Giridih News :बिना रजिस्ट्रेशन के ही चल रहीं हैं अधिकांश स्ट्रीट फूड की दुकानें

Giridih News :स्ट्रीट फूड के लिए विक्रेताओं को खाद्य सुरक्षा विभाग से रजिस्ट्रेशन करवाना अनिवार्य है. इसके बावजूद गिरिडीह शहरी क्षेत्र के साथ-साथ आसपास के इलाके में बिना रजिस्ट्रेशन कराये ही अधिकांश दुकानें संचालित हो रहीं हैं. ऐसे में इस तरह के खाद्य सामाग्री के खाने से भी बड़े हादसे की आशंका बनी रहती है.
स्ट्रीट फूड के लिए विक्रेताओं को खाद्य सुरक्षा विभाग से रजिस्ट्रेशन करवाना अनिवार्य है. इसके बावजूद गिरिडीह शहरी क्षेत्र के साथ-साथ आसपास के इलाके में बिना रजिस्ट्रेशन कराये ही अधिकांश दुकानें संचालित हो रहीं हैं. ऐसे में इस तरह के खाद्य सामाग्री के खाने से भी बड़े हादसे की आशंका बनी रहती है. शाम होते ही गिरिडीह शहर की सड़कों पर स्वाद की रौनक बढ़ जाती है. गुपचुप, चाट, समोसा, चाउमीन, मोमोज समेत कई ठेले सज जाते हैं. लोग भी स्वाद के चक्कर में बेफिक्र होकर इन स्ट्रीट फूड का मजा लेते हैं. लेकिन, वह इस बात से बेफ्रिक रहते हैं कि यह स्वास्थ्य के लिए कितना खतरनाक है. शहर के प्रमुख इलाकों में रोजाना दर्जनों स्ट्रीट फूड की दुकानें लगती हैं. अधिकांश ठेलों पर खाद्य सामग्री खुले में रखा जाती है. धूल, मक्खी और गंदगी के बीच चाट-गुपचुप की सामग्री घंटों पड़ी रहती है. कई दुकानों पर बासी आलू, उबले छोले और पहले से तैयार मसालों को दोबारा गर्म कर ग्राहकों को परोस दिया जाता है. पानी की स्थिति भी चिंताजनक है.
गंदे पानी से तैयार की जाती है सामग्री
शहरी इलाकों में लगने वाले अधिकांश स्ट्रीट फूड ठेलों पर खाद्य पदार्थ तैयार करने में जिस पानी का इस्तेमाल किया जा रहा है, वह गंदा रहता है. कई ठेलों पर बिना फिल्टर किया गया नल या हैंडपंप का पानी सीधे गुपचुप, चाट और अन्य खाद्य पदार्थों में उपयोग किया जा रहा है. कहीं-कहीं तो गुपचुप का पानी पूरे दिन एक ही ड्रम या बाल्टी में भरकर रखा रहता है, जिसमें बार-बार हाथ डाला जाता हैं. खुले में रखा यह पानी बैक्टीरिया और संक्रमण का बड़ा कारण बन सकता है. गर्मी के मौसम में स्थिति और गंभीर हो जाती है, क्योंकि अधिक तापमान में पानी और खाद्य सामग्री तेजी से खराब होती है. प्लेट, कटोरी और चम्मच को एक ही बाल्टी के गंदे पानी में बार-बार धोकर इस्तेमाल कर किया जाता है. कई जगहों पर पानी बदला तक नहीं जाता. इसके बावजूद शहर में पानी की गुणवत्ता को लेकर कोई नियमित निगरानी या जांच व्यवस्था प्रभावी रूप से नजर नहीं आती. नतीजतन आम लोग अनजाने में असुरक्षित पानी से तैयार भोजन करने को मजबूर हैं.जांच में बरती जा रही है लापरवाही
