East Singhbhum News : बड़ी कंपनियों की नौकरी छोड़ पुश्तैनी धंधा बचा रहे दो भाई
Updated at : 16 Sep 2025 12:02 AM (IST)
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आधुनिकता के चकाचौंध में आज जहां युवा वर्ग अपने पुश्तैनी धंधा के दामन को छोड़ रहा है. ज्यादातर युवा नौकरी के लिए दूसरे राज्यों में पलायन करते हैं.
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बहरागोड़ा.
आधुनिकता के चकाचौंध में आज जहां युवा वर्ग अपने पुश्तैनी धंधा के दामन को छोड़ रहा है. ज्यादातर युवा नौकरी के लिए दूसरे राज्यों में पलायन करते हैं. वहीं, बहरागोड़ा निवासी पैड़ा परिवार के दो भाई उच्चतर शिक्षा प्राप्त करने बाद भी पुश्तैनी धंधे को आगे बढ़ा रहे हैं. पैड़ा परिवार में चार पीढ़ियों से मूर्ति निर्माण कार्य हो रहा है. परिवार में मूर्ति निर्माण कार्य का शुभारंभ हाराधन पैड़ा ने किया था. उसके बाद उनके पुत्र विभूति पैड़ा, उनके पुत्र शिवराम पैड़ा, अब उनके पुत्र शिक्षित युवक मिंटू व चिंटू मूर्ति बनाने का काम कर रहे हैं. यह दोनों युवक अपने पुश्तैनी धंधा व परंपरा को जीवित रखे हुए हैं.ग्राफिक डिजाइन व बीटेक की पढ़ाई की है दोनों ने
मिंटू ने ग्राफिक डिजाइन व पिंटू ने बीटेक की पढ़ाई की है. उन्हें बड़ी-बड़ी कंपनियों में नौकरी का अवसर मिला था. हालांकि, दोनों युवक अपने पुश्तैनी धंधा को आगे बढ़ा रहे हैं. दोनों विभिन्न पूजा, पर्व में मूर्ति का निर्माण करते हैं. चिंटू ने बताया कि मुझे एक अच्छी कंपनी में नौकरी मिली थी. उस समय अचानक पिताजी की तबीयत खराब हो गयी. अचानक पिताजी का निधन हो गया. मेरे पिताजी हमेशा कहते थे इस धंधा को मत अपनाना. मगर हम दोनों भाई इस परंपरा को जीवित रखने का काम कर रहे हैं.
आमदनी घटी, इसके बावजूद पुश्तैनी धंधा रखा जीवित
चिंटू ने बताया कि मिट्टी की मूर्ति बनाने में खर्च काफी ज्यादा होता है. अब बाजार में सस्ते दर पर मूर्ति की मांग है. सभी पर्व-त्योहार में मूर्ति बनाने का काम कर रहे हैं. यह धंधा लगभग 250 साल से चल रहा है.डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है
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