कार्यशाला का उद्घाटन करते हुए डीसी रामनिवास यादव ने कहा कि बाल विवाह में प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से शामिल होनेवाले दोषी होंगे और जेल जायेंगे. इसमें किसी भी स्तर की सहभागिता दंडनीय है. कार्यक्रम के दौरान महिलाओं की सुरक्षा, अधिकार, आत्मनिर्भरता, सरकारी योजनाओं तथा सामाजिक सशक्तीकरण से जुड़े विभिन्न विषयों पर प्रशिक्षण दिया गया. फिल्म के जरिये बाल विवाह की रोकथाम को लेकर लोगों को जागरूक किया गया. इस दौरान डीसी श्री यादव ने कहा कि बाल विवाह जैसी कुरीतियों के मामले में गिरिडीह राज्य भर में चौथे स्थान पर है. इसे समाप्त करने में सभी की भागीदारी जरूरी है. उन्होंने कहा कि इससे जुड़ी सूचना रात के तीन बजे भी मिलेगी तो खुद वहां पहुंचकर उसे रोक दूंगा.
पंचायत सचिव भी अधिकार संपन्न
डीसी ने कहा कि बाल विवाह रोकने में बीडीओ, सीओ, शिक्षा पदाधिकारी और डीसी को जितनी शक्ति प्रदान की गयी है, उतनी ही पंचायत सचिव को है. इस दौरान डीसी ने सभी को महिला उत्पीड़न और बाल विवाह की रोकथाम को ले शपथ दिलायी. कार्यक्रम में डीएसडब्ल्यूओ बिनोद कुमार सिंह, बगोदर-सरिया एसडीओ संतोष कुमार गुप्ता, बगोदर-सरिया एसडीपीओ धनंजय कुमार राम, बगोदर बीडीओ निशा कुमारी, सीओ प्रवीण कुमार, सरिया, बिरनी बीडीओ, सीओ, गिरिडीह जिप उपाध्यक्ष छोटेलाल प्रसाद, बगोदर प्रखंड प्रमुख आशा राज, उप प्रमुख हरेंद्र कुमार सिंह, जिप सदस्य अनूप पांडेय, पूर्व जिप सदस्य सरिता महतो, मुखिया सरिता साव, बीस सूत्री अध्यक्ष गुलाम सरवर समेत बड़ी संख्या में महिलाएं, एसएचजी सदस्य, आंगनबाड़ी सेविकाएं एवं सामाजिक कार्यकर्ता उपस्थित थीं.
प्रशासन को सूचना के बाद भी नहीं रुका बाल विवाह : लीलावती
इधर, कार्यशाला के दौरान बगोदर प्रखंड की अलगडीहा की पंसस लीलावती देवी ने बाल विवाह रोकने को लेकर प्रशासनिक महकमा को सूचना देने के बावजूद भी कार्रवाई नहीं होने का मामला उठाया. उन्होंने कहा कि छह माह पूर्व पंचायत की एक लड़की बाल विवाह की शिकार हो रही थी. सूचना स्थानीय पुलिस से लेकर प्रखंड प्रशासन को भी दी गयी थी, पर इसमें कोई कार्रवाई नहीं की जा सकी. डीसी ने इसकी जानकारी स्थानीय प्रशासनिक अधिकारियों से ली. डीसी ने पंसस का हौसला बढ़ाते हुए मोमेंटो देकर सम्मानित किया.
बाल विवाह मुक्त कराने को लेकर कार्यशाला का आयोजन कलजमुआ. सामाजिक कुरीतियों के उन्मूलन, राज्य सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन तथा बाल विवाह मुक्त झारखंड के लक्ष्य को साकार करने के उद्देश्य से नौ जनवरी को पेटहंडी मैदान में खोरीमहुआ अनुमंडल स्तर पर प्रशिक्षण-सह-कार्यशाला का आयोजन किया जायेगा. इसे सफल बनाने के लिए प्रशासन एवं संबंधित विभागों ने सभी जनप्रतिनिधियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और विभागीय पदाधिकारियों से सहयोग करने की अपील की है. कार्यशाला में दहेज प्रथा, बाल विवाह, नशाखोरी, अंधविश्वास एवं अन्य सामाजिक बुराइयों पर विस्तार से चर्चा की जायेगी. बीडीओ अमलजी ने कहा कि कार्यशाला में बाल विवाह मुक्त झारखंड अभियान को लेकर विशेष सत्र होगा.इसमें बाल विवाह की पहचान, रोकथाम, कानूनी प्रावधान, रिपोर्टिंग प्रक्रिया तथा समुदाय की भूमिका पर प्रशिक्षण दिया जायेगा. इस प्रशिक्षण से जमीनी स्तर पर कार्यरत कर्मियों की क्षमता में वृद्धि होगी और बाल विवाह के मामलों पर प्रभावी नियंत्रण संभव हो सकेगा. बताया कि कार्यक्रम में आंगनबाड़ी सेविका, सहायिका, सहिया, स्वयंसेवी संस्थाओं के प्रतिनिधि, पंचायत प्रतिनिधि, शिक्षा एवं स्वास्थ्य विभाग के कर्मी, पुलिस प्रशासन तथा सामाजिक कार्यकर्ताओं की सहभागिता सुनिश्चित की गई है.
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