बिहार से बाहर पढ़ने वाले छात्र नहीं भर पाएंगे सेल्फ-इन्युमरेशन फार्म, जानिए पूरा नियम

Published by :Pratyush Prashant
Published at :17 Apr 2026 8:41 AM (IST)
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Census 2027 17 April 2026

पटना के जिलाधिकारी डॉ. त्यागराजन

Census 2027: जनगणना 2027 को लेकर बिहार में तैयारियां तेज हो गई हैं, लेकिन इस बार नियमों में एक बड़ा बदलाव सामने आया है. अगर आप प्रदेश से बाहर रहकर पढ़ाई कर रहे हैं, तो आप सेल्फ-इन्युमरेशन फार्म नहीं भर सकेंगे. प्रशासन ने साफ कर दिया है कि इस प्रक्रिया में केवल कुछ ही श्रेणियों को छूट मिलेगी.

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Census 2027: देश की सबसे बड़ी गणना यानी जनगणना 2027 का बिगुल बिहार में बज चुका है. लेकिन इस बार की डिजिटल जनगणना में एक बड़ा पेच फंस गया है. अगर आप बिहार के मूल निवासी हैं और राज्य से बाहर रहकर पढ़ाई कर रहे हैं, तो आप पोर्टल पर खुद की जानकारी यानी ‘सेल्फ-इन्युमरेशन फार्म, नहीं भर पाएंगे.

पटना के जिलाधिकारी डॉ. त्यागराजन एसएम ने इस महत्वपूर्ण बदलाव की जानकारी देते हुए स्पष्ट किया है कि जनगणना के नियम इस बार काफी सख्त और स्पष्ट हैं. 2 मई से शुरू होने वाले इस महाअभियान के पहले चरण को लेकर प्रशासन ने अपनी कमर कस ली है, जिसमें मकानों की नंबरिंग से लेकर 33 प्रमुख सवालों के जवाबों तक का पूरा खाका तैयार कर लिया गया है.

सेल्फ-इन्युमरेशन फार्म का नियम

जनगणना के तहत 2 मई से 31 मई तक पहले चरण में मकानों की गणना की जाएगी. इसके साथ ही 1 मई तक ऑनलाइन पोर्टल के जरिए लोग खुद 33 सवालों के जवाब भर सकते हैं. हालांकि, बाहर पढ़ाई कर रहे छात्रों को इस सुविधा से बाहर रखा गया है. यानी वे सेल्फ-इन्युमरेशन फार्म नहीं भर पाएंगे.

प्रशासन के मुताबिक किराये पर रहने वाले लोग और प्रवासी मजदूर, जो अपने कार्यस्थल पर रहते हैं, वे पोर्टल के जरिए स्वघोषणा कर सकते हैं. इसके लिए भारत सरकार के जनगणना पोर्टल का उपयोग किया जा रहा है, जहां 33 सवालों का जवाब देना होगा.

जिले में बड़े स्तर पर तैयारी

पटना जिले में जनगणना को लेकर व्यापक स्तर पर तैयारी की जा रही है. कुल 46 चार्ज क्षेत्रों में यह प्रक्रिया पूरी होगी. इसमें हजारों जनगणनाकर्मी और आब्ज़ॉर्वर लगाए गए हैं. जीविका दीदियों, आंगनबाड़ी सेविकाओं और सहायिकाओं को भी जागरूकता अभियान में शामिल किया गया है, ताकि ज्यादा से ज्यादा लोग इसमें भाग ले सकें.

जिला प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि जनगणना के दौरान लोगों से ली गई जानकारी पूरी तरह गोपनीय रहेगी. इसका इस्तेमाल केवल सरकारी योजनाओं और नीतियों के निर्माण के लिए किया जाएगा. साथ ही, जनगणना के दौरान किसी भी तरह का दस्तावेज नहीं लिया जाएगा, जिससे लोगों को किसी तरह की परेशानी न हो.

देश के विकास से जुड़ा है डेटा

अधिकारियों के अनुसार जनगणना के आंकड़े सिर्फ गिनती भर नहीं होते, बल्कि इन्हीं के आधार पर देश की विकास योजनाएं तय होती हैं. शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और बुनियादी सुविधाओं के लिए नीति निर्माण में इसका बड़ा योगदान होता है.

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Pratyush Prashant

लेखक के बारे में

By Pratyush Prashant

महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में एम.ए. तथा जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) से मीडिया और जेंडर में एमफिल-पीएचडी के दौरान जेंडर संवेदनशीलता पर निरंतर लेखन. जेंडर विषयक लेखन के लिए लगातार तीन वर्षों तक लाडली मीडिया अवार्ड से सम्मानित रहे. The Credible History वेबसाइट और यूट्यूब चैनल के लिए कंटेंट राइटर और रिसर्चर के रूप में तीन वर्षों का अनुभव. वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल, बिहार में राजनीति और समसामयिक मुद्दों पर लेखन कर रहे हैं. किताबें पढ़ने, वायलिन बजाने और कला-साहित्य में गहरी रुचि रखते हैं तथा बिहार को सामाजिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक दृष्टि से समझने में विशेष दिलचस्पी.

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