हम अधिकारों को लेकर सजग, पर कर्तव्यों के प्रति उदासीन
Published by : SANJAY Updated At : 14 Apr 2025 9:54 PM
हम अधिकारों को लेकर सजग, पर कर्तव्यों के प्रति उदासीन
गढ़वा. मूल निवासी संघ जिला ईकाई गढ़वा के तत्वाधान में राष्ट्र निर्माता डॉ भीम राव आंबेडकर एवं राष्ट्रपिता ज्योति बा फूले की जयंती बंधन मैरेज हॉल गढ़वा में आयोजित की गयी. इसमें काफी संख्या में लोगों ने बढ़चढ़ कर हिस्सा लिया. इस मौके पर झारोटेफ के जिलाध्यक्ष सुशील कुमार ने कहा कि लोकतंत्र एक व्यवस्था नहीं है अपितु एक जीवनशैली है. यह नागरिकों को व्यक्तिगत स्वतन्त्रता, सामाजिक समरसता और न्याय का वादा करता है. लेकिन साथ ही उनसे सजगता, जागरूकता और जिम्मेवारी की अपेक्षा भी करता है. भारत विश्व का सबसे बड़ा लोकतंत्र है, लेेकिन हम इसके सबसे जिम्मेदार नागरिक नहीं हैं. हमने लोकतंत्र को केवल एक वोट देने का औजार मान लिया है. भारतीय संविधान ने हमें कई मौलिक अधिकार दिये हैं, इसमें बोलने की आजादी, धर्म की स्वतंत्रता और जीवन एवं स्वतंत्रता का अधिकार शामिल है. लेकिन 1976 में 42वें संशोधन द्वारा संविधान में 11 मौलिक कर्तव्य जोड़े गये. इनमें राष्ट्र की अखंडता की रक्षा, संविधान का सम्मान, प्राकृतिक संसाधनों की सुरक्षा और वैज्ञानिक सोच को बढ़ावा देने जैसे पहलू भी शामिल हो गये. आज ज्यादातर नागरिक अपने अधिकारों को लेकर सजग हैं, लेकिन अपने कर्तव्यों के प्रति उदासीन हैं.
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