मुख्य न्यायाधीश एमएस रामचंद्र राव व जस्टिस दीपक रौशन की खंडपीठ ने याचिका पर सुनवाई की और कहा कि प्रथम दृष्टया संवैधानिक अधिनियम 2016 के अनुसार टैक्स की वसूली करने का अधिकार स्थानीय क्षेत्र को नहीं है. इस आदेश के बाद गिरिडीह नगर निगम और झारखंड सरकार ने राहत के लिए आवेदन लगाया था, जिस आवेदन को मुख्य न्यायाधीश एमएस रामचंद्र राव व जस्टिस दीपक रौशन की खंडपीठ ने खारिज कर दिया.
झारखंड नगरपालिका अधिनियम 2011 की धारा 152(3) के अंतर्गत टोल लगाने के नियम नहीं
मुख्य न्यायाधीश एमएस रामचंद्र राव व जस्टिस दीपक रौशन की खंडपीठ ने कहा कि चूंकि झारखंड नगरपालिका अधिनियम 2011 की धारा 152(3) के अंतर्गत टोल लगाने के संबंध में कोई नियम नहीं बनाये गये हैं. इसलिए हम 18 दिसंबर, 2024 को हमारे द्वारा दिये गये अंतरिम आदेश को रद्द करने या संधोशित करने का कोई कारण नहीं दिखता है. यह तर्क देते हुए झारखंड हाईकोर्ट ने सरकार की ओर से दायर आवेदन को खारिज कर दिया और कहा कि मामले को यथा समय अंतिम सुनवाई के लिए सूचिबद्ध किया जाये.
टोल वसूली पर स्टे जारी रहेगा
हाईकोर्ट के इस आदेश के बाद टोल वसूली मामले में नगर निगम को कोई राहत नहीं मिली है. ऐसे में टोल वसूली पर स्टे जारी रहेगा. बताते चलें कि वित्तीय वर्ष 2024-25 के लिए प्रवेश शुल्क की बंदोबस्ती 3.68 करोड़ रुपये में की गयी थी. यह बंदोबस्ती मेसर्स सुमन कुमार राय के नाम से की गयी थी. बंदोबस्ती के बाद छोटे मालवाहकों से 70 रुपये, यात्री बस से 130 रुपये, 407 एवं छह चक्का मालवाहक से 80 रुपये, आठ चक्का से लेकर बारह चक्का ट्रक से 130 रुपये और बारह चक्का के ऊपर के मालवाहकों से 180 रुपये की वसूली की जा रही थी. बताया जाता है कि गिरिडीह नगर निगम को सबसे ज्यादा राजस्व होल्डिंग टैक्स के बाद प्रवेश शुल्क से ही प्राप्त हो रहा था. इस प्रवेश शुल्क वसूली के खिलाफ प्रार्थी मोंगिया स्टील लिमिटेड की ओर से अरविंद कुमार यादव ने झारखंड हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी.
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