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अगस्त में अभी तक मात्र 16.19 प्रतिशत अनाज का वितरण

Updated at : 21 Aug 2024 10:55 PM (IST)
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अगस्त में अभी तक मात्र 16.19 प्रतिशत अनाज का वितरण

बताया जाता है कि एक साथ दो-दो माह का पोर्टल चालू रखने के लिए अवधि विस्तार की जरूरत होती है और इसी अवधि विस्तार को लेने के लिए हर माह वितरण में लापरवाही की जाती है.

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गिरिडीह.

जिले में पीडीएस अनाज की वितरण व्यवस्था दुरुस्त करने की दिशा में कोई पहल नहीं की जा रही है. फलस्वरूप पिछले कई माह से गिरिडीह जिला की वितरण व्यवस्था राज्य में सबसे खराब है. ऐसी स्थिति एक सुनियोजित साजिश के तहत बनायी गयी है. बताया जाता है कि एक साथ दो-दो माह का पोर्टल चालू रखने के लिए अवधि विस्तार की जरूरत होती है और इसी अवधि विस्तार को लेने के लिए हर माह वितरण में लापरवाही की जाती है. सूत्रों की मानें तो झारखंड राज्य खाद्य निगम को प्रत्येक माह सभी कार्डधारियों को अनाज नहीं मिल पाने का कारण बताकर 15 दिनों का अवधि विस्तार लिया जाता है. यह जानकारी गिरिडीह जिला प्रशासन के साथ-साथ विभाग के वरीय अधिकारियों तक को है. फिर भी खाद्य सुरक्षा अधिनियम का उल्लंघन करते हुए अनाज टपाने के उद्देश्य से जिले में वितरण की ऐसी व्यवस्था की गयी है. सूत्र बताते हैं कि 15 दिन का अवधि विस्तार मिल जाने से 15 दिनों तक दो-दो माह का पोर्टल चालू रहता है. ऐसे में डबल फिंगर लेकर दो-दो माह का अनाज वितरण दिखा तो दिया जाता है, लेकिन मात्र एक माह का अनाज ही कार्डधारियों को मिलता है.

झारखंड में गिरिडीह जिला अनाज वितरण में फिर सबसे पीछे

प्रत्येक माह अनाज वितरण की दुरुस्त करने की बात तो कही जाती है, लेकिन अनाज चोरी करने के उद्देश्य से व्यवस्था दुरुस्त करने की कोई पहल नहीं हो रही है. बताया जाता है कि पीडीएस का अनाज कालाबाजार में बेचकर प्रत्येक माह मोटी उगाही हो रही है. झारखंड में गिरिडीह जिले की वितरण स्थिति अगस्त माह में भी सबसे खराब है. अगस्त माह में 20 दिन बीत जाने के बाद भी गिरिडीह जिले में मात्र 16.19 प्रतिशत अनाज का ही वितरण हो सका है. जबकि, राज्य में औसत वितरण 47.04 प्रतिशत है. राज्य में सबसे बेहतर स्थिति जामताड़ा का है. जामताड़ा में इन 20 दिनों में 80.45 प्रतिशत अनाज का वितरण कर दिया गया है. जबकि लोहरदगा में 66.76 प्रतिशत और लातेहार में 66.16 प्रतिशत अनाज वितरण हुआ है. सूत्रों का कहना है कि गिरिडीह जिले में लगभग 87 हजार क्विंटल अनाज का घोटाला पकड़े जाने के बाद इसका समायोजन करने के लिए ही यह खेल चल रहा है. यही कारण है कि गायब अनाज का अब तक ना ही कोई पता चल सका है और ना ही इस मामले में अभी तक कोई प्राथमिकी ही दर्ज की गयी है.

