श्री मरांडी ने कहा कि लेवड़िया गांव के लोग लगभग सौ वर्षों से बनाये से खेत का जोत-आबाद करते आ रहे हैं. कई लोगों को भूदान का पर्चा भी मिला है. इस पर खेती कर वह जीवोकापर्जन कर रहे हैं. वर्षों बाद वन विभाग द्वारा वैसी जमीन को अपनी बताकर ट्रेंच काटना और पेड़ लागना न्यायोचित नहीं है. वन विभाग के नक्शे में यदि भूदान में दी गयी जमीन नहीं कटी है, तो इसके दोषी यहां के ग्रामीण नहीं हैं. श्री मरांडी ने कहा कि ऐसे में यदि वन विभाग द्वारा ग्रामीणों के उपजाऊ खेतों को छीना गया, तो वह आंदोलन करेंगे ही. जहां तक होगा मैं भी इस आंदोलन में ग्रामीणों के साथ हूं जरूरत पड़ी तो इसे मुद्दे को वह विधानसभा में उठायेगी. किसी भी कीमत पर किसानों का खेत को छीनने नहीं दिया जायेगा.
जमीन का किया निरीक्षण
ग्रामसभा से पहले श्री मरांडी ने प्रतिनिधियों और ग्रामीणों के साथ विवादित जमीन का निरीक्षण किया. कहा कि जमीन की घेराबंदी कर पौधरोपण करने से प्रभावित लोगों का जीवन-यापन संकट में पड़ गया है. उन्होंने मौके पर ही डीएफओ मनीष तिवारी से संपर्क कर इस पूरे मामले की जानकारी राज्य सरकार को पत्र के माध्यम से देने का निर्देश दिया. मरांडी ने कहा कि जमीन सरकार की होती है, लेकिन जब जमीन की बंदोबस्ती हो जाती है तो उसमें किसी प्रकार की रोक-टोक उचित नहीं है.दो सौ एकड़ पर हो रहा पौधरोपण : वन विभाग लेवड़िया मौजा में लगभग 200 एकड़ जमीन पर घेराबंदी कर पौधरोपण कर रहा है. ग्रामीण ने कहा कि पौधरोपण से उनके सामने भुखमरी की स्थिति उत्पन्न हो जायेगी. मौके पर रामचंद्र ठाकुर, महेश राउत, तिसरी मंडल अध्यक्ष सुनील शर्मा, नागो यादव, राजू विश्वकर्मा, अनिल शर्मा, नरेश यादव, सुनील साव, मोहन बरनवाल, सोनू हेंब्रम, उदय साव आदि मौजूद थे.डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

