बिना काम किये निकाल लिये 2.73 करोड़ रुपये

Published at :22 Jun 2016 6:55 AM (IST)
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बिना काम किये निकाल लिये 2.73 करोड़ रुपये

गढ़वा : गढ़वा जिले में राष्ट्रीय ग्रामीण स्वरोजगार योजना के तहत बननेवाले माइक्रोलिफ्ट समूह सिंचाई योजना में 2.73 करोड़ रुपये के घोटाला का मामला प्रकाश में आया है़ बिना काम किये सारी राशि निकाल ली गयी है़ पलामू आयुक्त ने इसकी जांच की थी. मामला सही पाये जाने के बाद मंगलवार को गढ़वा पहुंची संयुक्त […]

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गढ़वा : गढ़वा जिले में राष्ट्रीय ग्रामीण स्वरोजगार योजना के तहत बननेवाले माइक्रोलिफ्ट समूह सिंचाई योजना में 2.73 करोड़ रुपये के घोटाला का मामला प्रकाश में आया है़ बिना काम किये सारी राशि निकाल ली गयी है़
पलामू आयुक्त ने इसकी जांच की थी. मामला सही पाये जाने के बाद मंगलवार को गढ़वा पहुंची संयुक्त सचिव ग्रामीण विकास विभाग की रेखा रानी एवं अवर सचिव बसंत कुमार मिंज ने इसके लिए जवाबदेह पदाधिकारियों को चिह्नित किया है़
एसजीएसवाइ की इस योजना के तहत सिंचाई समूह का निर्माण कर उनके बीच जीविकोपार्जन के लिए माइक्रोलिफ्ट दी गयी थी़ सिंचाई योजना के प्रत्येक यूनिट की लागत 4.97 लाख रुपये थी़ वर्ष 2009 से लेकर 2013 तक के बीच कुल 55 समूहों को माइक्रोलिफ्ट निर्माण कर जीविकोपार्जन के लिए 2.7335 करोड़ रुपये दिये गये थे़ इसमें से 1.3667 करोड़ रुपये अनुदान के थे़, जबकि इतनी ही राशि समूह को ऋण के रूप में उपलब्ध करायी गयी थी, जिसे बाद में वापस कर देने थे़
वर्ष 2015 में दर्ज कराया गया था मामला
गबन का यह मामला पिछले वर्ष लोकायुक्त के यहां दर्ज कराया गया था़ इसके बाद लोकायुक्त के निर्देश पर पलामू आयुक्त ने 27 अप्रैल 2015 को इसकी जांच की थी़ इसमें यह पाया गया था कि अनुदान की राशि का गबन तो किया ही गया है, साथ ही ऋण की राशि भी वापस नहीं लौटायी गयी है़
आयुक्त ने पाया था कि आधे से ज्यादा योजनाओं में काम हुआ ही नहीं है और योजना के अध्यक्ष, सचिव व कोषाध्यक्ष(इन्हीं के नाम से बैंक में खाता खुला था) ने मिल कर सारी राशि निकाल कर आपस में बांट ली है़ आयुक्त द्वारा इसकी रिपोर्ट लोकायुक्त को समर्पित किये जाने के बाद वहां से घोटाले के इस पूरे प्रकरण में कौन-कौन कर्मी व अधिकारी शामिल हैं, इसकी जवाबदेही तय करने के लिए मंगलवार को ग्रामीण विकास विभाग की एक टीम को गढ़वा भेजा गया था़ टीम में शामिल संयुक्त सचिव रेखा रानी ने बताया कि उन्हें चार सप्ताह के अंदर जिला प्रशासन से संबंधित पदाधिकारियों व कर्मचारियों को चिह्नित कर पूर्ण विवरणी उपलब्ध कराने के निर्देश लोकायुक्त की ओर से मिले हैं.
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