जर्जर सरकारी भवनों की दुर्दशा, कभी भी हो सकता है हादसा

पुराने भवनों की मरम्मत नहीं, सुरक्षा को खतरा
प्रखंड में कई सरकारी भवन वर्षों से जर्जर स्थिति में हैं, लेकिन इनकी ओर किसी का ध्यान नहीं जा रहा है. ऐसे भवनों की हालत इतनी नाजुक हो चुकी है कि कभी भी उनका ढहना किसी दुर्घटना का कारण बन सकता है. जानकारी के अनुसार, ब्लॉक परिसर में वर्षों पूर्व आवासन के लिए बनाये गये पुराने भवन की स्थिति बेहद खराब है. कुछ हिस्सों में ब्लॉक और थाना के कर्मी रह रहे हैं, जबकि कई हिस्से अब आवासन के लिए सुरक्षित नहीं रहे. इसके बावजूद कर्मचारी नये भवन में रह रहे हैं, और पुराने भवन की दुर्दशा यूं ही बनी हुई है. स्थानीय लोगों का कहना है कि भवन का क्षतिग्रस्त हिस्सा कभी भी गिर सकता है, क्योंकि लोग पशु चिकित्सालय से आना-जाना करते रहते हैं. पुराने भवन का रंग रोगन खराब हो चुका है, लेकिन छत, दीवारें, खिड़कियों के छज्जे और फर्श टूट-फूट चुके हैं. दीवारों और फर्श में लगे ईंटें साफ दिख रही हैं. खिड़कियों-दरवाजों की हालत भी जर्जर है और बिजली वायरिंग दयनीय स्थिति में है. भवन की दीवारों और छज्जों में कजली की मोटी परत जम चुकी है और बारिश में पानी अंदर टपकता है. भवन के बाहरी हिस्से पर विशाल वृक्ष उग चुके हैं और चारों तरफ जंगली झाड़ियां पांव पसारे हुए है. लोग मांग कर रहे हैं कि सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए सरकारी स्तर पर पुराने भवन की पूरी मरम्मत की जाये या उसे गिरा दिया जाये. इससे दुर्घटनाओं को रोका जा सकता है और ब्लॉक में अतिरिक्त जगह भी मिल सकती है. फिलहाल इस दिशा में किसी भी सरकारी पहल के संकेत नहीं दिखाई दे रहे हैं.
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