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पुलिस को परिसर या गोदाम सील करने का अधिकार नहीं, बोले गिरिडीह बार एसोसिएशन के चेयरमैन प्रकाश सहाय

Updated at : 19 Jan 2025 10:09 PM (IST)
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Prabhat Khabar Exclusive Legal Counselling Giridih District Bar Association Chairman Prakash Sahay

प्रभात खबर के लीगल काउंसलिंग में गिरिडीह बार एसोसिएशन के चेयरमैन प्रकाश सहाय. फोटो : प्रभात खबर

Prabhat Khabar Exclusive: गिरिडीह डिस्ट्रिक्ट बार एसोसिएशन के चेयरमैन प्रकाश सहाय ने प्रभात खबर के लीगल काउंसलिंग में कहा कि पुलिस को किसी भी गोदाम या परिसर को सील करने का अधिकार नहीं है. उन्होंने कई अहम जानकारियां दीं. इसमें आपके भी काम की कई बातें हैं.

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Prabhat Khabar Exclusive Legal Counselling: पुलिस को किसी भी परिसर या गोदाम को सील करने का सीधे तौर पर अधिकार नहीं है. प्राय: देखा जाता है कि पुलिस गोदामों को सील कर प्राथमिकी दर्ज कर लेती है और संबंधित लोग पुलिस व कोर्ट-कचहरी का चक्कर काटते रहते हैं. यह कहना था गिरिडीह डिस्ट्रिक्ट बार एसोसिएशन के चेयरमैन प्रकाश सहाय का. क्रिमिनल लॉ के विशेषज्ञ प्रकाश सहाय प्रभात खबर के लीगल काउंसेलिंग में लोगों के सवाल का जवाब दे रहे थे. इस क्रम में न्यू बरगंडा के मनीष कुमार वर्मा ने सवाल किया था कि पुलिस बिना किसी दंडाधिकारी की प्रतिनियुक्ति के किसी की शिकायत पर गोदाम सील कर देती है. इससे संबंधित व्यक्ति को परेशानी होती है. इस पर अधिवक्ता श्री सहाय ने नेवाडा प्रोपर्टीज प्राइवेट लिमिटेड वर्सेज महाराष्ट्र सरकार के विवाद में सुप्रीम कोर्ट और अभय कुमार सिंह वर्सेज झारखंड सरकार के विवाद में हाईकोर्ट के फैसले का हवाला देते हुए कहा कि पुलिस को परिसर या गोदाम सील करने का अधिकार नहीं है. अभय सिंह ने इसी तरह के मामले में झारखंड हाईकोर्ट में वर्ष 2023 में एक रिट दायर की थी, जिसमें पुलिस को सील तोड़ना पड़ा. गिरिडीह जिले के हीरोडीह थाना क्षेत्र के अनिल कुमार यादव ने पूछा कि उनके पड़ोसी द्वारा बार-बार परिवाद पत्र दायर कर उनको परेशान किया जा रहा है. वे गरीब हैं और अदालत में बार-बार मामला दर्ज कर लिया जाता है. श्री सहाय ने बताया कि नये कानून में संज्ञान लेने के पहले संबंधित व्यक्ति को नोटिस किया जाना है और यदि मामला पुराना है और संज्ञान ले लिया गया है, तो ऐसे में पुनरीक्षण फाइल किया जा सकता है.

आज भी लागू है बिहार माइका एक्ट 1947, 6 स्क्वायर इंच के माइका के टुकड़े पर लाइसेंस की जरूरत नहीं

बिहार माइका एक्ट 1947 अब भी लागू है. ऐसे में 6 स्क्वायर इंच के माइका के टुकड़े पर परिवहन, परिसंस्करण और भंडारण के लिए लाइसेंस की कोई जरूरत नहीं है. इस एक्ट का पालन सरकार और पुलिस को करना चाहिए. यहां सामान्य फॉरेस्ट एक्ट या माइनिंग एक्ट लागू नहीं हो सकता. लीगल काउंसेलिंग में नित्यानंद प्रसाद के सवाल का जवाब देते हुए जीडीबीए के चेयरमैन प्रकाश सहाय ने यह बात कही. श्री प्रसाद का कहना था कि ढिबरा के कारोबारियों को पुलिस तंग कर रही है. ढिबरा के कई गोदामों को पुलिस ने सील कर दिया है और प्राथमिकी भी दर्ज की गयी है. ऐसे में कारोबारियों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है. नित्यानंद प्रसाद ने कहा कि उनलोगों को यह भी पता नहीं कि ढिबरा का कारोबार वैध है या अवैध. अधिवक्ता श्री सहाय ने कहा कि माइका एक्ट 1947 की धारा 3 में 6 स्क्वायर इंच तक के माइका के टुकड़े या ढिबरा के कारोबार के लिए किसी भी प्रकार के लाइसेंस की जरूरत नहीं है. यदि कोई तंग करता है, तो उस विभाग के वरीय अधिकारियों के पास शिकायत दर्ज करानी चाहिए. श्री सहाय ने कहा कि 6 स्क्वायर इंच से ज्यादा बड़ा माइका का टुकड़ा हो, तो बिहार माइका एक्ट 1947 की धारा 17 के तहत संबंधित व्यक्ति पर जुर्माना लगाया जा सकता है. सजा का भी प्रावधान है.

