गढ़वा में तुलसी, नींबू के पौधे लगाकर विद्यालयों ने डकार लिये 60-60 हजार रुपए

पीएमश्री उत्क्रमित उवि खरसोता मझिआंव. फोटो : प्रभात खबर
Corruption in PM Shree Schools of Garhwa: ग्लोबल वार्मिंग के दौर में स्कूलों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों को अपनी पारंपरिक जड़ी-बूटी के बारे में जानकारी देने के उद्देश्य से सरकार ने एक योजना शुरू की. स्कूलों को इसके लिए बाकायदा 60-60 हजार रुपए दिये गये. गढ़वा जिले में अधिकतर पीएमश्री स्कूलों ने तुलसी, नींबू आदि के पौधे लगाकर पूरी राशि का गबन कर लिया. क्या-क्या खेल हुआ, यहां पढ़ें.
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Corruption in PM Shree Schools of Garhwa| गढ़वा, पीयूष तिवारी : ग्लोबल वार्मिंग के इस दौर में विद्यालय स्तर से ही बच्चों को पर्यावरण के प्रति जागरूक करने और विद्यालय का वातावरण इको-फ्रेंडली बनाने के उद्देश्य से उपलब्ध करायी गयी 15 लाख रुपए से अधिक की सरकारी राशि का गबन कर लिया गया है. जिले के सभी 26 पीएमश्री विद्यालयों को 60-60 हजार रुपए उपलब्ध कराये गये थे. इसमें से 10-10 हजार रुपए हर्बल/मेडिकल गार्डेन व 50-50 हजार रुपए एक्टिविटी प्रमोटिंग ग्रीन स्कूल योजना के तहत मिले थे.
स्कूलों को मिले थे 15 लाख रुपए
इस प्रकार सभी विद्यालयों को करीब 15 लाख रुपए दिये गये. जांच में पाया गया कि सभी विद्यालयों में पौधे लगाने के नाम पर औपचारिकता निभायी गयी. यह खुलासा अपर समाहर्ता के नेतृत्व में गठित 3 सदस्यीय जांच टीम ने किया है. इस टीम में जिला शिक्षा अधीक्षक और कोषागार पदाधिकारी (ट्रेजरी ऑफिसर) भी शामिल थे. तीनों पदाधिकारियों ने 8 सितंबर 2025 को पत्रांक 969 के माध्यम से अपनी जांच रिपोर्ट जिले को सौंपी है.
Corruption in PM Shree Schools: क्या है पूरा मामला?
गढ़वा जिले में कुल 26 पीएमश्री से मान्यता प्राप्त सरकारी विद्यालय हैं. वित्तीय वर्ष 2024-25 में हर्बल/मेडिकल गार्डेन योजना के तहत विद्यालयों को राशि उपलब्ध करायी गयी थी. इस राशि से विद्यालयों में औषधीय, जड़ी-बूटी वाले, फलदार, इमारती और फूलों के पौधे लगाने थे. जांच टीम ने पाया कि कई विद्यालयों में एक भी पौधा नहीं लगाया गया. जिन विद्यालयों में पौधे लगाये गये, वहां भी औषधीय पौधों के नाम पर मात्र तुलसी, एलोवेरा और नींबू के 10-20 पौधे लगाये गये.
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20-30 पौधे लगाकर पूरा खर्च दिखा दिया
अन्य पौधों में आम, आंवला, पीपल और अमरूद जैसे 20-30 पौधे ही लगाकर सारी राशि खर्च दिखा दी गयी. योजना के तहत पौधों की घेराबंदी भी करनी थी, परंतु जांच में पाया गया कि किसी भी विद्यालय में घेराबंदी नहीं की गयी. जांच रिपोर्ट में कहा गया है कि किसी भी विद्यालय में राशि के अनुरूप (60 हजार रुपए) पौधे उपलब्ध नहीं कराये गये.
- अपर समाहर्ता के नेतृत्व में गठित 3 सदस्यीय जांच टीम ने पकड़ी गड़बड़ी
- पीएमश्री से मान्यता प्राप्त जिले के 26 विद्यालयों को दिये गये थे 60-60 हजार रुपये
- 10 हजार हर्बल गार्डन व 50 हजार रुपये एक्टिविटी प्रमोटिंग ग्रीन स्कूल योजना के लिए दिये गये थे
- किसी भी विद्यालय में न तो पर्याप्त मात्रा में पौधे लगाये गये और न ही घेराबंदी की गयी
2 एजेंसियों को ही मिली आपूर्ति की जिम्मेदारी
पूरे जिले में पौधों की आपूर्ति की जिम्मेदारी केवल 2 एजेंसियों युवा सदन आरोग्य, रांची व गुप्ता ट्रेडर्स, भवनाथपुर (गढ़वा) को दी गयी थी. उल्लेखनीय है कि इस राशि की निकासी वित्तीय वर्ष समाप्त होने के मात्र 4 दिन पूर्व, 25 मार्च से 30 मार्च 2025 के बीच की गयी थी.
