नगर पंचायत ने कझिया को बनाया कूड़ादान
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Published at :19 Jan 2016 8:27 AM (IST)
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गोड्डा : गोड्डा के लोगों की प्यास बुझाने वाली कझिया पर अब अस्तित्व का संकट मंडराने लगा है. कई बार इस मामले को जिला प्रशासन के समक्ष रखा गया बावजूद प्रशासन से सजगता नहीं दिखाया. वहीं बालू माफिया व भू माफिया कझिया का सीना चीर कर गाढ़ी कमाई कर रहे हैं. कझिया नदी की बरबादी […]
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गोड्डा : गोड्डा के लोगों की प्यास बुझाने वाली कझिया पर अब अस्तित्व का संकट मंडराने लगा है. कई बार इस मामले को जिला प्रशासन के समक्ष रखा गया बावजूद प्रशासन से सजगता नहीं दिखाया. वहीं बालू माफिया व भू माफिया कझिया का सीना चीर कर गाढ़ी कमाई कर रहे हैं. कझिया नदी की बरबादी की कहानी वर्ष 2009 से ही शुरू हो गयी. जब इस पर दो-दो हाई लेवल पुल का निर्माण हो गया. पहले कझिया में पानी का बहाव तेज होता था.
बाद में उपरी क्षेत्र से आने वाले बालू की डंपिंग भी पुल के आस-पास होती थी. जिससे वाटर लेयर बना रहता था. मगर 2007 के बाढ़ में कझिया के दो स्थानों पर जमनी गांव के पास तथा गोड्डा-महगामा मुख्य मार्ग स्थित पुल के क्षतिग्रस्त हो जाने के बाद पुल को और बड़ा व ऊंचा बना दिया गया. इस कारण पानी का बहाव कम हो गया. पुल निर्माण के बाद नदी खेल मैदान में तब्दील हो गयी. इस नदी के दोनों और माफियाओं की नजर थी. नदी के छोर को ईंट बानाने वाली मिट्टी कुरेद कर लाखों का वारा न्यारा किया जा रहा है.
…तो कहां से आयेगा पीने का पानी
कझिया नदी शहर के लोगों को करीब 30 वर्षो से पेयजल की आवश्यकताओं की पूर्ति कर रही है. शहरी पेयजलापूर्ति योजना का एकमात्र स्त्रोत कझिया ही है. नदी के बीच कुअां बनाकर पीने के पानी मोटर से खींचा जाता है और जल शोधक केंद्र शिवपुर पहुंचाया जाता है.
जहां पीएचडी विभाग स्थित जल मीनार के माध्यम से पेयजल की आपूर्ति करायी जाती है. नदी के कुएं के पास से लगातार पानी के उठाव के कारण पानी का लेयर घटता जा रहा है. इस कारण शहर की आबादी को ठीक से पानी की आपूर्ति भी मुश्किल से हो रही है. बरसात तथा सर्दी के मौसम में भी कई दिनों तक पानी की आपूर्ति बाधित रहती है .
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