हत्या के मामले में चार लोगों को आजीवन सश्रम कारावास

कुल चार लोगों को आजीवन सश्रम कारावास व पांच हजार आर्थिक जुर्माना की सजा सुनायी है.
प्रतिनिधि, गढ़वा अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश द्वितीय प्रभात कुमार शर्मा की अदालत में हत्या करने के आरोप में अलग-अलग मामलों में कुल चार लोगों को आजीवन सश्रम कारावास व पांच हजार आर्थिक जुर्माना की सजा सुनायी है. सजा पाने वालों में रंका थाना के उचरी निवासी झूमन भुइयां एवं बूद्धू भुइयां, जबकि अन्य मामले के आरोपी गढ़वा थाना के बालीगढ़ निवासी हुसैन खान उर्फ हसनैन खान उर्फ शाह आलम एवं इमरान खान का नाम शामिल है .मालूम हो कि गढ़वा थाना कांड संख्या 16/ 2009 में मृतका के पत्नी आइशा बीवी ने तत्कालीन थाना के पदाधिकारी के समक्ष बयान दर्ज करायी थी कि उसके पति सरफुद्दीन के साथ अपने गांव से मायके मसूरिया जाने के क्रम में बालीगढ़ गांव के पहाड़ के नजदीक सभी आरोपी उसके पति को घेर लिया तथा मारपीट करने लगे. जब वह दौड़कर गिंजना गांव गयी, तो वहां के ग्रामीणों के साथ घटनास्थल पर पहुंची तो देखी थी आरोपी मारपीट करके, वहां से भाग गये हैं. इसी कारण में उनकी मृत्यु हो गयी. घटना के कारण था कि करीब चार वर्ष पूर्व सूचिका के पुतोह के साथ आरोपी इमरान खान द्वारा चापाकल पानी भरने के क्रम में मारपीट किया गया था. मारपीट होने के कारण केस किया गया था, जो सुलह करने के लिए पूर्व से भी दबाव बनाया जा रहा था. सुलह नहीं करने के कारण उसके पति की हत्या कर दिया गया. इस आशय की जानकारी के आधार पर बयान दर्ज कर उसके आधार पर प्राथमिकी दर्ज कर उनलोगों के विरुद्ध आरोप पत्र समर्पित किया गया न्यायालय द्वारा आरोप गठन कर साक्ष्य कलमबद्ध करते हुए दोनों को दोषी पाते हुए सजा सुनाया. जबकि अन्य मामला में सूचक ललन राम के बयान के आधार पर प्राथमिक की दर्ज की गयी है जिसमें आरोप लगाया गया है कि सूचक का भाई राजेंद्र भुइयां की शादी मानपुर में हुई थी. वह अपने परिवार को लेने गया अन्य परिवार के साथ विदाई नहीं होने के कारण वापस आ गया विदाई नहीं होने का आरोप अपने गांव का ही जो शादी कराया है. उसी के संबंध में अपने घर में बातचीत हो रहा था. इसी क्रम में कोई बात को सुनकर जानकारी दिया. जिस पर विवाद उत्पन्न हो गया विवाद को लेकर के झुमन भुइयां और बुद्धू भुइयां अन्य लोगों के साथ 26 अक्टूबर 2001 में ललन राम के घर आकर रात में गाली गलौज मारपीट करने लगे मारपीट के क्रम में मुलहर भुइयां एवं सरटू भुइयां जख्मी हो गये. जिनका इलाज के क्रम में मृत्यु हो गयी. इस आशय की जानकारी पर रंका थाना के द्वारा कांड संख्या 81 /2001 दर्ज कर आरोपी के विरुद्ध अनुसंधान जारी कर घटना को सत्य पाते हुए आरोपी के विरुद्ध आरोप पत्र समर्पित किया गया. न्यायालय द्वारा न्यायिक कार्य के दौरान उपलब्ध दस्तावेज एवं साक्ष्य के आधार पर भादवि की धारा 302 पब्लिक 34 में दोषी पाते हुए दोनों आरोपियों को आजीवन सश्रम कारावास एवं ₹5000 आर्थिक जुर्माना की सजा सुनायी गयी. बचाव पक्ष की ओर से अधिवक्ता बृज देव विश्वकर्मा. जबकि अभियोजन पक्ष की ओर से लोक अभियोजक उमेश दीक्षित ने पैरवी की.
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