35 वर्षों से नशे की गिरफ्त में दुलदुलवा गांव की 11 माह में बदली तसवीर

प्रयास को सलाम. एसडीएम संजय कुमार और महिलाओं की एकजुटता ने 35 साल पुराने अवैध शराब कारोबार को किया खत्म
प्रयास को सलाम. एसडीएम संजय कुमार और महिलाओं की एकजुटता ने 35 साल पुराने अवैध शराब कारोबार को किया खत्म जितेंद्र सिंह, गढ़वा जिले के मेराल प्रखंड स्थित दुलदुलवा गांव अब प्रदेश में एक प्रेरणादायक बदलाव की मिसाल बनकर उभरा है. तीन राज्यों उत्तर प्रदेश, बिहार और छत्तीसगढ़ की सीमाओं से लगे इस क्षेत्र की पहचान पहले अवैध देसी शराब के गढ़ के रूप में थी, लेकिन अब यहां नशा मुक्ति की लहर दौड़ रही है. 35 वर्षों से यहां देसी शराब निर्माण एक कुटीर उद्योग का रूप ले चुका था. गांव और आसपास के जंगलों में 100 से अधिक अवैध भट्ठियों से हर माह लगभग 20 हजार लीटर देशी शराब का उत्पादन होता था. यह शराब न केवल पलामू प्रमंडल बल्कि सीमावर्ती जिलों तक तस्करी की जाती थी. लेकिन बीते 11 माह में गांव की तस्वीर पूरी तरह बदल गयी है और इस बदलाव के केंद्र मेंगढ़वा अनुमंडल पदाधिकारी (एसडीएम) संजय कुमार हैं. तीन मई 2025 को एसडीएम संजय कुमार ने ””””शराब मुक्त दुलदुलवा”””” अभियान की शुरुआत की. गांव के पंचायत भवन में पहली चौपाल लगायी गयी. शुरुआती दौर में ग्रामीणों की भागीदारी कमजोर रही, लेकिन संजय कुमार ने हार नहीं मानी. पहले चरण में 12 से अधिक अवैध भट्ठियों को ध्वस्त किया गया, सैकड़ों क्विंटल महुआ जावा और हजारों लीटर शराब जब्त की गयी. माफिया जंगलों में फिर सक्रिय हो गये, तब उन्होंने सीआरपीएफ की मदद से ड्रोन कैमरा लगवाकर 100 से अधिक भट्ठियों को पूरी तरह ध्वस्त किया. महिलाओं ने बदली गांव की तकदीर शराब के खिलाफ इस जंग में गांव की महिलाओं ने अभूतपूर्व भूमिका निभायी. 200 से अधिक महिलाएं अभियान से जुड़ीं और पंचायत भवन में आयोजित महिला चौपालों में अपनी पीड़ा बतायी. शराब के कारण उनके घर उजड़ गये थे, बच्चों का भविष्य अंधकारमय था, और शाम का समय भयावह बन गया था. कई महिलाओं ने गुप्त जानकारी देकर छिपे अड्डों का भंडाफोड़ किया. शराबी पिता की मौत के बाद मां ने भी छोड़ा गांव की सुनैना (10) और सोनपरी (8) की कहानी ने सभी को झकझोर दिया. उनके पिता की शराब के कारण मौत हो गयी और मां उन्हें छोड़कर चली गयी. अब वे नाना के भरोसे पल रही हैं. कई परिवार ऐसे हैं जहां शराब ने जीवन को बर्बादी में बदल दिया है. गांव की सावित्री देवी बताती हैं कि शराब से ज्यादा समस्या इसे पीने वालों की है. शाम होते ही गांव का माहौल डरावना हो जाता था और महिलाएं रिश्तेदारों से मिलने से कतराती थीं. गांव को गोद लेकर एसडीएम ने किया लोगों से संवाद संजय कुमार ने केवल दंडात्मक कार्रवाई नहीं की बल्कि सुधारात्मक उपायों पर जोर दिया. उन्होंने गांव को गोद लिया और सीधे संवाद की प्रक्रिया शुरू की. पीपल के पेड़ के नीचे चौपाल लगाकर बुजुर्गों, बच्चों, युवाओं और महिलाओं से अलग-अलग बातें की. उन्होंने समझाया कि अवैध व्यापार कानूनी रूप से अपराध है और बच्चों के लिए घातक भी है. गांव की छवि अब शराब के गढ़ से उम्मीदों की धरती बन गयी है. महिलाएं और पुरुष साफ कह रहे हैं कि वे अपने बच्चों को इस जहरीले धंधे से दूर रखना चाहते हैं. युवतियां अब आत्मनिर्भरता की दिशा में सोच रही हैं. शराब कारोबार छोड़ने वालों को मिला ब्रांड एंबेसडर का दर्जा एसडीएम ने घोषणा की कि जो लोग शराब का धंधा छोड़ रहे हैं उन्हें प्रशासन सम्मानित करेगा और नशा विरोधी माहौल बनाने में उन्हें ब्रांड एंबेसडर बनाया जाएगा. इससे समाज में नई पहचान मिलेगी और अन्य लोग प्रेरित होंगे. पंचायत भवन में आयोजित बैठक में लगभग 200 ग्रामीणों ने भाग लिया. प्रशासन ने बताया कि जो लोग अवैध धंधा छोड़ेंगे उन्हें ऋण, सब्सिडी और सरकारी योजनाओं के तहत वैकल्पिक आजीविका के लिए मदद दी जायेगी. कृषि, पशुपालन, हस्तशिल्प या अन्य स्वरोजगार में रुचि दिखाने वालों को आवश्यक प्रशिक्षण और संसाधन प्रदान कियेे जायेंगे. जिसके बाद बदलाव देखने को मिला. पहले गांव में पुलिस या सरकारी वाहन आते ही लोग भाग जाते थे. अब तस्वीर बदल गयी है. एसडीएम के गांव पहुंचते ही लोग उनके पास आते हैं, सुझाव देते हैं और सहयोग का वचन देते हैं. यह प्रशासन पर बढ़े विश्वास का परिणाम है. अब डर नहीं, बदलाव चाहिए गांव की अनीता देवी बताती हैं कि लोग पहले यहां बारातों में इसलिए आते थे कि शराब आसानी से मिल जाती थी. अब महिलाएं चाहती हैं कि कलंक खत्म हो, बेटियों की शादी में लोग संकोच न करें और घर का माहौल सम्मानजनक हो. दुलदुलवा की कहानी सिर्फ एक गांव की नहीं है, बल्कि पूरे झारखंड और देश के लिए संदेश है कि इच्छाशक्ति से दशकों पुरानी सामाजिक बुराइयां जड़ से मिटाई जा सकती हैं. ग्रामीणों की काउंसलिंग लगातार जारी एसडीएम ने दुलदुलवा गांव को गोद लिया और नियमित दंडात्मक कार्रवाई और स्नेहभरी काउंसलिंग के जरिए कई लोगों को शराब के अवैध कारोबार से दूर किया. हर दिन ग्रामीणों से संवाद और व्यक्तिगत समस्याओं को सुनकर उन्हें नशा कारोबार छोड़ने के लिए प्रेरित किया जा रहा है.
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