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छठ के लिए सतबहिनी झरना तीर्थ स्थल पर पड़ोसी राज्यों से भी पहुंचते हैं श्रद्धालु

Updated at : 24 Oct 2025 8:25 PM (IST)
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छठ के लिए सतबहिनी झरना तीर्थ स्थल पर पड़ोसी राज्यों से भी पहुंचते हैं श्रद्धालु

छठ के लिए सतबहिनी झरना तीर्थ स्थल पर पड़ोसी राज्यों से भी पहुंचते हैं श्रद्धालु

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उपेंद्र नारायण द्विवेदी, कांडी प्रखंड का सतबहिनी झरना तीर्थ स्थल छठ महापर्व के दौरान आस्था केंद्र बन जाता है. यहां छठ महापर्व का भव्य आयोजन होता है, जिसे देखने और अनुष्ठान करने के लिए झारखंड के विभिन्न जिलों के साथ-साथ पड़ोसी राज्य उत्तर प्रदेश, छत्तीसगढ़ और बिहार से भी लाखों की संख्या में श्रद्धालु और छठ व्रती आते हैं. छठ पर्व के आयोजन के कारण यह स्थान न केवल गढ़वा जिले, बल्कि पड़ोसी जिला पलामू और रोहतास (बिहार), उत्तर प्रदेश और छत्तीसगढ़ राज्यों के छठ व्रतियों के लिए भी एक प्रमुख केंद्र बन गया. यह गढ़वा जिले के मुख्य छठ घाटों में से एक है. सतबहिनी झरना तीर्थ स्थल पर तीन विशाल छठ घाट हैं. छठ के दौरान पूरा मेला मैदान और मंदिर परिसर छठ व्रतियों से खचाखच भर जाता है. आयोजन को सफल बनाने में संत हरिदास, पुजारी नीतीश पाठक, प्रवीण पांडेय, विधायक प्रतिनिधि अतीस कुमार सिंह, कार्यकारी अध्यक्ष अरुण सिंह, गोरख सिंह, शम्भू सिंह, ध्रुव कुमार पांडेय, हरिनाथ चंद्रवंशी, विनोद चंद्रवंशी, अवधेश गुप्ता, असर्फी सिंह, विभूति नारायण द्विवेदी, नवल किशोर तिवारी, बटेश्वर सिंह, देवी दयाल राम, मुखिया प्रतिनिधि अरुण राम, रमेश तिवारी आदि सक्रिय रूप से जुटे हुए हैं. पुलिस व गोताखोरों की भी रहती है व्यवस्था छठ के दौरान यहां मां सतबहिनी झरना तीर्थ व पर्यटन स्थल विकास समिति व्रतियों के लिए टेंट, लाइटिंग, पेयजल, साउंड सिस्टम, सुरक्षा के लिए पुलिस और गोताखोरों की व्यवस्था करती है. साथ ही यहां पर मां सतबहिनी, बजरंगबली, भगवान शिव, मां काली, मां लक्ष्मी, भगवान भास्कर (सूर्य मंदिर) सहित कई मंदिर हैं, जहां छठ व्रती स्नान के बाद पूजा-अर्चना करते हैं. प्राकृतिक रूप से काफी सुंदर है स्थल यह स्थान धार्मिक के साथ-साथ प्राकृतिक रूप से काफी सुंदर भी है. झरना, नदी व आसपास हरा-भरा वातावरण इस स्थल को छठ पूजा के लिए और भी अधिक मनोरम बना देता है. व्रती और उनके परिजन अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ्य देने के बाद पूरी रात यहीं रुकते हैं, जिससे पूरा नदी घाटी क्षेत्र गुलजार रहता है. झारखंड सरकार के पर्यटन विभाग ने फरवरी 2019 में श्री वंशीधर मंदिर और गुरुसिंधु जलप्रपात के साथ-साथ सतबहिनी झरना तीर्थ को भी पर्यटन स्थल का दर्जा प्रदान किया. यह भी इस स्थल के बढ़ते महत्व को दर्शाता है. क्या कहते हैं विधायक विश्रामपुर के विधायक सह सतबहिनी झरना तीर्थ व पर्यटन स्थल विकास समिति के अध्यक्ष नरेश प्रसाद सिंह ने कहा कि हमारा दृढ़ संकल्प है कि यह पावन स्थल और अधिक स्वच्छ, सुव्यवस्थित व दिव्य रूप में तैयार हो, ताकि यहां आने वाले श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा न हो और वे निर्विघ्न भाव से छठ महापर्व का अनुष्ठान संपन्न कर सकें.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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Akarsh Aniket

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By Akarsh Aniket

Akarsh Aniket is a contributor at Prabhat Khabar.

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