ePaper

भवनाथपुर के आंगनबाड़ी केंद्र बदहाल, बच्चों को नहीं मिल रहीं सुविधाएं

Updated at : 12 Oct 2025 8:20 PM (IST)
विज्ञापन
भवनाथपुर के आंगनबाड़ी केंद्र बदहाल, बच्चों को नहीं मिल रहीं सुविधाएं

भवनाथपुर के आंगनबाड़ी केंद्र बदहाल, बच्चों को नहीं मिल रहीं सुविधाएं

विज्ञापन

विजय सिंह, भवनाथपुर भवनाथपुर में बाल विकास परियोजना के अंतर्गत संचालित आंगनबाड़ी केंद्रों की हालात चिंताजनक बनी हुई हैं. सरकार हर माह इन केंद्रों पर लाखों रुपये खर्च कर रही है, मगर बच्चों तक सेवाएं प्रभावी रूप से नहीं पहुंच रही हैं. विभागीय रिकॉर्ड के अनुसार परियोजना के दायरे में भवनाथपुर प्रखंड, केतार और खरौंधी आते हैं. प्रखंडवार केंद्र और खर्च का ब्योरा यह है भवनाथपुर में 66, केतार में 50 तथा खरौंधी में 50 केंद्र संचालित हैं. तीनों प्रखंडों में कुल 75 केंद्र किराये पर चल रहे हैं और प्रत्येक केंद्र किराये के लिए विभाग प्रति माह 1,000 रुपये देता है. कुल मिलाकर इन केंद्रों के संचालन पर सरकार लगभग 34 लाख रुपये प्रति माह खर्च कर रही है. यह राशि सेविका के मानदेय (16,60,000 रुपये), सहायिका के मानदेय (8,30,000 रुपये), किराया (75,000 रुपये) व नाश्ते/अंडे के बाउचर के लिए (8,30,000 रुपये) के रूप में वितरित होती है. हालांकि उपकरण और धन उपलब्ध होने के बावजूद अधिकतर केन्द्रों में बच्चों की उपस्थिति कम है और नाश्ता–अंडा जैसी अनिवार्य सुविधाएं अनुपस्थित पायी गयीं. तीनों प्रखंडों के 166 केन्द्रों की निगरानी के लिए केवल दो महिला पर्यवेक्षिका (रंजना कुमारी व संध्या रानी) हैं, जिससे जांच व अनुश्रवण चुनौतीपूर्ण बनता जा रहा है. पड़ताल से स्पष्ट हुआ कि बजट होने के बावजूद क्रियान्वयन की कमजोरी, निगरानी की कमी व पारदर्शिता के अभाव के कारण बच्चों को मिलने वाली मूलभूत सेवाएं प्रभावित हैं. केंद्रों के हालात केस नंबर-1 सिंदुरिया: सुबह 10:50 बजे केंद्र खुला था पर केवल एक बच्चा खेल रहा था. सेविका अनिता देवी और सहायिका सरिता देवी मौजूद थीं. सेविकाओं का कहना था कि बच्चे बाद में आयेंगे. केस नंबर-2 ढिकुलिया: केन्द्र खुला था, लगभग 11 बच्चे मौजूद थे, पर नाश्ता नहीं मिला. सेविका ने कहा कि नाश्ता तैयार किया जा रहा है. केस नंबर-3 भुइयां टोली कालोनी (बुका): 10–11 बच्चे थे केंद्र में मौजूद पर नाश्ता उन्हें नाश्ता नहीं दिया गया. साथ ही बच्चों ने कहा कि उन्हें कभी अंडा नहीं दिया जाता है. सेविका ने नाश्ते के अभाव की बात स्वीकार की. केस नंबर-4 पनिआही: केन्द्र किराये के मकान में चल रहा है. केंद्र में मात्र चार से पांच बच्चे ही मौजूद थे. स्थानीय लोगों के अनुसार मकान मालिक को सेविका मात्र 200 रुपये प्रति माह किराया देती हैं, जबकि विभाग से 1000 रुपये मिलता है. क्या कहते पदाधिकारी बीडीओ सह प्रभारी सीडीपीओ नंदजी राम ने बताया कि मामले को गंभीरता से लिया गया है. उन्होंने कहा कि महिला पर्यवेक्षिका से रिपोर्ट लेकर आवश्यक कार्रवाई की जायेगी और दोषियों पर अनुशासनात्मक कदम उठाए जायेंगे.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

विज्ञापन
Akarsh Aniket

लेखक के बारे में

By Akarsh Aniket

Akarsh Aniket is a contributor at Prabhat Khabar.

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन
Sponsored Linksby Taboola