नाबालिग को जिंदा जलाने के मामले में झारखंड हाइकोर्ट का कड़ा रुख, पुलिस की कार्यशैली पर उठाये सवाल, जानें पूरा मामला

Updated at : 09 Oct 2020 8:08 AM (IST)
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नाबालिग को जिंदा जलाने के मामले में झारखंड हाइकोर्ट का कड़ा रुख, पुलिस की कार्यशैली पर उठाये सवाल, जानें पूरा मामला

गिरिडीह के धनवार थाना क्षेत्र स्थित ईंटासानी में 30 मार्च को 15 वर्षीय नाबालिग को उसके घर में ही जलाने के मामले मं झारखंड हाइकोर्ट ने कड़ा रूख अपनाया है

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गिरिडीह : गिरिडीह के धनवार थाना क्षेत्र स्थित ईंटासानी में 30 मार्च को 15 वर्षीय नाबालिग को उसके घर में ही जलाकर मार दिया गया था. घटना के छह माह बाद भी आरोपी नहीं पकड़ाये हैं. इसे लेकर नाबालिग के पिता ने हाइकोर्ट में याचिका दायर की थी. सुनवाई के दौरान गुरुवार को जस्टिस आनंद सेन की बेंच ने पूरे मामले में अब तक की जांच पर असंतोष जताया.

कोर्ट ने टिप्पणी की : हाथरस जैसी घटनाएं सिर्फ यूपी में ही नहीं, झारखंड में भी हो रही हैं. हाइकोर्ट ने पूरे मामले की जांच एसआइटी से कराने का आदेश दिया है. हाइकोर्ट ने डीजीपी को निर्देश दिया है कि वे मामले की जांच के लिए एसआइटी गठित करें. इसमें वरीय पुलिस अधिकारियों को शामिल करें और दोषियों को अविलंब गिरफ्तार किया जाये.

यह भी कहा है कि डीजीपी स्वयं जांच की निगरानी करें. यह भी ध्यान रहे कि सबूत के साथ छेड़छाड़ न हो और न ही गवाहों को प्रभावित किया जाये. कोर्ट ने कहा है कि यदि पीड़ित पक्ष चाहे, तो जांच में लापरवाही बरतनेवाले अफसरों के खिलाफ भी कार्रवाई करें. मामले की सुनवाई के दौरान गिरिडीह के एसपी अमित रेणु वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिये मौजूद थे.

उन्होंने अदालत को बताया कि सुपरविजन में प्राथमिकी में कही हुई बातों से विपरीत जांच में तथ्य सामने आया है. यह मामला हत्या का नहीं बल्कि ऑनर किलिंग का प्रतीत होता है. इस बिंदु पर जांच की जा रही है. जो भी दोषी होंगे, उनके खिलाफ कार्रवाई की जायेगी.

20 दिन बाद स्वाब भेजने पर भी जतायी नाराजगी

जस्टिस आनंद सेन की बेंच ने मामले की केस डायरी को देखने के बाद अब तक की जांच को असंतोषजनक बताया. कहा कि ऐसे गंभीर मामले की जांच इतने हल्के तरीके से नहीं की जानी चाहिए. कोर्ट ने इस घटना को काफी गंभीर माना है और 15 वर्षीय नाबालिग को जलाकर मारने की घटना को जघन्य बताया है.

अब तक की जांच को नाकाफी बताया है. हाइकोर्ट ने कहा कि पीड़िता के स्वाब को जांच के लिए पुलिस ने 20 दिनों बाद क्यों भेजा? यह पुलिस की कार्यशौली पर सवाल खड़े करता है. महाधिवक्ता राजीव रंजन ने राज्य सरकार की ओर से पक्ष रखा. जबकि पीड़ित पक्ष से अरविंद कुमार ने कोर्ट में दलील पेश की.

क्या है मामला

30 मार्च को जब घटना हुई थी उस वक्त नाबालिग घर में अकेली थी, जबकि परिजन पूजा करने बाहर गये थे. 31 मार्च को पीड़ित परिवार ने धनवार थाने में केस दर्ज कराया. इसमें पिंटू पासवान को आरोपी बनाया गया था, जिसे अब तक गिरफ्तार नहीं किया गया है. पीड़िता के कमरे से आरोपी का टोपी और चप्पल भी पुलिस ने बरामद किया था. घटनास्थल पर केरोसिन की गंध आ रही थी. कहा जा रहा है कि आरोपी और नाबालिग के बीच प्रेम प्रसंग चल रहा था. इस बिंदु पर जांच बाकी है.

posted by : sameer oraon

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