East Singhbhum News : ब्रिटिश गो बैक का नारा लगाने पर भेजे गये थे जेल

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East Singhbhum News : ब्रिटिश गो बैक का नारा लगाने पर भेजे गये थे जेल

पूर्व मंत्री यदुनाथ बास्के ने भारत छोड़ो आंदोलन में लिया था हिस्सा

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घाटशिला. वर्ष 1942 के भारत छोड़ो आंदोलन में घाटशिला अनुमंडल के कई वीर ने हिस्सा लिया था. वे स्वतंत्रता सेनानी हमारे बीच नहीं हैं. उनकी वीरता के किस्से हमें गौरवान्वित करते हैं. मुसाबनी के रांगामाटिया निवासी सह अविभाजित बिहार के पूर्व मंत्री यदुनाथ बास्के ने भारत छोड़ो आंदोलन में अहम निभायी थी. ब्रिटिश गो बैक का नारा लगाने पर अंग्रेजों ने उन्हें जेल भेज दिया था. छोटे भाई ईश्वर चंद्र बास्के व परिजन बताते हैं कि यदुनाथ बास्के को चाईबासा जेल भेजा गया था. कई माह बाद चाईबासा जेल से रिहा हुए तो, पैदल चल कर हाता-पोटका होते हुए मुसाबनी अपने घर पहुंचे थे. वर्ष 1939 को नेताजी सुभाष चंद्र बोस ताम्र कंपनी के मजदूरों को संबोधित करने आये थे, तब यदुनाथ बास्के महज 11 साल के थे. वहीं 1942 के भारत छोड़ा आंदोलन के दौरान उनकी उम्र 14 साल थी. यदुनाथ बाबू ने बाद में झारखंड आंदोलन में सक्रिय भूमिका निभायी. राखा माइंस बंदी के विरोध में रेल रोका था. उनका निधन 2 जून, 1922 को हो गया था. तब तीन दिनों का राजकीय शोक घोषित किया गया था. झारखंड के तमाम मंत्री, विधायक-सांसद उनके दाह संस्कार में शामिल हुए थे. यदुनाथ बास्के पहली बार 1969 में झारखंड पार्टी के टिकट से घाटशिला विधान सभा सीट से जीत दर्ज कर विधायक बने थे. और फिर अविभाजित बिहार में मंत्री बने थे. वे सादगी पंसद थे. सफेद कुर्ता-पायजामा और हाथ में लाठी उनकी पहचान आजीवन रही.

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