एक साल से नहीं मिला राशन
Updated at : 26 Oct 2017 7:09 AM (IST)
विज्ञापन

ये कैसी व्यवस्था . दस साल की नन्हीं रमिया घरों में करती है चौका बरतन अक्तूबर 2016 में मिला था 12 किलो चावल व तीन किलो नमक इसके बाद से आज तक एक छटांक तक नहीं महगामा : सिमडेगा, देवघर व झरिया में कथित भूख से मौत के बाद सरकार तक हिल गयी है. सभी […]
विज्ञापन
ये कैसी व्यवस्था . दस साल की नन्हीं रमिया घरों में करती है चौका बरतन
अक्तूबर 2016 में मिला था 12 किलो चावल व तीन किलो नमक
इसके बाद से आज तक एक छटांक तक नहीं
महगामा : सिमडेगा, देवघर व झरिया में कथित भूख से मौत के बाद सरकार तक हिल गयी है. सभी जिला प्रशासन को कड़ा निर्देश दिया है कि जनवितरण प्रणाली में कोई भी लाभुक अनाज से वंचित ना हो. लेकिन गोड्डा में व्यवस्था में कहीं ना कहीं कमियां जरूर हैं. महगामा का एक गरीब परिवार है जिसे एक साल से एक छटांक अनाज जनवितरण प्रणाली से नहीं मिला है. सरकार ने आदेश जारी किया है कि अनाज लेने के लिए अब पहचान पत्र ही काफी है. लेकिन इस आदेश की जानकारी इस परिवार काे तनिक भी नहीं है. महगामा के बसुआ गांव का यह परिवार रामू राय का है. रामू राय की मौत हो चुकी है.
उनकी पत्नी भी मुफलिसी से हार कर आग लगा कर आत्महत्या कर चुकी है. परिवार में दस वर्षीय बेटी रमिया कुमारी व छह वर्ष का बेटा व रामू की वृद्ध मां मोहबतिया है. रमिया दूसरों के घर चौका बरतन कर अपने भाई और दादी का पेट पालती है. उसकी दादी काफी बूढ़ी हो चुकी है जो काम नहीं कर सकती. उसने कई बार प्रखंड कार्यालय का चक्कर लगाया लेकिन उसे अनाज नहीं मिला. परेशानी वही पॉश मशीन में फिंगर प्रिंट का मिलान नहीं होने की. एक साल से घर में रखा राशन कार्ड उम्मीद की किरण लेकर ताख पर शोभा दे रही है.
अक्तूबर 2016 में मिला था अनाज
मोहबतिया ने बताया कि उसे वर्ष 2016 में अनाज मिला था. इसके बाद अंगूठा दबाने वाले सिस्टम के कारण उसे अनाज नहीं मिल पा रहा है. अंतिम बार उसे 12 किलो चावल व तीन किलो नमक मिला था. कार्ड में भी यह बात दर्शाया गया है. इसके बाद न तो चावल मिला है और न ही केरोसीन. दादी मोहबतिया देवी ने बताया कि परिवार को चलाने के लिये ही उनकी पोती काम कर रही है. काम करने से ही पूरे परिवार का किसी तरह गुजारा होता है. बताया कि उनका परिवार कभी खाता है तथा कभी भूखे ही सो जाता है. जैसे तैसे कट रही है उनकी जिंदगी.
कभी भोजन मिलता तो कभी भूखे सो जाते हैं बच्चे
मुखिया जी पहले ही कर चुके हैं किनारा : ऐसा नहीं है कि मोहबतिया ने मुखिया को जानकारी नहीं दी. लेकिन सबै सहायक सबल के कोउ न निबल सहाय की कहावत चरितार्थ हो रही है. कोई भी मदद करने उस परिवार को नहीं आया है. लेकिन जब इसको लेकर मुखिया से पूछा गया तो मुखिया मो रहीम ने बताया कि उनकी समस्याओं को प्रखंड आपूर्ति पदाधिकारी से अवगत कराया गया है. पहचान चिह्न मिलान नहीं होने पर अनाज नहीं मिल पा रहा है. वे इसमें कुछ नहीं कर सकते हैं.
बेटे व बहू को खाेने के बाद जीवन के अंतिम पड़ाव में पोता पोती ही सहारा
फिंगर प्रिंट नहीं मिलने के कारण हो रही अनाज लेने में परेशानी
विभागीय आदेश दिया गया है. राशन कार्ड धारक को अनाज दिया जायेगा. आदेश मिला है. उस परिवार को दो दिन के अंदर राशन दिया जायेगा.
-विजय रंजन तिर्की, एमओ, महगामा.
”मुझे इस बात की जानकारी नहीं है. हालांकि ऐसे परिवारों को चिह्नित किया जा रहा है. एमओ को इस दिशा में निर्देश दिया जायेगा.
-चंदन कुमार सिंह, बीडीओ, महगामा
प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी
विज्ञापन
लेखक के बारे में
By Prabhat Khabar Digital Desk
यह प्रभात खबर का डिजिटल न्यूज डेस्क है। इसमें प्रभात खबर के डिजिटल टीम के साथियों की रूटीन खबरें प्रकाशित होती हैं।
Prabhat Khabar App :
देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए
विज्ञापन




