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Giridih News :भाई-बहन के प्यार का पर्व कल, रंग-बिरंगी राखियों से सजा बाजार

Updated at : 07 Aug 2025 10:06 PM (IST)
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Giridih News :भाई-बहन के प्यार का पर्व कल, रंग-बिरंगी राखियों से सजा बाजार

Giridih News :भाई-बहन के रिश्ते की डोर को मजबूत करने वाला पावन पर्व रक्षाबंधन इस साल नौ अगस्त को मनाया जायेगा. इले लेकर गिरिडीह के बाजारों में इसकी रौनक नजर आने लगी है. शहर के मुख्य बाजारों में इन दिनों रंग-बिरंगी राखियों से सजी दुकानें हर किसी का ध्यान खींच रही हैं. हर गली, हर चौक पर राखियों की चटक रंगत बिखरी हुई है.

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हर चौक-गली में दिख रही रक्षाबंधन की रौनक, खरीदारी के लिए बाजारों उमड़ रही भीड़

भाई-बहन के रिश्ते की डोर को मजबूत करने वाला पावन पर्व रक्षाबंधन इस साल नौ अगस्त को मनाया जायेगा. इले लेकर गिरिडीह के बाजारों में इसकी रौनक नजर आने लगी है. शहर के मुख्य बाजारों में इन दिनों रंग-बिरंगी राखियों से सजी दुकानें हर किसी का ध्यान खींच रही हैं. हर गली, हर चौक पर राखियों की चटक रंगत बिखरी हुई है. बहनों की आंखों में भाई के लिए प्यार और राखी खरीदने की ललक साफ देखी जा सकती है. गिरिडीह शहरी क्षेत्र के टावर चौक, बरगंडा, मकतपुर, पचंबा, बड़ा चौक समेत अन्य इलाकों में अस्थायी राखी दुकानों की कतारें लग चुकी हैं. दुकानदारों ने इस बार देशभर के अलग-अलग हिस्सों से आकर्षक और ट्रेंडिंग राखियों का स्टॉक मंगवाया है. बाजार में 10 रुपये से शुरू होकर 1000 रुपये से ऊपर तक की राखियां उपलब्ध हैं. कम दाम वाली साधारण राखियों के साथ-साथ इस बार डिजाइनर, मेटल फिनिश, बीडेड, जरी, स्टोन वर्क और हाथ से बनी कारीगरी वाली राखियां भी काफी संख्या में बिकने के लिए रखी गई हैं. बहनों को खास तौर पर भैया-भाभी कंबो सेट और कस्टमाइज नाम वाली राखियां बेहद पसंद आ रही हैं. छोटे बच्चों के लिए बाजार में स्पाइडरमैन, डोरेमोन, छोटा भीम, शिनचैन, मिक्की माउस जैसे लोकप्रिय कार्टून कैरेक्टर वाली राखियां सबसे बड़ी पसंद बनी हुई हैं. इनमें लाइट और म्यूजिक वाली राखियों का भी जबरदस्त क्रेज है. दुकानदारों का कहना है कि बच्चे खुद अपनी राखी चुनते हैं और कई बार तो माता-पिता को उनकी पसंद के आगे झुकना पड़ता है. शहर के मकतपुर में स्थित एक दुकान में राखी खरीद रही एक युवती ने कहा कि वह हर साल अपने भाई के लिए राखी खरीदती है, लेकिन इस बार कुछ खास ढूंढ रही है. उन्होंने ऑनलाइन भी देखा, लेकिन हाथ से छूकर चुनने का अलग ही सुख है.

