हौसला: बाढ़ से बायीं बांकि नहर क्षतिग्रस्त, 3000 एकड़ खेत सिंचाई से वंचित, श्रमदान कर नहर की मरम्मत की
Updated at : 08 Aug 2017 11:42 AM (IST)
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बिशुनपुरा: प्रखंड के बायीं बांकि नहर के कई स्थानों पर क्षतिग्रस्त होने के कारण संध्या गांव के 3000 एकड़ भूमि में सिंचाई के लिए उक्त नहर से मिलनेवाली पानी नहीं मिल पाने के कारण गांव के लोगों की खेती बरबाद हो रही थी़ इस समस्या को लेकर ग्रामीणों ने कई बार स्थानीय विधायक, सांसद, प्रशासन […]
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बिशुनपुरा: प्रखंड के बायीं बांकि नहर के कई स्थानों पर क्षतिग्रस्त होने के कारण संध्या गांव के 3000 एकड़ भूमि में सिंचाई के लिए उक्त नहर से मिलनेवाली पानी नहीं मिल पाने के कारण गांव के लोगों की खेती बरबाद हो रही थी़ इस समस्या को लेकर ग्रामीणों ने कई बार स्थानीय विधायक, सांसद, प्रशासन व सिंचाई विभाग से इस नहर की तत्काल मरम्मत कराने की गुहार लगायी थी, लेकिन कोई नोटिस नहीं लिये जाने के बाद संध्या गांव के ग्रामीणों ने सोमवार को श्रमदान कर बायीं बाकी नहर का मरम्मत किया़.
नहर के पिछले वर्ष ही कई जगहों पर टूटने के कारण कई गांव के किसानों को नहर से पानी नहीं मिल पा रहा था़ इसके टूटने से खासकर संध्या गांव के किसानों को काफी नुकसान का सामना करना पड़ रहा था. इसे देखते हुए गांव के किसानों ने श्रमदान के तहत उक्त नहर के मरम्मत करने का फैसला लिया़ इसीके तहत किसानों ने सोमवार को उक्त नहर का मरम्मत कार्य किया़ इस वर्ष बारिश के बाद क्षतिग्रस्त नहर के टूटने की आशंका बढ़ गयी थी. इसको देखते हुए ग्रामीणों ने उक्त निर्णय लिया़.
गांव के किसान शिवबचन प्रसाद यादव, बलराम पासवान, चंद्रदेव राम, भुनेश्वर यादव, उखमजी यादव, रामाधार शर्मा, लालू यादव, मुंद्रिका यादव, मथुरा मेहता, राजदेव यादव, राजेंद्र यादव, ललन रजवार, द्वारिका यादव, बिक्रम शर्मा, अशोक यादव व नरेश यादव सहित श्रमदान में लगे सैकड़ों ग्रामीणों ने कहा कि सरकार किसानों के खेत में पानी पहुंचाने का दावा तो करती है, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और है़ वे श्रमदान से उक्त नहर का मरम्मत नहीं करते, तो उनकी खेती नहीं पाती़ किसान बलराम पासवान ने कहा की बिशुनपुरा बायीं बाकि सिंचाई नहर छोटी नहर है, लेकिन इससे पांच गांव के लगभग 20 हजार एकड़ भूमि सिंचित की जाती थी.
51 वर्ष पूर्व हुआ था बांकि नहर का निर्माण
जानकारी के अनुसार बायीं बांकि सिंचाई परियोजना का निर्माण पूर्व मंत्री स्वर्गीय भइया शंकर प्रताप देव के वर्ष 1965-66 में कराया गया था़ निर्माण के बाद मंत्री एवं विधायक के कार्यकाल में उक्त नहर की उड़ाही व मरम्मत के नाम पर करोड़ो रुपये के सरकारी राशि की बंदरबांट कर ली गयी़ लेकिन किसानों को कोई लाभ नहीं हुआ़ नहर बनने क बाद किसान खेत की पटवन का पैसा भी देते थे और पैसा का रसीद भी कटता था़ लेकिन दो साल से पटवन पूरी तरह बंद है़ कोई कर्मचारी यहां नहीं रहता, रख-रखाव के अभाव में इसकी हालत काफी जर्जर हो चुकी है़
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