अगले सात दिनों मौसम में उतार-चढ़ाव की संभावना नहीं

Published by : Prabhat Khabar News Desk Updated At : 25 Feb 2025 9:30 PM

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अगले सात दिनों मौसम में उतार-चढ़ाव की संभावना नहीं

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गढ़वा. कृषि विज्ञान केंद्र गढ़वा के प्रधान वैज्ञानिक डॉ अशोक कुमार ने कहा है कि पश्चिमी विक्षोभ के कारण पिछले सप्ताह झारखंड के लगभग आधा दर्जन जिलों में मुख्य रूप से पश्चिम एवं पूर्वी सिंहभूम, सरायकेला-खरसावां, सिमडेगा, गुमला, लोहरदगा, रांची एवं संथाल परगना में वर्षा के साथ कहीं-कहीं ओलावृष्टि भी हुई है. इसका आंशिक असर गढ़वा में भी देखने को मिला है. बंगाल की खाड़ी में जो टर्फ बना था, वह धीरे-धीरे तेलंगाना के तरफ बढ़ गया है. परं अब जम्मू कश्मीर में पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय हो गया है. इसके कारण जम्मू कश्मीर, लद्दाख, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश के ऊपरी भागों में बर्फबारी हो रही है. इसका असर उत्तर प्रदेश तक दिखने के आसार हैं. साथ ही इसका आंशिक असर गढ़वा जिले में भी देखने का मिल सकता है. कृषि वैज्ञानिक ने कहा कि मौसम पूर्वानुमान के अनुसार अगले सात दिनों का मौसम गत सप्ताह जैसा ही रहेगा. पिछले सप्ताह दिन एवं रात के तापक्रम का अंतर सामान्य से अधिक रहा. अगले सात दिनों में जिले में दिन का तापक्रम जहां 31-33 डिग्री सेल्सियस के आसपास रहने की उम्मीद है, वहीं रात का तापक्रम 12 से 17 डिग्री के बीच रहने की संभावना है. दिन में गर्मी रहेगी और मौसम शुष्क रहेगा. किसानों को सलाह : ऐसी स्थिति में किसानों को फसलों में आवश्यकतानुसार सिंचाई सुनिश्चित कर लेना होगा. गेहूं की फसल में 20 से 25 दिन के अंतराल पर सिंचाई करते रहना होगा. कृषि विज्ञानी ने यूरिया का छिड़काव अब नहीं करने की सलाह दी है. उन्होंने कहा कि अरहर की फसल में फूल लगने पर 15 दिन के अंतराल पर तीन छिड़काव कर दें. इन्डॉक्साकार्ब का पहला एवं तीसरा छिड़काव एक मिलीलीटर प्रति लीटर पानी की दर से घोलकर करें एवं बीच में एक छिड़काव फिपरोनिल का एक मिलीलीटर प्रति लीटर पानी में मिलाकर करें. डॉ कुमार ने कहा कि जड़ वाली फसलों में पोटाश खाद का अधिक महत्व है. इसलिए प्याज, लहसुन एवं ओल की खेती में यूरिया, डीएपी के साथ-साथ 40 किलोग्राम पोटाश खाद (एमओपी) प्रति एकड़ के दर से व्यवहार करें. प्याज में खरपतवार प्रबंधन के लिए निराई-गुड़ाई करना बेहतर है. उन्होंने कहा कि फसलों में छिड़काव जब हवा शांत रहे, उस समय करना श्रेयस्कर है. किसान भाई नकली दवाओं से बचने के लिए जीएसटी बिल प्राप्त करके ही खरीदारी करें.

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