कारखाने के बेकार ग्लिसराॅल से तैयार किया बायो-हाइड्रोजन

गोड्डा : प्रतिभा किसी भी सीमा और बंधन के दायरे में सीमित नहीं रहती है. सुदूर गांव में भी हजारों प्रतिभा छिपी है. एक ऐसे ही प्रतिभावान छात्र अविनाश आनंद ने रिसर्च के माध्यम से कारखाने के बेकार व अवशिष्ट ग्लिसरॉल से बायो हाइड्रोजन तैयार करने में सफलता अर्जित की है. गोड्डा के नक्सल प्रभावित […]
गोड्डा : प्रतिभा किसी भी सीमा और बंधन के दायरे में सीमित नहीं रहती है. सुदूर गांव में भी हजारों प्रतिभा छिपी है. एक ऐसे ही प्रतिभावान छात्र अविनाश आनंद ने रिसर्च के माध्यम से कारखाने के बेकार व अवशिष्ट ग्लिसरॉल से बायो हाइड्रोजन तैयार करने में सफलता अर्जित की है. गोड्डा के नक्सल प्रभावित सुंदरपहाड़ी प्रखंड के धमनी बाजार का रहने वाला अविनाश गुवाहाटी के इंजीनियरिंग काॅलेज में केमिकल इंजीनियरिंग का छात्र है. एमटेक की पढ़ाई कर रहे अविनाश दो वर्षों से रिसर्च कर रहा है. अविनाश का स्पेशलाइड पेपर पेट्रोलियम साइंस एंड टेक्नोलॉजी है. अविनाश ने 2016 में इस क्षेत्र में रिसर्च शुरू किया था.
अविनाश को रिसर्च में मदद के लिये प्रो विजय आनंद , सूर्यकांत मोहलकर श्यामली शर्मा है. बायो हाइड्रोजन के खोज से एक नयी ईंधन जो कम खर्च में उत्पादन और मुख्य रूप से पर्यावरण फ्रेंडली होगा. अपने खोज से अविनाश और पूरी टीम ने इस बात पर जोर दिया है कि इस तरह के ईंधन से भारत को पेट्रोलियम तेल पर निर्भरता कम होगी. सप्ताह भर की छुट्टी में सुंदरपहाड़ी अपने गांव आये अविनाश को यह खुशखबरी भी उनके शिक्षक जिसके अंदर रहकर काम कर रहा रहे उनसे मिली है. अविनाश ने बताया कि लोगों को इस बात की जानकारी हो कि कोई भी वस्तु बेकार नहीं होती है सभी में कुछ ना कुछ विशेष गुण होता है. एक कचरा से ईंधन बन सकता है.
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