बह रही सड़कें, खेतों में पड़ी दरारें
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Published at :14 Jul 2016 8:42 AM (IST)
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लगातार दो साल से अल्पवृष्टि से लोग परेशान थे. मौसम विभाग और स्काइमेट ने बेहतर मॉनसून की भविष्यवाणी की कि इस बार मॉनसून समय पर आयेगा और सामान्य बारिश होगी, तो किसानों की उम्मीदें जागीं. पहली बार मॉनसून की फुहाड़ें पड़ीं, तो उनके चेहरे खिल उठे. उन्होंने खेतों में हल चलाने और बिचड़ा डालने की […]
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लगातार दो साल से अल्पवृष्टि से लोग परेशान थे. मौसम विभाग और स्काइमेट ने बेहतर मॉनसून की भविष्यवाणी की कि इस बार मॉनसून समय पर आयेगा और सामान्य बारिश होगी, तो किसानों की उम्मीदें जागीं. पहली बार मॉनसून की फुहाड़ें पड़ीं, तो उनके चेहरे खिल उठे.
उन्होंने खेतों में हल चलाने और बिचड़ा डालने की योजना तैयार कर ली. मॉनसून बरसा, लेकिन अलग-अलग जगह पर बारिश की मात्रा अलग-अलग रही. गढ़वा के तीन प्रखंड में इतनी बारिश हुई कि जीना मुहाल हो गया. सड़कें और पुल बह गये. गांवों में बाढ़ से भारी तबाही मची. वहीं कई इलाकों में बारिश बेहद कम हुई. जिन किसानों ने पटवन कर खेतों में बीज डाले थे, उनके खेतों में दरारें आ गयी हैं. उनके चेहरे पर एक बार फिर चिंता की लकीरें दिख रही हैं.
खरौंधी : खरौंधी प्रखंड में मंगलवार की रात पुन: तेज बारिश से एक बार पुन: जनजीवन को नुकसान उठाना पड़ा है़ मंगलवार की रात में रह-रहकर कई जगह ठनका गिरने व सुबह तक बारिश होने से कई जगह आवागमन पुन: बाधित हो गया़ सिसरी में नया डायवर्सन धंस गया़, जिसके कारण आवागमन प्रभावित हो गया है़ वहीं सोन तटीय इलाकों में अतिवृष्टि की वजह से कई आहर टूट गये़ साथ ही कई क्षेत्रों में घरों में पानी घुस गया है़
इधर चर्चा है कि रिहंद डैम का पानी सोन नदी में छोड़ा जा रहा है़ यदि रिहंद डैम का पानी सोन नदी में इस समय छोड़ा गया, तो सोन नदी में बाढ़ आने का खतरा बन जायेगा़ इससे एक बार पुन: भारी परेशानी लोगों को झेलनी पड़ सकती है़ गौरतलब है कि पिछले तीन-चार जुलाई को इस क्षेत्र में तेज बारिश हुई थी, जिसकी वजह से पंडा व डोमनी नदी का पानी खतरे के निशान से ऊपर आ गया था़ रात में ठनका गिरने से शंकर पासवान का एक बैल व परिखा पासवान का भी एक बैल व गाय की मौत हो गयी़ इसी तरह कई अन्य जगह भी रात में ठनका गिरने की खबर है़
रमकंडा : एक तरफ जहां जिले के कई प्रखंडों में किसान अतिवृष्टि से परेशान हैं, वहीं रमकंडा प्रखंड में लगातार बारिश नहीं हो रही है़ इसके कारण अपने खेत में फसल बो चुके किसानों को काफी परेशान देखा जा रहा है़ पिछले काफी दिनों से बारिश नहीं होने के कारण धान के लगाये बिचड़ेवाले खेतों में दरारें पड़ने लगी हैं.
विदित हो कि आषाढ़ महीने के पहले सप्ताह में हुई बारिश से किसान उत्साहित होकर खेतों में बिचड़े बो दिये थे़ बिचड़े निकल भी चुके हैं. लेकिन इधर लगातार बारिश नहीं होने से बिचड़े खेत में सूखने लगे हैं. यदि दो-तीन दिन में बारिश नहीं हुई, तो यह बिचड़े पूरी तरह सूख जायेंगे़, जिसके कारण किसानों को धान से हाथ धोना पड़ेगा़
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