मिठाइयों और गिफ्ट आइटम की मांग में भी इजाफा

राखी का त्योहार सिर्फ एक धागे का बंधन नहीं, बल्कि रिश्तों में मिठास घोलने का अवसर भी बन गया है. यही कारण है कि बाजारों में राखी के साथ-साथ मिठाइयों और गिफ्ट आइटम्स की मांग भी तेजी से बढ़ रही है. गिरिडीह के बाजारों में मिठाई की दुकानों ने इस बार रक्षाबंधन को ध्यान में रखते हुए खास रक्षाबंधन स्पेशल मिठाई पैकेट तैयार किए जा रहे हैं. इन पैकेट्स में केसर बर्फी, दूध पेडा, ड्राय फ्रूट लड्डू, सोहन पापड़ी और चॉकलेट बास्केट जैसी मिठाइयों की आकर्षक वैरायटी शामिल की गई है. कुछ दुकानों में तो कस्टमाइज गिफ्ट बॉक्स भी तैयार किया जा रहा है, जिनमें बहनें भाई के लिए राखी के साथ मिठाई और उपहार रखकर भेज सकती है. सिर्फ मिठाइयां ही नहीं, बाजारों में पारफ्यूम, कॉस्मेटिक किट, क्लच पर्स, वॉच सेट और ग्रीटिंग कार्ड्स जैसे गिफ्ट आइटम्स की भी खासी डिमांड है. इस त्योहार की खूबसूरती अब सिर्फ पारिवारिक दायरे तक सीमित नहीं रही. रक्षा बंधन एक सामाजिक पर्व के रूप में भी लोग मानने लगे है. कई लोग अब इस दिन पुलिसकर्मियों, शिक्षकों, स्वास्थ्यकर्मियों और समाजसेवियों को राखी बांधकर उनके योगदान को सम्मान देते हैं. वहीं, सामाजिक संगठनों और युवाओं व युवतियों के समूह हर साल की तरह इस बार भी वृद्धाश्रम, अनाथालय और बालगृहों में जाकर वहां रह रहे बुजुर्गों व बच्चों को राखी बांधते हैं. इन स्थलों पर राखी का त्योहार एक अलग ही भावनात्मक रंग ले लेता है.

ऑनलाइन शॉपिंग पर जोर

रक्षा बंधन जैसे पारंपरिक पर्व पर भी ऑनलाइन शॉपिंग का असर साफ तौर पर देखा जा रहा है. गिरिडीह के बाजारों में इस बार राखी बेचने वाले दुकानदारों को वैसी भीड़ नहीं मिल रही जैसी हर साल रहती थी. दुकानदारों का कहना है कि अब पहले जैसी लंबी लाइनें, बहनों की टोली और दुकान-दुकान घूमकर राखी चुनने वाला नज़ारा कम हो गया है. कई लड़कियां अब मोबाइल ऐप्स और ऑनलाइन वेबसाइट्स के ज़रिए घर बैठे ही राखी पसंद कर लेती हैं और ऑर्डर कर देती है. खासकर वे बहनें जो दूसरे शहरों या राज्यों में रहती हैं, वे अपने भाई को डायरेक्ट ऑनलाइन राखी और गिफ्ट डिलीवर करा रही हैं. दुकानदारों ने बताया बताया कि पिछले साल के मुकाबले इस बार बिक्री में गिरावट दिख रही है. पहले बहनें पूरे परिवार के साथ दुकान पर आती थी, घंटों राखी चुनती थी. अब ऑनलाइन आसानी से मंगा लेने की वजह से दुकानों पर वो रौनक नहीं दिख रही है. हालांकि कुछ ग्राहक आज भी मानते हैं कि राखी खरीदने का असली मज़ा तब है जब आप खुद उसे छूकर, उसकी डिजाइन को नजदीक से देखकर, प्यार से चुनते हैं. बताया कि ऑनलाइन प्लेटफॉर्म से सस्ती राखियां और फ्री डिलीवरी जैसे ऑफर ग्राहकों को खींच रहे हैं, लेकिन इससे स्थानीय कारोबार पर असर पड़ रहा है. फिर भी दुकानदारों को उम्मीद है कि अंतिम दो-तीन दिनों में बाजार की रफ्तार जरूर बढ़ेगी.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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PRADEEP KUMAR

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