जलसहियाओं को पानी की गुणवत्ता जांचने की प्रक्रिया की विस्तृत जानकारी दी गयी. किट के माध्यम से पानी में फ्लोराइड, आयरन, आर्सेनिक, पीएच मान व अन्य हानिकारक तत्वों की पहचान करने की विधि समझायी गयी. साथ ही जलस्रोतों से नमूना संग्रह करने, जांच के बाद रिपोर्ट तैयार करने तथा संदिग्ध स्थिति में संबंधित विभाग को सूचना देने की प्रक्रिया भी बतायी गयी.
जलसहियाओं की भूमिकी अहम
पेयजल व स्वच्छता विभाग जमुआ के सहायक अभियंता शिवाशीष दास ने जलसहिया को जानकारी देते हुए कहा कि स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराने की दिशा में जल सहिया की महत्वपूर्ण भूमिका है. जलसहिया गांव-गांव जाकर जल स्रोतों की नियमित जांच करेंगी, ताकि दूषित जल से होनेवाली बीमारियों पर रोक लगायी जा सके. कहा कि इस पहल से ग्रामीण क्षेत्रों में स्वच्छ पेयजल की निगरानी मजबूत होगी और आम लोगों को सुरक्षित पानी मिल सकेगा. प्रशिक्षण में शामिल जलसहिया गुड़िया देवी ने बताया कि इस प्रशिक्षण से उन्हें नयी तकनीकी जानकारी मिली है, जिससे वे अपने क्षेत्र में बेहतर ढंग से कार्य कर सकेंगी. प्रशिक्षण में डीडब्ल्यूएसजी के जेई चंदन कुमार दास, प्रखंड स्वच्छता समन्वयक अमित प्रसाद वर्मा व जलसहिया सितारा परवीन ने संयुक्त रूप से सभी मास्टर जलसहिया को फील्ड टेस्ट किट के माध्यम से जल जांच करने एवं रिपोर्ट को ऑनलाइन तथा ऑफलाइन प्रतिवेदन जमा करने के बारे में विस्तारपूर्वक जानकारी दी. कहा कि सभी लोग 12 जनवरी तक सभी सरकारी चापाकल व नल जल योजनाओं का पानी जांच कर ऑनलाइन रिपोर्ट दें. मौके पर हेमंती देवी, माहपारा खातून सहित काफी संख्या में जलसहिया मौजूद थीं.
डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

