बारकोप के सूखे पोखर से सिंचाई और जीवन प्रभावित

Published at :16 Apr 2026 8:26 PM (IST)
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बारकोप के सूखे पोखर से सिंचाई और जीवन प्रभावित

पथरगामा के ग्रामीण क्षेत्रों में बढ़ते तापमान और गर्मी के कारण पोखर और तालाब तेजी से सूख रहे हैं, जो गंभीर पर्यावरणीय और मानवीय संकट है। सूर्य की तीव्रता से पानी का वाष्पीकरण बढ़ा है, साथ ही पेड़ों की कटाई और मानसून की अनिश्चितता से जलस्रोतों का स्तर गिर रहा है। खासकर बारकोप गांव के चट्टान पोखर में पानी पूरी तरह खत्म हो चुका है, जिससे सिंचाई, स्नान और पशुओं के लिए पानी की किल्लत हो रही है। ग्रामीण पशुपालक दूर तक पानी की तलाश में भटक रहे हैं। उन्होंने पोखर की खुदाई कर पुनः जलावरण बनाने की मांग की है ताकि सिंचाई और पानी की समस्या का समाधान हो सके। इससे लगभग 15 एकड़ कृषि भूमि प्रभावित हो रही है।

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प्रतिनिधि, पथरगामा बढ़ते तापमान और भीषण गर्मी के कारण ग्रामीण क्षेत्रों के जलस्रोत, विशेषकर पोखर और तालाब तेजी से सूख रहे हैं. यह एक गंभीर पर्यावरणीय और मानवीय संकट का संकेत है. सूर्य की तीव्रता से पानी का वाष्पीकरण बहुत तेजी से हो रहा है, जिसके कारण पोखर और तालाबों की स्थिति दिन-ब-दिन खराब होती जा रही है. इसके अलावा, पेड़-पौधों की अंधाधुंध कटाई और मानसून की अनिश्चितता के कारण जल स्तर में भारी गिरावट आयी है. पोखर और तालाबों के सूख जाने से सबसे बड़ी परेशानी पशुओं को पानी पिलाने में हो रही है. पशुपालक तपती धूप में पशुओं की प्यास बुझाने के लिए दूर-दूर तक भटकने को मजबूर नजर आ रहे हैं. बताते चलें कि प्रखंड के लखनपहाड़ी पंचायत अंतर्गत बारकोप गांव के समीप स्थित चट्टान पोखर का पानी पूरी तरह सूख चुका है. यह पोखर एक समय सिंचाई के क्षेत्र में उपयोगी साबित होता था, लेकिन वर्तमान में यह सूख कर मैदान की शक्ल में नजर आ रहा है. उक्त पोखर में पानी का नामोनिशान तक नहीं है. पानी की जगह पोखर में मिट्टी के सूखे ढेर और मैदानी घास दिख रही है. बताया जाता है कि अक्टूबर-नवंबर के आसपास ही पोखर का पानी समाप्त हो चुका था. हालांकि बारिश होने पर थोड़ा पानी जमा हुआ था, लेकिन पोखर की गहराई कम होने के कारण जमा हुआ पानी किसी काम का नहीं रहा. चट्टान पोखर में पानी न होने की वजह से सिंचाई में परेशानी के साथ-साथ आसपास के ग्रामीणों को स्नान, वस्त्र धुलाई जैसे आवश्यक कार्यों के लिए पानी की तलाश करनी पड़ रही है. साथ ही क्षेत्र के पशुपालकों को अपने मवेशियों को पानी पिलाने के लिए दूर-दूर भटकना पड़ रहा है. स्थानीय देवेंद्र साह, पंकज कुमार साह, सुमरीत महलदार, सुनील कुमार मोदी, लक्ष्मण साह, छोटू कुमार आदि ने बताया कि आज तक चट्टान पोखर में समुचित रूप से खुदाई का कार्य नहीं हो सका है. ग्रामीणों ने बताया कि पोखर में पानी रहने के कारण आसपास की लगभग 15 एकड़ कृषि योग्य भूमि में सिंचाई होती थी, लेकिन पोखर का पानी सूख जाने से सिंचाई कार्य पूरी तरह प्रभावित हो गया है. ग्रामीणों का कहना है कि यदि पोखर में अच्छे तरीके से खुदाई का कार्य करा दिया जाये तो यह पोखर लोगों के लिए बहुत उपयोगी साबित हो सकेगा.

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