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गढ़वा में 38 साल से नहीं हुई प्लंबर की बहाली, बढ़ रहा चापाकल मरम्मति का खर्च

Updated at : 30 Nov 2025 9:26 PM (IST)
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गढ़वा में 38 साल से नहीं हुई प्लंबर की बहाली, बढ़ रहा चापाकल मरम्मति का खर्च

अंतिम बार 1988 में हुई थी प्लंबर की बहाली, सभी हो चुके हैं सेवानिवृत्त

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अंतिम बार 1988 में हुई थी प्लंबर की बहाली, सभी हो चुके हैं सेवानिवृत्त पीयूष तिवारी, गढ़वा जिले में पिछले 38 वर्षों से प्लंबर (चापाकल मिस्त्री) की नियमित बहाली नहीं होने से पेयजल एवं स्वच्छता विभाग पर मरम्मति का खर्च लगातार बढ़ता जा रहा है. विभाग हर वर्ष चापाकल की मरम्मति के लिए कम से कम दो बार निविदा आमंत्रित करता है, जिससे खर्च में अनावश्यक बढ़ोतरी हो रही है. जानकारी के अनुसार, केवल इस वर्ष गर्मी के तीन महीने अप्रैल, मई और जून में ही विभाग ने चापाकलों की मरम्मति पर (प्लंबर व हेल्पर मद में) 12.24 लाख रुपये से अधिक राशि खर्च की है. इसमें मरम्मति के दौरान बदली जाने वाली सामग्री का खर्च शामिल नहीं है, क्योंकि सामग्री विभाग स्वयं उपलब्ध कराता है. ऐसे में पूरे वर्ष का खर्च करोड़ रुपये तक पहुंचने की आशंका है. विशेषज्ञों का कहना है कि यदि जिले में सरकारी प्लंबर और हेल्पर की बहाली कर दी जाये, तो न केवल विभागीय चापाकलों, बल्कि विधायक मद, 14वें एवं 15वें वित्त आयोग से लगाए गए चापाकलों की मरम्मति भी कम लागत में संभव हो सकेगी. उल्लेखनीय है कि गढ़वा जिले में पेयजल एवं स्वच्छता विभाग से अधिष्ठापित चापाकलों की संख्या 15,088 है, जिनमें से 4,782 इस समय नॉन फंक्शनल हैं. जिले में अंतिम बार वर्ष 1988 में प्लंबर की बहाली हुई थी, लेकिन वे भी करीब सात-आठ वर्ष पहले सेवानिवृत्त हो चुके हैं. वर्तमान में विभाग पूरी तरह टेंडर आधारित मरम्मति पर निर्भर है. जिले में 20 प्लंबरों की आवश्यकतागढ़वा जिले के 20 प्रखंडों के लिए कम से कम 20 प्लंबरों की आवश्यकता बतायी गयी है. फिलहाल प्लंबर तो नहीं हैं, लेकिन नलकूप खलासी के पद पर छह लोग कार्यरत हैं. इनमें तीन गढ़वा, एक रमकंडा और दो श्रीबंशीधर नगर में तैनात हैं. हालांकि ये सभी अगले दो वर्षों में सेवानिवृत्त होने वाले हैं. विभाग में एक की मैन सह चौकीदार भी सेवा में हैं. गर्मी में 1530 चापाकलों की हुई मरम्मति इस वर्ष गर्मी के तीन महीनों में कुल 1530 चापाकलों की मरम्मति कराई गयी. अप्रैल में 388, मई में 643 व जून में जून में 499 चापाकलों की मरम्मति करायी गयी. प्रत्येक चापाकल की मरम्मति पर प्लंबर एवं सहायक प्लंबर मद में 800 से 900 रुपये खर्च हुए. एक चापाकल की मरम्मति में सामान्यतः एक प्लंबर और दो सहयोगी लगते हैं, जो एक दिन में तीन से चार चापाकल दुरुस्त कर सकते हैं. यह सरकार के स्तर का विषय है : अजय सिंह पेयजल एवं स्वच्छता विभाग के कार्यपालक अभियंता अजय सिंह ने बताया कि प्लंबर बहाली का निर्णय सरकार के स्तर का है, इसलिए इस पर वे कोई टिप्पणी नहीं कर सकते. हालांकि उन्होंने कहा कि टेंडर प्रक्रिया से मरम्मति का खर्च ज्यादा नहीं होता है.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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Akarsh Aniket

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By Akarsh Aniket

Akarsh Aniket is a contributor at Prabhat Khabar.

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