शहर में संचालित अधिकांश स्ट्रीट फूड दुकानें बिना किसी पंजीकरण के चल रही हैं. ना तो दुकानदारों के पास खाद्य सुरक्षा विभाग का निबंधन नंबर है और ना ही उन्हें खाद्य सुरक्षा मानकों की बुनियादी जानकारी. इसके बावजूद रोजाना सैकड़ों लोग, खासकर बच्चे और युवा, इन्हीं दुकानों से भोजन कर रहे हैं. नियमों के अनुसार खाद्य सामग्री बेचने वाले प्रत्येक दुकानदार को पंजीकरण कराना, स्वच्छता का पालन करना और समय-समय पर जांच कराना अनिवार्य है, लेकिन जमीनी हकीकत इससे बिल्कुल उलट है. कई ठेले सालों से एक ही जगह बिना किसी अनुमति के संचालित हो रहे हैं. दुकानदारों द्वारा ना दस्ताने का इस्तेमाल किया जाता है, ना एप्रेन पहना जाता है और ना ही स्वास्थ्य से जुड़ी सावधानियों का पालन होता है. खाद्य सामग्री कहां से लायी जाती है, कितने दिन पुरानी है और किस हालात में रखी जाती है, इसकी कोई जानकारी इन्हें नहीं होती. शहर में खाद्य सुरक्षा नियमों के अनुपालन को लेकर निगरानी व्यवस्था बेहद कमजोर नजर आती है. नियमित सैंपलिंग, निरीक्षण और जागरूकता अभियान लगभग ना के बराबर हैं. इसका नतीजा यह है कि स्ट्रीट फूड दुकानदार बेखौफ होकर नियमों की अनदेखी कर रहे हैं और आम लोगों की सेहत खतरे में पड़ती जा रही है.
इन इलाकों में सजतीं हैं दुकानें
बड़ा चौक और टावर चौक में सबसे अधिक ठेले और स्टॉल देखने को मिलते हैं. इन दोनों स्थानों पर 50 से भी अधिक दुकानें रोजाना लगती हैं. इसके अलावा कालीबाड़ी, मकतपुर, बरगंडा, पटेल नगर, हुट्टी बाजार, भंडारीडीह, कोर्ट रोड, बस स्टैंड और आरके महिला कॉलेज रोड समेत कई अन्य इलाकों में भी भारी संख्या दुकानें लगती हैं. इन इलाकों में गुपचुप, चाट, समोसा, चाउमीन, मोमोज, अंडा रोल, टिक्की और शीतल पेय पदार्थों की जमकर बिक्री होती है. शाम होते ही यहां खाने-पीने वालों की भीड़ उमड़ पड़ती है.
जांच के लिए चलाया जायेगा अभियान, किया जायेगा जुर्माना : फूड सेफ्टी ऑफिसर
जिला फूड सेफ्टी ऑफिसर डॉ राजा कुमार ने भी स्वीकार किया कि गिरिडीह के कई इलाके में बिना निबंधन के ही कई दुकानें फुटपाथ पर चलायी जा रहीं हैं. कहा कि अब इसमें लापरवाही नहीं की जायेगी. जांच अभियान चलाया जायेगा और स्ट्रीट फूड के नमुनों के साथ निबंधन की भी जांच होगी. निबंधन नहीं पाये जाने की स्थिति में संबंधित विक्रेताओं पर जुर्माना भी लगाया जायेगा. एक लाख रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान है. इसके अलावा संबंधित लोगों के विरुद्ध मुकदमे भी दर्ज किये जा सकते हैं. डॉ राजा ने बताया कि स्ट्रीट फूड के विक्रेताओं को भी निबंधन कराना अनिवार्य है. अब तक 34 मामले अदालत में खाद्य सुरक्षा को लेकर चल रहे हैं. इसके अलावे 30 लोगों को नोटिस भी जारी किया गया है. साथ ही दुकानदारों को चेतावनी भी दी कि वे अपने दुकान का निबंधन करा लें और मापदंड के अनुरूप स्ट्रीट फूड की बिक्री करें. अगर ऐसा नहीं करते हैं तो सख्त कार्रवाई के लिए तैयार रहें.प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी
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