नरवा.
समझौते के तहत तीन मांगों को लेकर यूसिल नरवा पहाड़ विस्थापित समिति के अगुवाई में चौथे दिन भी गेट जाम रहा, आवश्यक सेवा को छोड़ माइंस के सभी काम बंद है. नरवा पहाड माइंस के मुर्गाघुटू साउथ गेट व कॉलोनी साइट के गेट पर विस्थापित परिवार के लोग जमें हुये हैं. कर्मचारियों को कंपनी के अंदर जाने की मनाही है. इससे कंपनी का उत्पादन व परिचालन ठप है.प्रबंधन विस्थापितों का दर्द समझे : बुधराई किस्कू
नरवा पहाड़ डिसप्लेस कमेटी के अध्यक्ष बुधराई किस्कू ने कहा कि यूसिल प्रबंधन विस्थापितों का दर्द समझें, जिनकी पुरखों की संपत्ती माइंस के ली गयी है, हमारी जमीन के एवज में पूर्व में प्रबंधन द्वारा दिये गये आश्वासन के बाद भी यदि नौकरी नही मिलती है, वैसे में कंपनी को बंद रखने के सिवाय गेट जाम करने के सिवा कोई विकल्प नहीं है. विस्थापित कमेटी के महासचिव मुचीराम सोरेन ने कहा कि यूसिल पूर्व में किये वादे को निभाये. विस्थापितों के लिये रास्ता निकाले प्रबंधन. विस्थापित कंपनी के दुश्मन नहीं है. कमेटी के कोषाध्यक्ष मदन दास ने कहा कि कंपनी के लिए जो विस्थापित हुए, उन्हें ही विस्थापन का दर्द पता है. जो विस्थपित नहीं हुए, उन्हें क्या पता दर्द क्या है. इसलिए वर्ष 2014 और 2023 में हुए समझौते के तहत शिघ्र नौकरी दी जाए और लिस्ट जारी हो. मौके पर बुढ़न मुर्मू, सहित विस्थापित परिवार के लोग शामिल थे.
डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

