधिनियम में नहीं आता है. किसान बाजार आदि में बेचने के लिए स्वतंत्र हैं तथा व्यापारी धान खरीदने में. लेकिन किसानों को सहकारी सेंटर पर बाजार से ज्यादा राशि मिल रही है, जिससे किसानों का ही भला होगा. डीसी ने भी इसकी अपील की है. किसी से जबरन करने अथवा उगाही का सवाल नहीं होता है. शिकायत आने पर पूरे मामले को देखा जायेगा कि अवैध वसूली में कोन संलिप्त है.

-श्रवण राम, डीएसओ, गोड्डाB

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