इस गांव में लगभग 30 परिवार वाले इस आदिवासी गांव में लगभग 200 लोग रहते हैं. यहां के ग्रामीण गांव से आधा किलोमीटर दूर उसरी नदी स्नान करने जाते हैं.
गांववालों को नहीं मिला पीएम आवास सुविधा का लाभ
गांव के अधिकांश परिवारों का घर मिट्टी का है. गांव में एक भी प्रधानमंत्री आवास नहीं हैं. अधिकांश परिवारों में वृद्ध व विधवा हैं. लेकिन उन्हें पेंशन नहीं मिल रही है. यह गांव सरकारी सुविधा से पूरी तरह से वंचित है. इसकी सुध लेनेवाला कोई नहीं है.
क्या कहती हैं ग्रामीण महिलाएं
हमारे गांव में एक चापाकल है. इसमें में पानी काफी धीरे धीरे निकलता है. राजनेताओं व जनप्रतिनिधियों ने कभी भी गांव में व्याप्त जलसंकट को दूर करने की कोशिश नहीं की है. इस कारण हम लगभग सभी सरकारी सुविधाओं से वंचित हैं. – सुनीता सोरेन, गृहिणी, सिरसिया.
पंचायत, विधानसभा और लोकसभा चुनाव के समय गांव में नेता आते हैं व पानी की समस्या को दूर करने का आश्वासन देकर चले जाते हैं. लेकिन चुनाव समाप्त हो जाने के बाद एक बार भी देखने तक नहीं आते हैं. पानी की घोर किल्लत से हम लोग काफी परेशान हैं. – सूर्यमुनि सोरेन, गृहिणी, सिरसिया.अपनी परेशानियों को हम किसे सुनायें, कोई सुननेवाला है ही नहीं. जल नल योजना से यहां जलमीनार तो लगा दिया. लेकिन आज तक एक बूंद पानी उससे लोगों को नहीं मिला है. इससे उन्हें पीने का पानी नहीं मिल पा रहा है. हमारा दर्द सुननेवाला कोई नहीं है. – सोनाली सोरेन, गृहिणी, सिरसिया.
हमारे गांव के साथ पंचायत से लेकर प्रखंड़ स्तर के जनप्रतिनिधियों ने हमलोगों के पानी की समस्या का निदान करने को लेकर गंभीर नहीं रहे हैं, इसलिए वे लोग एक चापाकल के भरोसे ही हैं. जनप्रतिनिध केवल चुनाव के समय आते हैं और वादा करके चले जाते हैं. – सबोदया सोरेन, गृहिणी, सिरसिया.क्या कहते हैं मुखिया
मेढ़ोचपरखो के मुखिया मनोज कुमार पासवान ने कहा कि पंचायत में जल नल योजना मृत पड़ी है. सिरसिया जैसे आदिवासी गांव में पेयजल की समस्या है. चापाकल लगाने का आदेश मुखिया को नहीं मिला है. पीएम व अबुआ आवास के तहत कुछ जरूरतमंद लोगों को जोड़ा गया है.डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