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हजारीबाग झंडा चौक के सुमित सिन्हा ने पूछा कि एक बार जमानत मिलने के बाद क्या दुबारा लेने की जरूरत है?

सलाह : प्राथमिकी में अगर जमानतीय धारा है और जमानत भी ले ली गयी है, इसके बाद में गैर जमानतीय धारा के तहत चार्जशीट समर्पित की जाती है, तो दुबारा जमानत लेने की जरूरत नहीं है. लेकिन इस तरह के मामले में जमानत के बिंदु पर कोर्ट के विवेक पर भी बहुत कुछ निर्भर करता है.

गिरिडीह के बड़ा चौक के प्रेमनाथ शर्मा ने पूछा कि हिस्सेदार बंटवारा नहीं मानते हैं और कम कीमत की जमीन लेने के लिए विवश करते हैं, तो वे क्या करें?

सलाह : यदि बंटवारानामा बना हुआ है और अन्य हिस्सेदार उसे मानने के लिए तैयार नहीं होते हैं, तो ऐसी स्थिति में पीड़ित व्यक्ति थाना में अपनी शिकायत दर्ज करा सकता है या कोर्ट में मुकदमा भी दायर कर सकता है.

गिरिडीह जिले के निमियाघाट थाना क्षेत्र के भुवनेश्वर महतो का सवाल था कि सात लाख रुपये उन्होंने वर्ष 2019 में एक संवेदक को दिये थे. इसके बदले में चेक लिया था, पर चेक बाउंस हो गया है. अब वे क्या कर सकते हैं?

सलाह : चेक बाउंस होना निगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट एक्ट का उल्लंघन है. ऐसे में चेक बाउंस होने के एक माह के अंदर चेक देने वाले को नोटिस भेजना चाहिए. इसके बाद भी भुगतान नहीं होने की स्थिति में 45 दिन के अंदर कोर्ट में केस दायर किया जाना चाहिए. ऐसे मामलों में निर्धारित समय का ख्याल रखना बहुत जरूरी है. यदि संबंधित व्यक्ति सजा के बाद भी भुगतान नहीं कर अपील में जाता है, तो उसे 20 प्रतिशत राशि देनी होगी. फिर भी नहीं देता है, तो जुर्माना और सजा का प्रावधान है.

बोकारो थर्मल के राजकुमार राय का सवाल था कि चेक बाउंस के मामले में उन्होंने 25 प्रतिशत राशि जमा कर दी है. इसके बाद भी उनकी जमानत अर्जी खारिज कर दी गयी?

सलाह : यदि अपील में जाने के बाद भी जमानत अर्जी खारिज कर दी गयी है, तो हाइकोर्ट में पुनरीक्षण में जाया जा सकता है. लेकिन ऐसे में गिरफ्तारी भी हो सकती है या आरोपित को सरेंडर करना होगा. यदि शेष रकम देकर समझौता करने की बात होती है, तो हाइकोर्ट से समझौता के लिए समय मांगा जा सकता है.

गिरिडीह जिले के सरिया थाना क्षेत्र के केशवारी निवासी महेश बर्णवाल का सवाल था कि वे एक घटनास्थल के पास से गुजरे थे, तो शक के आधार पर प्राथमिकी में उनका नाम दे दिया गया. वे क्या करें?

सलाह : यदि कहीं कोई घटना घटी है और किसी निर्दोष पर शक के आधार पर मुकदमा दायर कर दिया जाता है, तो संबंधित व्यक्ति को तुरंत वरीय अधिकारियों को सूचित करना चाहिए. यदि इसके बाद भी सुनवाई नहीं होती है, तो फेयर इंवेस्टिगेशन के लिए कोर्ट में रिट दायर किया जा सकता है.

बोकारो के शमसुद्दीन ने पूछा कि उन्होंने वन विभाग में अनुबंध पर नौकरी की है. 10 वर्ष तक काम करने के बाद हटाये जाने पर क्या किया जा सकता है?

