Giridih News : अच्छी संगति से ही संस्कार सुरक्षित रहते हैं : मुनि श्री प्रमाण सागर

Published by :MANOJ KUMAR
Published at :29 Apr 2026 12:46 AM (IST)
विज्ञापन
Giridih News : अच्छी संगति से ही संस्कार सुरक्षित रहते हैं : मुनि श्री प्रमाण सागर

Giridih News : सम्मेद शिखर में दो स्थानों पर भव्य पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव जारी

विज्ञापन

Giridih News : पीरटांड़. सम्मेद शिखर इन दिनों दो अलग-अलग स्थलों पर भव्य पंचकल्याणक महा महोत्सव के आयोजन से गुलजार है. गुणायतन परिसर में मुनि श्री प्रमाण सागर के सान्निध्य में पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव तथा तेरह पंथी कोठी में आचार्य श्री वशुनंदी मुनिराज ससंघ (42 पीच्छी) के सान्निध्य में पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव सह विश्व शांति महायज्ञ आयोजित है. इस दौरान गुणायतन में गर्भ कल्याणक के अवसर पर आयोजित धर्मसभा को संबोधित करते हुए मुनि श्री प्रमाण सागर महाराज ने कहा कि अच्छी संगति से ही संस्कार सुरक्षित रहते हैं और व्यक्तित्व का समुचित विकास संभव होता है.

सौधर्म इंद्र का दरबार सजा :

गुणायतन परिसर में मंगलवार को मुनि श्री प्रमाण सागर जी महाराज, मुनि श्री संधान सागर सहित संघ के सान्निध्य में धार्मिक अनुष्ठान प्रतिष्ठाचार्य अशोक भैया एवं अभय भैया के निर्देशन में संपन्न हुए. महोत्सव के दूसरे दिन सुबह भगवान का अभिषेक एवं शांतिधारा के पश्चात गर्भ कल्याणक पूजन हुआ. दोपहर मुनि श्री के प्रवचन तथा सायंकाल 6:20 बजे विश्व प्रसिद्ध शंका-समाधान सत्र आयोजित किया गया. इसके बाद सौधर्म इंद्र का दरबार सजा, जिसमें इंद्रलोक से देवियों ने माता मरुदेवी की सेवा का शास्त्रोक्त वर्णन नाट्यरूप में प्रस्तुत किया. दोपहर में माता मरुदेवी की गोद भराई की रस्म भी आकर्षक ढंग से संपन्न हुई. महोत्सव के अंतर्गत 29 अप्रैल को प्रातःकाल आदि प्रभु का जन्म कल्याणक मनाया जायेगा.

संस्कृति और संस्कार की अहमियत जानी :

गर्भ कल्याणक के अवसर पर आयोजित धर्मसभा में मुनि श्री प्रमाण सागर महाराज ने गर्भ संस्कार की महत्ता पर विशेष बल दिया. उन्होंने कहा कि योग्य संतान को जन्म देना केवल एक कर्म नहीं, बल्कि नौ माह की तपस्या है. आज अनचाहे शिशु का गर्भपात एक फैशन बनता जा रहा है, जबकि यह केवल हत्या ही नहीं, करुणा और मातृत्व की भी हत्या है. यदि किसी से ऐसा हो चुका हो, तो उसे प्रायश्चित अवश्य करना चाहिए. मुनि श्री ने कहा कि तीर्थंकरों के लिए भी गर्भ संस्कार जरूरी माने गये हैं. ऐसे में सामान्य मनुष्य के लिए इसकी आवश्यकता और अधिक बढ़ जाती है. “संस्कार भावनाओं का पुंज, प्रवृत्तियों की छाप और व्यवहार का प्रतिबिंब है. जैसी भावनाएं होंगी, वैसे ही संस्कार संतान में विकसित होंगे.

मुनि श्री ने जीवन के चार स्तंभों से कराया रूबरू :

उन्होंने जीवन के चार प्रमुख स्तंभ-संस्कार, सजगता, सक्रियता और संगति बताते हुए गर्भ, गृह, समाज एवं धर्म संस्कारों पर बल दिया. प्रवचन के दौरान उन्होंने सिंगापुर से आये एक परिवार का उदाहरण देते हुए बताया कि चिकित्सकीय आशंका के बावजूद गर्भ संस्कार और सकारात्मक भावनाओं के प्रभाव से स्वस्थ जुड़वा बच्चों का जन्म हुआ. मुनि श्री ने आधुनिक पीढ़ी को संदेश देते हुए कहा कि संगति का संस्कारों पर गहरा प्रभाव पड़ता है.

विज्ञापन
MANOJ KUMAR

लेखक के बारे में

By MANOJ KUMAR

MANOJ KUMAR is a contributor at Prabhat Khabar.

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन
Sponsored Linksby Taboola