आदिम जनजाति बहुल गोबरदाहा गांव का मामला: इलाज के अभाव में आदिम जनजाति के बच्चे की मौत

Updated at : 31 Aug 2017 1:28 PM (IST)
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आदिम जनजाति बहुल गोबरदाहा गांव का मामला: इलाज के अभाव में आदिम जनजाति के बच्चे की मौत

रमकंडा: रमकंडा प्रखंड के आदिम जनजाति बहुल गोबरदाहा गांव में संदीप कोरवा के पुत्र अनमोल कोरवा (छह साल) की मौत बुधवार की सुबह बुखार से हो गयी़ वहीं संदीप की आठ वर्षीय पुत्री बबिता कुमारी मलेरिया से पीड़ित है़ उसे ममता वाहन से इलाज के लिये मेदिनीनगर भेजा गया है़ उसकी भी स्थिति गंभीर बतायी […]

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रमकंडा: रमकंडा प्रखंड के आदिम जनजाति बहुल गोबरदाहा गांव में संदीप कोरवा के पुत्र अनमोल कोरवा (छह साल) की मौत बुधवार की सुबह बुखार से हो गयी़ वहीं संदीप की आठ वर्षीय पुत्री बबिता कुमारी मलेरिया से पीड़ित है़ उसे ममता वाहन से इलाज के लिये मेदिनीनगर भेजा गया है़ उसकी भी स्थिति गंभीर बतायी गयी है़.
बताया गया कि अनमोल कोरवा को पिछले शुक्रवार से बुखार लग रहा था़ बुखार होने पर उसके परिजनों ने छत्तीसगढ़ के रामानुजगंज स्थित जीवनदीप अस्पताल में इलाज कराने के लिये अस्पताल गये हुए थे़ वहां इलाज के साथ चिकित्सक द्वारा खून की कमी बतायी गयी थी़ वहां से घर लौटने के बाद अनमोल को इलाज के बजाय झाड़फूंक कराया जाने लगा़ बुधवार की सुबह जब उसकी स्थिति बिगड़ गयी, तो उसे गांव के ही स्वास्थ्य उपकेंद्र में ले जाने का प्रयास किया गया़ लेकिन रास्ते में ही उसकी मौत हो गयी़.
इधर बबिता की इलाज के दौरान जांच में उसे मलेरिया बताया गया है़ इस घटना से संदीप कोरवा पूरी तरह से मानसिक रूप से टूट गया है़ ग्रामीणों ने उसके पुत्र की मौत के पीछे गरीबी एवं अशिक्षा बताया़ रामानुजगंज से लौटने के बाद पैसे के अभाव में अनमोल का इलाज आगे ले जाकर कराने के बजाय झाड़फूंक कराने में समय बीत गया और अनमोल की स्थिति बिगड़ गयी़.
विदित हो कि गोबरदाहा गांव में प्रत्येक साल यहां के आदिम जनजाति के लोग बीमारी होने पर सरकारी अस्पताल में इलाज कराने के बजाय झाड़फूंक कराते हैं अथवा नीम-हकीम चिकित्सक से इलाज कराते हैं. इस गांव में साल 2014 में चार, 2015 में पांच और 2016 में दो लोगों की मौत हो चुकी है़ मौत की खबर प्रकाशित होने के बाद पिछले साल उपायुक्त डॉ नेहा अरोड़ा गोबरदाहा पहुंचकर वहां के स्वास्थ्य सुविधा की जानकारी ली थी़ इस दौरान उपायुक्त ने वहां स्वास्थ्य व्यवस्था में सुधार का आश्वासन दिया था़ लेकिन इसके बाद भी स्वास्थ्य व्यवस्था में कोई सुधार नहीं हुआ़ इधर इसी महीने के पिछले सप्ताह में रमकंडा प्रखंड के अन्य गांवों को मिलाकर मलेरिया सहित विभिन्न बीमारी से 17 लोगों की मौत हो चुकी है़.
मुखिया पति विनोद प्रसाद, वार्ड पार्षद दशा देवी,पिंटू कोरवा, व्यासमुनी कोरवा, अमृत कोरवा, सुकन कोरवा, महेश सोनी, दिनेश यादव आदि ने आक्रोश व्यक्त करते हुए बताया कि उनके गांव का स्वास्थ्य उपकेंद्र मात्र दो एएनएम के भरोसे चल रहा है़ केंद्र में समुचित दवा भी उपलब्ध नहीं है़ सिर्फ प्रसव की व्यवस्था की गयी है़
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