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East Singhbhum News : आर्थिक तंगी व इलाज के अभाव में कर्मी की मौत

Updated at : 07 Nov 2025 12:07 AM (IST)
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East Singhbhum News : आर्थिक तंगी व इलाज के अभाव में कर्मी की मौत

आइसीसी कंपनी कमेटी द्वारा संचालित स्कूल मुसाबनी माइंस हाइस्कूल के चतुर्थ वर्गीय कर्मचारी गणेश गिरि की आर्थिक परेशानी के कारण समय पर उचित इलाज नहीं हो सका.

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मुसाबनी.

आइसीसी कंपनी कमेटी द्वारा संचालित स्कूल मुसाबनी माइंस हाइस्कूल के चतुर्थ वर्गीय कर्मचारी गणेश गिरि की आर्थिक परेशानी के कारण समय पर उचित इलाज नहीं हो सका. इस कारण उनकी असमय मौत हो गयी. कंपनी के कमेटी संचालित स्कूल के शिक्षक एवं शिक्षकेत्तर कर्मचारी दो दशक से वेतन बंद होने के कारण आर्थिक परेशानी झेल रहे हैं. कई शिक्षक एवं कर्मचारी आर्थिक संकट के कारण उचित इलाज के अभाव में असमय काल के गाल में समा गये. मुसाबनी माइंस हाइस्कूल में 26 शिक्षक एवं 7 कर्मचारी कार्यरत थे. इनमें से अबतक 7 की मौत हो चुकी है.

गणेश गिरि की 1 नवंबर को इलाज के अभाव में उनके पैतृक गांव मुंढाल में निधन हो गया. गणेश गिरि अपने पीछे वृद्ध मां, पत्नी एवं पुत्र छोड़ गये हैं. गणेश गिरि कुछ माह से बीमार थे. परिवार वालों ने सगे संबंधियों के सहयोग से उनका यथासंभव इलाज कराया. परिवार वालों के अनुसार असमय नौकरी चल जाने के कारण परिवार के समक्ष आर्थिक संकट हो गया. थोड़ी बहुत खेती से परिवार चलता है. गणेश गिरि के अलावे इससे पूर्व मुसाबनी माइंस हाइस्कूल के एमएम शर्मा, एसडी महतो, एलएनएल दास, एमपी शाह, रुमा बनर्जी, प्रेमचंद श्रीवास्तव की भी उचित इलाज के अभाव में समय से पहले मौत हो गयी. कंपनी कमेटी द्वारा संचालित मुसाबनी माइंस मिडिल व हाइस्कूल, सुरदा माइंस मिडिल व हाइस्कूल, मऊभंडार आइसीसी मिडिल व हाइस्कूल में 140 शिक्षक एवं कर्मचारी काम करते थे. इनमें से अब तक करीब 40 शिक्षक एवं कर्मचारियों की मौत आर्थिक परेशानी के कारण असमय हो गयी है. मुक्तभोगी शिक्षक विप्लब प्रसाद सिंह के अनुसार अगस्त 2002 से हमलोगों का वेतन भुगतान बंद है. 2011 तक बिना वेतन के ही शिक्षकों एवं कर्मचारियों ने काम किया. 1995 से महंगाई भत्ता, अंतरिम रिलीफ का बकाया का भुगतान नहीं हुआ है. साथ ही 1 जनवरी 1996 से वेतन फिटमेंट का भी लाभ नहीं मिला है. शिक्षकों एवं कर्मचारियों को बकाया वेतन के साथ-साथ ग्रेच्युटी का भुगतान भी नहीं किया गया है. कंपनी की कमेटी संचालित स्कूलों के शिक्षक, कर्मचारी एवं उनके परिवार बदहाली में जीने को मजबूर हैं.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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