ईरान से शांति की बात या युद्ध की तैयारी? इस्लामाबाद बैठक से पहले ट्रंप ने पश्चिम एशिया में बढ़ाई फौज

Author Govind jee
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तस्वीर में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप. सोर्स-एक्स/ @WhiteHouse

Trump Deploys US Troops: इस्लामाबाद में होने वाली शांति वार्ता के बीच अमेरिका ने मिडिल ईस्ट में 50 हजार सैनिक और जंगी जहाज तैनात कर भारी दबाव बना दिया है. एक तरफ जेडी वेंस बातचीत की टेबल पर होंगे, वहीं दूसरी तरफ ट्रंप ने सैन्य कार्रवाई के संकेत दिए हैं.

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Trump Deploys US Troops: इस्लामाबाद में ईरान के साथ होने वाली अहम शांति वार्ता से ठीक पहले अमेरिका ने मिडिल ईस्ट में अपनी ताकत बढ़ा दी है. अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस इस बातचीत के लिए पाकिस्तान पहुंचे हैं, लेकिन दूसरी तरफ अमेरिकी सेना की हलचल तेज हो गई है. वॉल स्ट्रीट जर्नल (WSJ) की रिपोर्ट के मुताबिक, क्षेत्र में अमेरिकी लड़ाकू विमान और हमलावर एयरक्राफ्ट पहुंच चुके हैं. इसके अलावा, आने वाले कुछ दिनों में 82वीं एयरबोर्न डिवीजन के 1,500 से 2,000 और सैनिक तैनात किए जाएंगे.

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50 हजार सैनिकों की तैनाती

अमेरिका के बड़े जंगी जहाज भी खाड़ी की ओर बढ़ रहे हैं. ‘यूएसएस जॉर्ज एच.डब्ल्यू. बुश’ कैरियर स्ट्राइक ग्रुप अटलांटिक पार कर रहा है, जबकि ‘यूएसएस बॉक्सर’ एम्फीबियस ग्रुप प्रशांत महासागर से आ रहा है. इस समय मिडिल ईस्ट में अमेरिकी सैनिकों की संख्या 40,000 से बढ़कर 50,000 के पार हो गई है. एक्सपर्ट्स का कहना है कि 2,500 मरीन और 2,500 नाविक पहले से वहां मौजूद हैं, जो जरूरत पड़ने पर ईरान के तेल केंद्र ‘खार्ग आइलैंड’ जैसे ठिकानों पर एक्शन ले सकते हैं.

ईरान ने रखीं दो बड़ी शर्तें, कहा- अमेरिका पर भरोसा नहीं

ईरान का एक हाई-लेवल डेलिगेशन विदेश मंत्री अब्बास अराघची और संसद अध्यक्ष मोहम्मद बागेर गालीबाफ की अगुवाई में इस्लामाबाद पहुंच गया है. गालीबाफ ने साफ किया है कि ईरान बातचीत तो चाहता है, लेकिन वह अमेरिका पर भरोसा नहीं करता. उन्होंने तस्नीम न्यूज एजेंसी से कहा कि पिछली वार्ताओं में अमेरिका ने वादे तोड़े हैं. ईरान ने शर्त रखी है कि बातचीत शुरू होने से पहले लेबनान में सीजफायर हो और अमेरिका द्वारा रोकी गई ईरान की संपत्ति को रिलीज किया जाए.

ट्रंप की चेतावनी: बात नहीं बनी तो सैन्य कार्रवाई तय

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने स्पष्ट कर दिया है कि अगर कूटनीति फेल हुई, तो सैन्य विकल्प तैयार है. ट्रंप ने कहा कि अमेरिकी जंगी जहाजों को तैनात कर दिया गया है. उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ पर लिखा कि ईरान के पास कोई खास कार्ड नहीं हैं और वे सिर्फ अंतरराष्ट्रीय जलमार्गों का इस्तेमाल करके दुनिया को डराने की कोशिश कर रहे हैं. ट्रंप ने यह भी कहा कि अगले 24 घंटों में साफ हो जाएगा कि ये बातचीत किस दिशा में जा रही है.

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होर्मुज जलडमरूमध्य (स्ट्रेट ऑफ होर्मुज) पर टकराव के आसार

दुनिया के 20% तेल की सप्लाई वाले होर्मुज रूट को लेकर तनाव चरम पर है. ईरान की संसद में एक प्रस्ताव आया था जिसमें वहां से गुजरने वाले जहाजों से ईरानी करेंसी ‘रियाल’ में टैक्स वसूलने की बात कही गई थी. इस पर ट्रंप ने जॉइंट बेस एंड्रयूज पर मीडिया से कहा कि यह एक इंटरनेशनल वाटरवे है और अमेरिका किसी भी कीमत पर ईरान को यहां टैक्स वसूलने की इजाजत नहीं देगा. 6 हफ्तों से चल रहे इस तनाव ने ग्लोबल इकोनॉमी और तेल की कीमतों पर बुरा असर डाला है.

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