जेटेट नियमावली पर कैबिनेट में फैसला टला, मिथिलेश ठाकुर ने बताया 'शुभ समाचार' तो भानु शाही बोले- युवाओं की जीत

Published by : Sweta Vaidya Updated At : 16 Apr 2026 10:16 AM

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छात्रों का समूह सांकेतिक तस्वीर (AI Image)

Garhwa News: जेटेट की नई नियमावली पर कैबिनेट में तीखे विरोध के चलते फैसला टल गया. वहीं नेताओं के बीच इसे लेकर श्रेय लेने की होड़ तेज हो गई है. इससे जुड़ी खबर नीचे पढ़ें.

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गढ़वा से अविनाश की रिपोर्ट

Garhwa News: झारखंड शिक्षक पात्रता परीक्षा (जेटेट) की नई नियमावली को लेकर राज्य में सियासी घमासान छिड़ गया है. कहा जा रहा है कि बुधवार को हुई कैबिनेट की बैठक में मंत्रियों के कड़े विरोध के बाद नियमावली को स्वीकृति नहीं मिल सकी. भोजपुरी, मगही और अंगिका को क्षेत्रीय भाषा की सूची से बाहर रखने पर उपजे विवाद के कारण फिलहाल इस पर फैसला टाल दिया गया है. जानकारी के अनुसार, कैबिनेट की बैठक में वित्त मंत्री राधा कृष्ण किशोर और ग्रामीण विकास मंत्री दीपिका पांडे सिंह ने नियमावली के वर्तमान स्वरूप पर आपत्ति जताई. उन्होंने मांग की कि पलामू प्रमंडल में भोजपुरी और मगही को शामिल किया जाए. दोनों मंत्रियों के कड़े रुख के बाद सरकार को इस पर फैसला टालना पड़ा. अब इस पर नए सिरे से विचार किया जाएगा. 

श्रेय लेने की होड़ 

भले ही तकनीकी रूप से इस विषय पर फैसला टला हो, लेकिन गढ़वा-पलामू की राजनीति में इसे ‘रद्द’ मानकर श्रेय लेने की होड़ मच गई है. पूर्व मंत्री सह झामुमो के केंद्रीय महासचिव मिथिलेश ठाकुर ने इसे सोशल मीडिया पर साझा करते हुए लिखा- शुभ समाचार. जेटेट नियमावली रद्द कर दी गयी है. अब गढ़वा-पलामू  के छात्रों को अनुचित दंड का भागी नहीं होना पड़ेगा. जय हो हेमंत सरकार.

वहीं भाजपा प्रदेश उपाध्यक्ष सह पूर्व मंत्री भानु प्रताप शाही ने इसे युवाओं की हुंकार बताते हुए कहा यह पलामू के 50 लाख भोजपुरी-मगही भाषियों की जीत है. पलामू प्रमंडल के युवा जिंदाबाद. 

विधायक ने दी थी चेतावनी 

बता दें कि इस मुद्दे को लेकर भाजपा विधायक सत्येंद्र नाथ तिवारी और भानु प्रताप शाही ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया था. आक्रोश इतना था कि विधायक सत्येंद्र नाथ तिवारी ने झामुमो, कांग्रेस और राजद के नेताओं को पलामू प्रमंडल में ‘घुसने नहीं देने’ तक की चेतावनी दे डाली थी. 

युवाओं में नाराजगी की वजह 

स्कूली शिक्षा विभाग की नियमावली में जिलावार जनजातीय और क्षेत्रीय भाषा का प्रावधान है. इसमें एक भाषा का चयन अनिवार्य है, जिसमें भोजपुरी-मगही को शामिल न किए जाने से पलामू प्रमंडल के युवा खुद को ठगा महसूस कर रहे थे.

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लेखक के बारे में

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श्वेता वैद्य प्रभात खबर डिजिटल में जूनियर कंटेंट राइटर के तौर पर कार्यरत हैं. कंटेंट राइटिंग के क्षेत्र में एक साल से अधिक का अनुभव है. पिछले करीब दो महीनों से वे झारखंड बीट पर सक्रिय रूप से काम कर रही हैं. इस दौरान वे राज्य से जुड़ी ताजा खबरों, लोगों से जुड़े मुद्दे और जरूरी जानकारियों पर आधारित स्टोरीज तैयार कर रही हैं. इससे पहले उन्होंने लाइफस्टाइल बीट के लिए भी कंटेंट लिखा. इस बीट में उन्होंने रेसिपी, फैशन, ब्यूटी टिप्स, होम डेकोर, किचन टिप्स, गार्डनिंग टिप्स और लेटेस्ट मेहंदी डिजाइन्स जैसे रोजमर्रा की जिंदगी से जुड़े विषयों पर रोचक और उपयोगी आर्टिकल लिखे. श्वेता की हर बार कोशिश यही रहती है कि बात आसान, साफ और सीधे तरीके से लोगों तक पहुंचे, जिससे कि हर कोई उसे बिना दिक्कत के समझ सके. कंटेंट राइटर के तौर पर उनका फोकस होता है कि कंटेंट सिंपल, रिलेटेबल और यूजर-फ्रेंडली हो.

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