कारखाने के बेकार ग्लिसराॅल से तैयार किया बायो-हाइड्रोजन

Updated at : 02 Jul 2017 6:40 AM (IST)
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कारखाने के बेकार ग्लिसराॅल से तैयार किया बायो-हाइड्रोजन

गोड्डा : प्रतिभा किसी भी सीमा और बंधन के दायरे में सीमित नहीं रहती है. सुदूर गांव में भी हजारों प्रतिभा छिपी है. एक ऐसे ही प्रतिभावान छात्र अविनाश आनंद ने रिसर्च के माध्यम से कारखाने के बेकार व अवशिष्ट ग्लिसरॉल से बायो हाइड्रोजन तैयार करने में सफलता अर्जित की है. गोड्डा के नक्सल प्रभावित […]

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गोड्डा : प्रतिभा किसी भी सीमा और बंधन के दायरे में सीमित नहीं रहती है. सुदूर गांव में भी हजारों प्रतिभा छिपी है. एक ऐसे ही प्रतिभावान छात्र अविनाश आनंद ने रिसर्च के माध्यम से कारखाने के बेकार व अवशिष्ट ग्लिसरॉल से बायो हाइड्रोजन तैयार करने में सफलता अर्जित की है. गोड्डा के नक्सल प्रभावित सुंदरपहाड़ी प्रखंड के धमनी बाजार का रहने वाला अविनाश गुवाहाटी के इंजीनियरिंग काॅलेज में केमिकल इंजीनियरिंग का छात्र है. एमटेक की पढ़ाई कर रहे अविनाश दो वर्षों से रिसर्च कर रहा है. अविनाश का स्पेशलाइड पेपर पेट्रोलियम साइंस एंड टेक्नोलॉजी है. अविनाश ने 2016 में इस क्षेत्र में रिसर्च शुरू किया था.

अविनाश को रिसर्च में मदद के लिये प्रो विजय आनंद , सूर्यकांत मोहलकर श्यामली शर्मा है. बायो हाइड्रोजन के खोज से एक नयी ईंधन जो कम खर्च में उत्पादन और मुख्य रूप से पर्यावरण फ्रेंडली होगा. अपने खोज से अविनाश और पूरी टीम ने इस बात पर जोर दिया है कि इस तरह के ईंधन से भारत को पेट्रोलियम तेल पर निर्भरता कम होगी. सप्ताह भर की छुट्टी में सुंदरपहाड़ी अपने गांव आये अविनाश को यह खुशखबरी भी उनके शिक्षक जिसके अंदर रहकर काम कर रहा रहे उनसे मिली है. अविनाश ने बताया कि लोगों को इस बात की जानकारी हो कि कोई भी वस्तु बेकार नहीं होती है सभी में कुछ ना कुछ विशेष गुण होता है. एक कचरा से ईंधन बन सकता है.

क्या है अविनाश का रिसर्च
अविनाश 2016 में रिसर्च प्रारंभ किया. अपने प्रोफेसर के सहयोग से पहले थ्योरी तैयार किया . इससे पहले कई रिसर्च पेपर का अध्ययन करने के बाद उसने ‘क्लोस्टरेडम वैक्टेरिया ‘ पर अपना ज्ञान केंद्रित किया. अविनाश के अनुसार क्लोस्टेडियम बैक्टेरिया पर बहुत कम काम हुआ था. इस कारण उसे इस क्षेत्र में आगे बढ़ने की अपार संभावनाएं दिखी. अविनाश ने ऐसे वेसटेज की खोज किया और चयन में कारखाने में उपयोग होने वाले बाय प्रोडक्ट जो बेकार कह कर फेंक दिया जाता है ग्सिराॅल को खोज में शामिल किया. बायो डीजल कंपनी के वेस्टेज का इस्तेमाल कर बैक्टेरिया के साथ लगातार प्रतिक्रिया कराने के सामने रिजल्ट आया.
अविनाश आनंद का संक्षिप्त परिचय
अविनाश आनंद सुंदरपहाड़ी धमनी बाजार का रहने वाला है. पिता का नाम दिनेश चंद्र दत्ता है. 2015 में ही एमटेक की पढ़ाई के लिए गुवाहाटी में नामांकन लिया है. अविनाश का कहना है कि अगर उसे पेट्रोलियम विभाग में नौकारी मिल जाती है तो अच्छा है नहीं तो जेआरइओ या टोफिल लेकर आस्ट्रेलिया में आगे की रिसर्च करेंगे.
सुंदरपहाड़ी के धमनी बाजार के अविनाश आनंद ने बढ़ाया जिले का मान
पेट्रोलियम साइंस एंड टेक्नोलॉजी गुहाटी में एमटेक की कर रहा पढ़ाई
दो वर्ष से चल रहा था रिसर्च ओर निकाल लिया बायो हाड्रोजन, कम खर्च पर इंधन तैयार किया
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