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कृषि व्यवस्था में सुधार के लिए किसानों को मिले सहयोग : प्रतिमा

Updated at : 08 Nov 2025 9:08 PM (IST)
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कृषि व्यवस्था में सुधार के लिए किसानों को मिले सहयोग : प्रतिमा

जिला स्तरीय रबी कार्यशाला का आयोजन

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जिला स्तरीय रबी कार्यशाला का आयोजन

प्रतिनिधि, मेदिनीनगर

शुक्रवार को चियांकी स्थित कृषि क्षेत्रीय अनुसंधान केंद्र में जिला स्तरीय रबी कार्यशाला हुई. पलामू जिला कृषि विभाग व आत्मा ने संयुक्त रूप से कार्यशाला का आयोजन किया. कार्यशाला का उद्घाटन जिला परिषद अध्यक्ष प्रतिमा कुमारी, उपाध्यक्ष आलोक कुमार सिंह उर्फ टुटू सिंह, जिला कृषि पदाधिकारी दीपक कुमार, कृषि विज्ञान केंद्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. राजीव कुमार, जेडआरएस वैज्ञानिक डॉ प्रमोद कुमार, जिला उद्यान पदाधिकारी सावन कुमार, भूमि संरक्षण पदाधिकारी श्याम मुरारी बिंद के साथ संयुक्त रूप से किया. कार्यक्रम की अध्यक्षता डीएओ दीपक कुमार व संचालन सुरेंद्र विश्वकर्मा ने किया. जिप अध्यक्ष प्रतिमा कुमारी ने कहा कि किसानों को खेती कार्य के लिए बेहतर सुविधा व सहायता मिलनी चाहिए, किसान अन्नदाता है. सुविधा व सहयोग मिलने से कृषि कार्य मेें उन्हें सहूलियत मिलेगी. उन्होंने कहा कि सरकार कृषि व्यवस्था को सुदृढ़ कर रही है. किसानों को लाभ पहुंचाने के लिए कई तरह की योजना संचालित है. किसान खेती कार्य के नयी तकनीक का उपयोग कर अपनी आय को दोगुना कर सकते है. जिला परिषद उपाध्यक्ष आलोक कुमार सिंह उर्फ टुटू सिंह ने कहा कि पलामू में खेती किसानी के लिए भूमि उपजाऊ है. लेकिन सिंचाई व अन्य सुविधा के अभाव में खेती कार्य प्रभावित होता है. वैसे भी पलामू रैनशैडो क्षेत्र के दायरे में आता है. ऐसी स्थिति में सरकार को चाहिए कि सिंचाई की समुचित व्यवस्था करें, ताकि खेती का कार्य पानी के अभाव में प्रभावित न हो. उन्होंने कहा कि पलामू में दलहन व तेलहन खेती की संभावनाएं अधिक है. इसका उत्पादन बढ़ाने के लिए किसानों को प्रोत्साहित किया जाना चाहिए. जिप उपाध्यक्ष ने बेमौसम बारिश से किसानों की फसल बर्बाद होने का मामला उठाया. उन्होंने कहा कि हवा व पानी के कारण 30 प्रतिशत से अधिक धान की फसल बर्बाद हो गया. इससे किसान मायूस हैं व हताश है. ऐसी स्थिति में किसानों को क्षतिपूर्ति के लिए आर्थिक सहयोग किया जाना चाहिए. अलग राज्य गठन के 25 वर्ष पूरा होने के बाद भी किसानों की दशा में सुधार नहीं हुआ. डीएओ दीपक कुमार ने कहा कि किसानों को पारंपरिक खेती के साथ फूल बागवानी, पशुपालन, मत्स्य पालन, मधुमक्खी पालन और सब्जी उत्पादन जैसे वैकल्पिक खेती के क्षेत्रों में भी आगे बढ़ना चाहिए. उन्होंने कहा कि वैज्ञानिक पद्धति से खेती करने पर कम लागत में अधिक मुनाफा संभव है. कार्यक्रम के अंत में वैज्ञानिकों ने किसानों को नयी कृषि तकनीकों, योजनाओं और वैकल्पिक फसलों की उपयोगिता के बारे में विस्तृत जानकारी दी. मौके पर परियोजना निदेशक आत्मा प्रवीण राज, सहायक कृषि पदाधिकारी श्याम किशोर प्रसाद, वैज्ञानिक स. प्रधान, प्रखंड कृषि पदाधिकारी, तकनीकी प्रबंधक सहित कई किसान मौजूद थे.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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Akarsh Aniket

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By Akarsh Aniket

Akarsh Aniket is a contributor at Prabhat Khabar.

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