ओके जी...और रो पड़े कविलाश पांडेय

Published at :12 Dec 2015 6:53 PM (IST)
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ओके जी...और रो पड़े कविलाश पांडेय

अोके जी…और रो पड़े कविलाश पांडेय 100 वर्षीय वृद्ध ने वर्तमान चुनाव पर व्यथा जतायी.कहा- अब मन नहीं करता कि वोट डालें.12जीडब्ल्यूपीएच17- अपने पोता के कंधे पर मतदान के लिये जा रहे वृद्ध कविलाश पांडेय गढ़वा. गढ़वा प्रखंड के गांगी मतदान केंद्र संख्या 288 मतदान केंद्र पर 100 वर्षीय वृद्ध कविलाश पांडेय ने सहारे के […]

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अोके जी…और रो पड़े कविलाश पांडेय 100 वर्षीय वृद्ध ने वर्तमान चुनाव पर व्यथा जतायी.कहा- अब मन नहीं करता कि वोट डालें.12जीडब्ल्यूपीएच17- अपने पोता के कंधे पर मतदान के लिये जा रहे वृद्ध कविलाश पांडेय गढ़वा. गढ़वा प्रखंड के गांगी मतदान केंद्र संख्या 288 मतदान केंद्र पर 100 वर्षीय वृद्ध कविलाश पांडेय ने सहारे के साथ पहुंच कर मतदान किया. मतदान के बाद उन्होंने कहा कि उन्होंने आजादी की लड़ाई देखी है. देश आजाद हुआ, तो यह देश नेताओं का बन कर रह गया. सिपाही अपनी जान न्योछावर करते रहे और नेता मौज करते रहे. उन्होंने काफी आहत मन से मतदान के बाद कहा कि मतदान को लेकर वर्तमान में जो परिवेश बना है, उसे देख कर अब नहीं लगता कि वे मतदान करें. लेकिन देश का यह सबसे बड़ा पावन पर्व है, इसलिए मन नहीं माना और चलने-फिरने से लाचार होने के बावजूद सहारे के साथ वे मतदान करने पहुंचे हैं. देश के प्रति अपनी जज्बा व निष्ठा की प्रतिबद्धता को देखते हुए उन्होंने कहा कि काफी मशक्कत व बलिदान के बाद देश की आजादी मिली थी और आजादी के बाद से न जाने कितने बार चुनाव हुए और लोगों ने देश के बेहतरी के लिए मतदान किया. लेकिन नेताओं ने देश के मतदाताओं की लाज नहीं रखी. आज वे कुर्सी के लिए एक-दूसरे का गला काटने पर उतारू हैं. समाज पीछे की ओर जा रहा है. जनता कंगाल हो रही है और राजनेता मालामाल हो रहे हैं. ऐसे में जो आजादी के बाद के सपने हमने देखे थे, वह कहां खो गये, यह देख कर उन्हें तरस आता है. उन्होंने कहा कि उनकी उम्र काफी ज्यादा हो गयी है. उन्हें नहीं लगता कि आनेवाले चुनाव में वे मतदान कर पायेंगे. लेकिन लोगों के लिये यह संदेश जाना चाहिए कि जिस मनोभाव से लोग साफ व स्वच्छ राजनीति के लिए मतदान करते हैं, उस पर नेता खरा उतरें और समाज के सर्वांगीण विकास में जनता के साथ मिल कर अपनी भागीदारी निभायें. बातचीत करते-करते श्री पांडेय फफक-फफक कर रो पड़े और कहा कि पहले वाली एकता और भाईचारा नहीं रही. नयी पीढ़ी को इस खाई को पाटना होगा, तभी समाज में एकता व समरस्ता आयेगी.

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