सलाह : अनुबंध पर हुई नियुक्ति के मामले में सेवा शर्त के अवलोकन की जरूरत है. यदि किसी व्यक्ति ने 10 वर्ष तक किसी विभाग में सेवा दी है और उसे हटा दिया जाता है, तो वह हाइकोर्ट में रिट दायर कर सकता है.

बगोदर निवासी अनिल कुमार ने पूछा कि धारा 307 के एक मामले में कोई सूचक है. तीन गवाहों में से दो की गवाही हो चुकी है, तीसरी गवाही नहीं हो पा रही है. क्या करें?

सलाह : यदि तीसरा गवाह बाहर है, तो ऐसे में सरकारी अधिवक्ता से डॉक्टर और अनुसंधान करने वाले पुलिस अधिकारी की गवाही के लिए अनुरोध किया जा सकता है. ऐसे में उन्हें तीसरी गवाही के लिए समय मिल जायेगा.

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क्राइम में है थ्रिल और नयी चुनौतियां

जीडीबीए के चेयरमैन प्रकाश सहाय के पिता स्व बजरंग सहाय बिहार लैंड रिफॉर्म्स एक्ट के निर्माता के रूप में जाने जाते हैं. आज भी यह एक्ट झारखंड और बिहार में लागू है. स्व सहाय गिरिडीह जिला बनने से पूर्व हजारीबाग जिले के जीपी और पीपी दोनों पदों पर रहे. प्रकाश सहाय ने कहा कि क्राइम में रोज नयी चुनौतियां हैं, तो रोमांच भी है. ज्यादातर मामलों में सरकारी पक्ष के हार जाने के सवाल पर श्री सहाय ने कहा कि पुलिस को दो भागों में बांटकर काम करने की जरूरत है. जिस पुलिस पदाधिकारी को क्राइम इन्वेस्टिगेशन टीम में रखना है, उन्हें लॉ एंड ऑर्डर के अनुपालन से दूर रखना होगा. समय के अभाव में जांच सही नहीं होती और दूसरे पक्ष को इसका लाभ मिल जाता है. गवाह बदले नहीं, इसके लिए पुलिस को ई-साक्ष्य का उपयोग करना चाहिए.

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Mithilesh Jha

लेखक के बारे में

By Mithilesh Jha

मिथिलेश झा PrabhatKhabar.com में पश्चिम बंगाल राज्य प्रमुख (State Head) के रूप में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 32 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव है. उनकी रिपोर्टिंग राजनीति, सामाजिक मुद्दों, जलवायु परिवर्तन, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि और अन्य समसामयिक विषयों पर केंद्रित रही है, जिससे वे क्षेत्रीय पत्रकारिता में एक विश्वसनीय और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित हुए हैं. अनुभव : पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार में 3 दशक से अधिक काम करने का अनुभव है. वर्तमान भूमिका : प्रभात खबर डिजिटल (prabhatkhabar.com) में पश्चिम बंगाल के स्टेट हेड की भूमिका में हैं. वे डिजिटल न्यूज कवर करते हैं. तथ्यात्मक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता को प्राथमिकता देते हैं. वर्तमान में बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 पर पूरी तरह से फोकस्ड हैं. भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस पश्चिम बंगाल रहा है, साथ ही उन्होंने झारखंड और छत्तीसगढ़ की भी लंबे समय तक ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है, जो उनकी क्षेत्रीय समझ और अनुभव को दर्शाता है. मुख्य विशेषज्ञता (Core Beats) : उनकी पत्रकारिता निम्नलिखित महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों में गहरी विशेषज्ञता को दर्शाती है :- राज्य राजनीति और शासन : झारखंड और पश्चिम बंगाल की राज्य की राजनीति, सरकारी नीतियों, प्रशासनिक निर्णयों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर निरंतर और विश्लेषणात्मक कवरेज. सामाजिक मुद्दे : आम जनता से जुड़े सामाजिक मुद्दों, जनकल्याण और जमीनी समस्याओं पर केंद्रित रिपोर्टिंग. जलवायु परिवर्तन और नवीकरणीय ऊर्जा : पर्यावरणीय चुनौतियों, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और रिन्यूएबल एनर्जी पहलों पर डेटा आधारित और फील्ड रिपोर्टिंग. डाटा स्टोरीज और ग्राउंड रिपोर्टिंग : डेटा आधारित खबरें और जमीनी रिपोर्टिंग उनकी पत्रकारिता की पहचान रही है. विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तीन दशकों से अधिक की निरंतर रिपोर्टिंग, विशेष और दीर्घकालिक कवरेज का अनुभव तथा तथ्यपरक पत्रकारिता के प्रति प्रतिबद्धता ने मिथिलेश झा को पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत के लिए एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है.

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