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मॉनसून में देरी से बढ़ी कृषकों की चिंता

Updated at : 24 Jun 2024 11:56 PM (IST)
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मॉनसून में देरी से बढ़ी कृषकों की चिंता

मॉनसून में विलंब होने से किसानों की परेशानी बढ़ने लगी है. खरीफ फसल की खेती के लिए बीज की बुआई के लिए सबसे बेहतर समय रोहिणी व मृगशिरा नक्षत्र समाप्त हो गया. आद्रा शुरू हुए तीन दिन बीत गये, लेकिन, अभी तक बीज की बुआई शुरू नहीं हुई है.

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खेती-किसानी. रोहिणी नक्षत्र में नहीं हुई बुआई, मृगशिरा भी सूखे में बीता, आद्रा में भी अभी तक शुरू नहीं हुई बारिश

देवरी. मॉनसून में विलंब होने से किसानों की परेशानी बढ़ने लगी है. खरीफ फसल की खेती के लिए बीज की बुआई के लिए सबसे बेहतर समय रोहिणी व मृगशिरा नक्षत्र समाप्त हो गया. आद्रा शुरू हुए तीन दिन बीत गये, लेकिन, अभी तक बीज की बुआई शुरू नहीं हुई है. देवरी में धान, मूंग, उड़द, अरहर, मड़ुआ, बाजरा, सरसों, तिल, मकई आदि फसल की खेती होती है. वर्तमान समय में खरीफ फसल की खेती में बीज की बुआई का समय बीतता जा रहा है. इससे किसानों की चिंता बढ़ती जा रही है.

11 हजार हेक्टेयर में होती है खरीफ फसलों की खेती :

प्रखंड में सिंचाई के लिए पर्याप्त सुविधा नहीं रहने की वजह से मानसून की बारिश पर आश्रित रहकर खरीफ फसल की खेती करते हैं. प्रखंड में कुल 11 हजार हेक्टेयर भूमि पर खरीफ फसल की खेती होती है. इसमें सबसे ज्यादा खेती धान की होती है. वहीं वर्तमान मानसून के आने में विलंब की वजह से किसान खरीफ फसल में एक भी फसल की बीज की बुआई का कार्य शुरू नहीं कर पाए हैं. किसान अशोक राय, सदानंद दास, शुक्कर शर्मा, अनिल सिंह, वजीर महतो, राजकुमार वर्मा, चितलाल मंडल, बालेश्वर यादव, फत्तूलाल महतो आदि का कहना है कि मौसम का यही हाल रहा तो देवरी प्रखंड में लगातार तीसरे वर्ष खरीफ फसल की खेती प्रभावित हो जाएगी.

सूखा से परेशान हैं किसान :

बताते चलें कि अल्पवृष्टि की वजह से वर्ष 2022 में क्षेत्र में भयंकर सूखा पड़ा. फलस्वरूप 2022 में खरीफ फसल की खेती पूरी तरह से प्रभावित हो गयी थी. महज 03 प्रतिशत भूमि पर धान की खेती व 11 प्रतिशत भूमि पर मोटा अनाज की खेती हो पायी थी. वर्ष 2023 में भी खेती प्रभावित हुई 2023 में महज 32 प्रतिशत भूमि पर धान की खेती हो पायी. वर्ष 2024 में अभी तक बीज की बुआई शुरू नहीं हो पायी है. कृषि विभाग से मिली जानकारी के मुताबिक 2020 में धान 98 प्रतिशत, मोटा अनाज 98 प्रतिशत, 2021 में धान 98 प्रतिशत, मोटा अनाज 98 प्रतिशत, 2022 में धान 03 प्रतिशत मोटा अनाज 11 प्रतिशत, 2023 धान 32 प्रतिशत, मोटा अनाज 96 प्रतिशत भूमि पर ही खेती हो पायी.

क्या कहते हैं किसान

बारिश नहीं होने से खेत की जोताई का काम नहीं हो पा रहा है. इससे बीज की बुआई भी शुरू नहीं हो पा रही है. प्रखंड के किसान लगातार तीसरे साल अल्पवृष्टि का सामना कर रहे हैं. फिर एक बार सुखाड़ का सामना करना पड़ सकता है.

अशोक राय, किसान मित्र, असको

प्रखंड के किसान मुख्य रूप से धान की खेती करते हैं. धान बीज बुआई के लिए रोहिणी नक्षत्र सबसे उत्तम माना जाता है, लेकिन रोहिणी के बाद मृगशिरा नक्षत्र भी समाप्त हो गया है. अभी तक धान के बीज की बुआई शुरू नहीं हो पायी है.

चितलाल मंडल, लाहीबारी

मृगशिरा समाप्त होकर आद्रा नक्षत्र शुरू हो गया, लेकिन अभी तक बीज की बुआई शुरू नहीं हो पायी है. बीज की बुआई जितना विलंब होगा, फसल की उपज भी उतनी ही प्रभावित होगी. लागत के अनुसार भी उपज नहीं होगा.

राजकुमार वर्मा, बेड़ोडीह

क्या कहते हैं प्रखंड कृषि पदाधिकारी

प्रखंड कृषि पदाधिकारी संजय साहू ने कहा कि बारिश नहीं होने से बीज की बुआई प्रभावित हुई है, हालांकि किसान बुआई के लिए तैयार हैं. बारिश होते ही बुआई कार्य शुरू होने की उम्मीद है. पैक्सों में धान का बीज उपलब्ध हो गया है. किसान पैक्स के माध्यम से बीज प्राप्त कर सकते हैं.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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