किस विद्यालय में कितने पौधे लगाये गये
| क्रम | स्कूल का नाम | कौन-कौन से पौधे लगाये |
|---|---|---|
| 1 | शालिग्राम मध्य विद्यालय, सोनपुरवा (गढ़वा) | एक भी पौधा नहीं लगाया गया. |
| 2 | यूपीजी रोहनियाटांड़, भंडरिया | एक भी पौधा नहीं लगाया गया. |
| 3 | यूपीजी उवि डोल, चिनिया | मात्र चार आंवला के पौधे लगाये गये. |
| 4 | यूजीपी सोनेहारा, डंडई | तुलसी, पपीता, अंगूर और नींबू के 15 पौधे लगाये गये. |
| 5 | यूपीजी उवि खरसोता, मझिआंव | नींबू, आम, अंगूर, अनार के 40 पौधे लगाये गये. |
| 6 | यूपीजी अमहर, विशुनपुरा | तुलसी, नींबू, आम, अशोक, मोरपंखी, अंगूर, पीपल के 80 पौधे. |
| 7 | यूपीजी उवि ओबरा, बरडीहा | तुलसी, नींबू, आम, अमरूद, यूकेलिप्टस, अंगूर के 40 पौधे. |
| 8 | यूपीजी उवि तेनार, गढ़वा | मात्र 20 पौधे लगाये गये. |
| 9 | मध्य विद्यालय, डंडई | आम, अमरूद, अंगूर के 40 पौधे व 20 प्लास्टिक गमले. |
| 10 | यूपीजी एमएस खपरो, रंका | मात्र 80 पौधे लगाये गये. |
| 11 | मध्य विद्यालय, रक्सी (रमकंडा) | तुलसी, करी पत्ता, नींबू, पपीता, अंगूर, कटहल के 50 पौधे. |
| 12 | मध्य विद्यालय, सिलिदाग (रमना) | कुल 60 पौधे लगाये गये. |
| 13 | मध्य विद्यालय, संग्रहे (गढ़वा) | तुलसी, करी पत्ता और नींबू सहित 170 पौधे लगाये गये, लेकिन सभी सूख गये. |
| 14 | आरके उवि चितविश्राम, नगरउंटारी | नींबू, नीम, शरीफा, आंवला, पीपल, बरगद के 150 पौधे. |
| 15 | यूपीजी पीएस खूरा, बड़गड़ | नीम, तुलसी, आंवला, नींबू, कटहल, आम के 20 पौधे व 20 गमले. |
| 16 | यूपीजी मवि भूसवा, मझिआंव | 20 पौधे व 10 प्लास्टिक गमले. |
क्या था योजना का उद्देश्य?
एक्टिविटी प्रमोटिंग ग्रीन स्कूल योजना का उद्देश्य विद्यार्थियों को पर्यावरणीय शिक्षा देना और विद्यालयों को हरित एवं स्थायी बनाना था. वहीं ‘हर्बल मेडिकल गार्डेन योजना’ के तहत विद्यालय परिसरों में औषधीय पौधों का बगीचा तैयार करना था, ताकि छात्र पारंपरिक चिकित्सा और जड़ी-बूटियों के महत्व को समझ सकें. जांच में पाया गया कि उद्देश्य से भटककर योजना की राशि का दुरुपयोग किया गया.
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By Mithilesh Jha
मिथिलेश झा PrabhatKhabar.com में पश्चिम बंगाल राज्य प्रमुख (State Head) के रूप में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार हैं। उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 32 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव है। उनकी रिपोर्टिंग राजनीति, सामाजिक मुद्दों, जलवायु परिवर्तन, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि और अन्य समसामयिक विषयों पर केंद्रित रही है, जिससे वे क्षेत्रीय पत्रकारिता में एक विश्वसनीय और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित हुए हैं. अनुभव : पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार में 3 दशक से अधिक काम करने का अनुभव है. वर्तमान भूमिका : प्रभात खबर डिजिटल (prabhatkhabar.com) में पश्चिम बंगाल के स्टेट हेड की भूमिका में हैं. वे डिजिटल न्यूज कवरेज करते हैं. तथ्यात्मक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता को प्राथमिकता देते हैं. वर्तमान में बंगाल चुनाव 2026 पर पूरी तरह से फोकस हैं. भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस पश्चिम बंगाल रहा है, साथ ही उन्होंने झारखंड और छत्तीसगढ़ में भी लंबे समय तक ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है, जो उनकी क्षेत्रीय समझ और अनुभव को दर्शाता है। मुख्य विशेषज्ञता (Core Beats) : उनकी पत्रकारिता निम्नलिखित महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों में गहरी विशेषज्ञता को दर्शाती है :- राज्य राजनीति और शासन : झारखंड और पश्चिम बंगाल की राज्य की राजनीति, सरकारी नीतियों, प्रशासनिक निर्णयों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर निरंतर और विश्लेषणात्मक कवरेज. सामाजिक मुद्दे : आम जनता से जुड़े सामाजिक मुद्दों, जनकल्याण और जमीनी समस्याओं पर केंद्रित रिपोर्टिंग. जलवायु परिवर्तन और नवीकरणीय ऊर्जा : पर्यावरणीय चुनौतियों, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और रिन्यूएबल एनर्जी पहलों पर डेटा आधारित और फील्ड रिपोर्टिंग. डाटा स्टोरीज और ग्राउंड रिपोर्टिंग : डेटा आधारित खबरें और जमीनी रिपोर्टिंग उनकी पत्रकारिता की पहचान रही है. विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) तीन दशकों से अधिक की निरंतर रिपोर्टिंग, विशेष और दीर्घकालिक कवरेज का अनुभव तथा तथ्यपरक पत्रकारिता के प्रति प्रतिबद्धता ने मिथिलेश झा को पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत के लिए एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है
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