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जिले में मतदाताओं की मैपिंग का कार्य 48 प्रतिशत पूरा

Updated at : 23 Nov 2025 9:10 PM (IST)
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जिले में मतदाताओं की मैपिंग का कार्य 48 प्रतिशत पूरा

जिला निर्वाचन पदाधिकारी सह उपायुक्त कर रहे हैं मॉनिटरिंग

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जिला निर्वाचन पदाधिकारी सह उपायुक्त कर रहे हैं मॉनिटरिंग पीयूष तिवारी, गढ़वा झारखंड को अभी उन 12 राज्यों की सूची में शामिल नहीं किया गया है, जहां विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआइआर) सक्रिय रूप से चल रहा है. बावजूद इसके गढ़वा जिले के दोनों विधानसभा क्षेत्रों गढ़वा और भवनाथपुर में बूथ लेवल अधिकारी (बीएलओ) मतदाता सत्यापन का टेबल वर्क अत्यंत गंभीरता से कर रहे हैं. इसके लिए व्यापक स्तर पर मैपिंग की जा रही है. इसमें बीएलओ मतदाताओं के दस्तावेज की जांच कर रहे हैं, परिवार के वोटर रिकॉर्ड का मिलान कर रहे हैं और सूची को अद्यतन कर रहे हैं. यह कार्य लगभग आधा पूरा हो चुका है और जल्द समाप्त होने की संभावना है. मैपिंग के बाद जिन लोगों के रिकॉर्ड में गड़बड़ी मिलेगी, उन्हें चिह्नित कर घर-घर सत्यापन किया जायेगा और वैध दस्तावेज मांगे जायेंगे. दस्तावेज प्रस्तुत नहीं करने पर नोटिस जारी होगा और फिर भी कागज नहीं देने पर उनका नाम मतदाता सूची से हटाया जा सकता है. गढ़वा जिले में मैपिंग का औसत कार्य 48.08% पूरा हो चुका है, जिसमें गढ़वा विधानसभा में यह 47% और भवनाथपुर में 51% कार्य हुआ है. उपायुक्त ने निर्देश दिया है कि अगले 10 दिनों में इसे कम से कम 10% और बढ़ाया जाये, जिसके बाद समीक्षा बैठक होगी. संभावना है कि झारखंड में फरवरी 2026 से एसआइआर सक्रिय रूप से शुरू किया जायेगा. उपायुक्त दिनेश कुमार यादव इस कार्य की निगरानी कर रहे हैं और किसी भी प्रकार की लापरवाही पर कार्रवाई की चेतावनी दी है. मैपिंग में हो रहा है 2003 सूची से मिलान मैपिंग के दौरान वर्ष 2003 की मतदाता सूची से वर्तमान मतदाताओं का संबंध देखा जा रहा है. माता-पिता व दादा-दादी का नाम 2003 या उससे पूर्व की सूची में है या नहीं, दस्तावेज पूर्ण हैं या नहीं इन सभी बिंदुओं की जांच की जा रही है. मृत, डुप्लिकेट और गलत प्रविष्टियों वाले नामों को भी चिह्नित किया जा रहा है. जिनके पारिवारिक रिकॉर्ड 2003 सूची में नहीं मिलते, उन्हें संदेहास्पद मानकर आगे कड़े सत्यापन से गुजरना होगा. फर्जी या अधूरे दस्तावेज पाए जाने पर नोटिस जारी होगा और मतदाता नाम निरस्त भी हो सकता है. एसआइआर को लेकर फैल रही अफवाहें बीएलओ द्वारा व्यापक सत्यापन किये जाने के कारण ग्रामीण क्षेत्रों में एसआइआर चर्चा का विषय बना हुआ है. इसके साथ कई भ्रम भी फैल रहे हैं. कुछ लोग इसे 2003 की सूची को मंईयां योजना और राशन कार्ड से जोड़कर देख रहे हैं. अफवाह है कि जिनके परिजनों का नाम 2003 में नहीं है, उन्हें योजनाओं का लाभ नहीं मिलेगा. निर्वाचन आयोग के निर्देश पर हो रहा कार्य जिला उपनिर्वाचन पदाधिकारी सुशील कुमार राय ने बताया कि मैपिंग शत-प्रतिशत तब पूरी मानी जायेगी जब एसआइआर पूरा हो जायेगा. पूरा कार्य निर्वाचन आयोग के निर्देशानुसार गंभीरता से किया जा रहा है.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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Akarsh Aniket

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By Akarsh Aniket

Akarsh Aniket is a contributor at Prabhat Khabar.

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