बगोदर में नहीं हुई अनाज वितरण की शुरुआत

वैसे बगोदर प्रखंड में माले विधायक विनोद सिंह की सक्रियता के कारण अनाज वितरण की व्यवस्था प्राय: ठीक रहती है. लेकिन, अगस्त माह में अनाज वितरण की स्थिति जिले में सबसे खराब इसी प्रखंड की है. बगोदर में चावल 5949.46 व गेहूं 1480.54 का आवंटन प्राप्त है. लेकिन, यहां पर किसी भी कार्डधारी को अब तक अनाज नहीं मिल पाया है. यहां की वितरण स्थिति शून्य प्रतिशत है. इसके बाद बेंगाबाद प्रखंड में अनाज वितरण की स्थिति 0.06 प्रतिशत, जमुआ में 1.54 प्रतिशत, धनवार में 2.15 प्रतिशत, सरिया में 3 प्रतिशत और गावां में 3.45 प्रतिशत ही अनाज का वितरण हुआ है.

विधानसभा में उठ चुका है मामला, फिर भी कोई कार्रवाई नहीं

गिरिडीह जिले में 87 हजार क्विंटल पीडीएस का अनाज की गड़बड़ी के साथ-साथ दो-दो डीएसओ के विरुद्ध प्रपत्र क गठित होने का मामला विधानसभा में उठ चुका है. विधायक विनोद सिंह ने गिरिडीह जिले में पीडीएस के अनाज का वितरण व फर्जी लाइसेंस बनाये जाने के मामले पर तत्कालीन पदाधिकारियों के विरुद्ध कार्रवाई नहीं किये जाने के मामले को उठाया था. विधानसभा में विभागीय मंत्री ने कार्रवाई करने का आश्वासन भी दिया. लेकिन, अभी तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है. एक अगस्त को भी विधायक श्री सिंह ने अल्पसूचित प्रश्न में पुन: खाद्यान्न वितरण में गड़बड़ी किये जाने का मामला उठाया था. सरकार ने श्री सिंह के सवाल के जवाब में आंशिक रूप से गड़बड़ी को स्वीकार भी किया है और अपने लिखित जवाब में कहा है कि दोषी पदाधिकारियों और कर्मियों को चिह्नित कर उनके विरुद्ध विधिसम्मत कार्रवाई की जायेगी. इसके बाद से फिर विभाग चुप्पी साधे हुए है.

सरकार की छवि हो रही है धूमिल, प्राथमिकी दर्ज हो : झामुमो

झामुमो के जिलाध्यक्ष संजय सिंह ने अनाज घोटाले पर ना सिर्फ अपनी तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है, बल्कि उपायुक्त को पत्र लिखकर 87 हजार क्विंटल अनाज घोटाले के मामले में प्राथमिकी दर्ज करने की मांग की है. कहा कि गिरिडीह जिले में अनाज वितरण की व्यवस्था चौपट होने से सरकार की छवि धूमिल हो रही है. बताया कि गिरिडीह जिले में गलत तरीके से 208 पीडीएस लाइसेंस जारी करने के मामले की सत्यता आने के बाद भी तत्कालीन डीएसओ के विरुद्ध कोई कार्रवाई नहीं हुई. साथ ही साथ गिरिडीह जिले में ग्रीन कार्ड को पीला कार्ड में बदलने का मामला भी उजागर हुआ. इस मामले में भी तत्कालीन डीएसओ की संलिप्तता सामने आयी. दो-दो डीएसओ के विरुद्ध प्रपत्र क गठित करते हुए विभागीय कार्रवाई की अनुशंसा की गयी. बावजूद इन अधिकारियों के विरुद्ध कोई कदम नहीं उठाया गया. कहा कि गिरिडीह जिले में अनाज घोटाले की पुष्टि भौतिक सत्यापन के दौरान हो गयी है. अब इस मामले में जिला प्रशासन को सीधे प्राथमिकी दर्ज करनी चाहिए. लेकिन. बार-बार संवेदकों और अधिकारियों को बचाने के लिए टालमटोल की स्थिति से सरकार की बदनामी हो रही है.

(राकेश सिन्हा)

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