रोज 3000 से 4000 लीटर बनती है शराब

गढ़वा : कभी नक्सलियों के लिए मुख्य शरणस्थली रहा मेराल प्रखंड का दुलदुलवा गांव अवैध महुआ शराब चुलाई के मामले में पलामू प्रमंडल के सबसे बड़े केंद्र के रूप में स्थापित हो गया है़ यहां प्रतिदिन हजारों लीटर अवैध शराब की चुलाई हो रही है. शराब का कारोबार समाप्त करने के लिए यहां एसपी से […]
गढ़वा : कभी नक्सलियों के लिए मुख्य शरणस्थली रहा मेराल प्रखंड का दुलदुलवा गांव अवैध महुआ शराब चुलाई के मामले में पलामू प्रमंडल के सबसे बड़े केंद्र के रूप में स्थापित हो गया है़ यहां प्रतिदिन हजारों लीटर अवैध शराब की चुलाई हो रही है. शराब का कारोबार समाप्त करने के लिए यहां एसपी से लेकर दारोगा तक छापेमारी कर चुके है़ं, लेकिन शराब का कारोबार यहां बंद ही नहीं हो रहा है.
पुलिस या उत्पाद विभाग के पदाधिकारी भट्ठियां तोड़कर व सामग्री जब्त कर आते हैं, उसके दूसरे दिन से ही ठिकाना बदलकर शराब की चुलाई शुरू कर दी जाती है़ दुलदुलवा गांव में तैयार महुआ शराब मेराल व डंडई के अलावा गढ़वा ग्रामीण व शहरी क्षेत्र में भेजी जाती है. दुलदुलवा गांव आठ टोलों में विभक्त है. इन सभी में शराब के लिए सबसे ज्यादा प्रसिद्ध साव टोला है. इस टोले के कई घरों में शराब बनायी जाती है. अभी हाल ही में चार जुलाई को मद्य निषेध एवं उत्पाद विभाग की ओर से यहां छापेमारी की गयी है.
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