दलमा के जंगल में अंधाधुंध हो रही पेड़ों की कटाई, चल रहीं अवैध शराब की दर्जनों भट्ठियां

Published by :Mithilesh Jha
Published at :30 May 2024 10:49 PM (IST)
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दलमा के जंगल में अंधाधुंध हो रही पेड़ों की कटाई, चल रहीं अवैध शराब की दर्जनों भट्ठियां

दलमा के जंगल में तेजी से पेड़ों की कटाई हो रही है. शराब की भट्ठियों की आड़ में पेड़ काटे जा रहे हैं. वन विभाग कह रहा है कि सब कुछ ठीक है, लेकिन ऐसा है नहीं.

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समूचे विश्व में 5 जून को पर्यावरण दिवस मनाया जायेगा. इसके संरक्षण और संवर्धन की बात करेगा. जमशेदपुर स्थित दलमा वन क्षेत्र भी वन्य जीवों के संरक्षण के लिए जाना जाता है. इसकी रक्षा के लिए सरकार प्रतिवर्ष करोड़ों रुपये खर्च करती है.

दमला में निगरानी के बावजूद हो रही पेड़ों की कटाई

वन विभाग क्षेत्र के विकास और विस्तार के दावे करता है, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि तमाम निगरानी के बावजूद इस वन क्षेत्र में न सिर्फ पेड़ों की अंधाधुंध कटाई हो रही है, बल्कि शराब माफियाओं के लिए यह सुरक्षित क्षेत्र बन गया है. काफी संख्या में अवैध शराब की भट्ठियां संचालित की जा रही हैं. धड़ल्ले से अवैध शराब की चुलाई होती है और जंगल के मोटे-मोटे पेड़ों को काटकर शराब की भट्ठियों में इस्तेमाल किया जा रहा है.

लगातार घट रही है पेड़ों की संख्या

इससे जंगल को काफी नुकसान पहुंचा है. पेड़ों की संख्या लगातार घट रही है. पेड़ों की धड़ल्ले से कटाई करने से बड़ा इलाका मैदानी रूप ले लिया है. इन माफियाओं ने जंगल के अंदर आने-जाने के लिए कच्चे रास्ते बना लिये हैं, जिससे शराब की सप्लाई की जाती है. लेकिन अधिकारियों की मानें तो उनको इसकी भनक तक नहीं है. स्थानीय लोग इसके खिलाफ आवाज उठाते हैं, तो डरा-धमका कर उसे दबा दिया जाता है. शिकायत के बाद भी कार्रवाई नहीं होने से लोगों ने अब विरोध करना भी छोड़ दिया है.

ग्रामीणों में माफियाओं का खौफ, आवाज उठने से पहले ही दिया जाता है दबा

सूत्रों की मानें, तो जंगल के अंदर चल रही अवैध शराब भट्ठियों की जानकारी वन विभाग के गार्ड से लेकर वरिष्ठ अधिकारियों, ग्राम वन सुरक्षा समिति के पदाधिकारियों, इको विकास समिति के पदाधिकारियों, स्थानीय पुलिस प्रशासन और जनप्रतिनिधियों को भी है. लेकिन इनके खिलाफ न तो कोई आवाज उठाता है और न ही कार्रवाई होती है. इन माफियाओं का संपर्क स्थानीय ग्रामीणों से लेकर उच्च प्रशासनिक पदाधिकारियों से है. ये धंधा चलाने के संचालन के लिए साम, दाम, भेद और दंड सभी का इस्तेमाल करते हैं.

शराब की भट्ठी की आड़ में होती है जंगल की कटाई

यही कारण है कि जब कभी भी इनके खिलाफ आवाज उठती है, तो उसे न सिर्फ दबा दिया जाता है, बल्कि मामला तूल पकड़े उसके पहले ही उसे रफा-दफा कर दिया जाता है. शराब भट्ठियों की आड़ में जंगलों की कटाई और इससे मोटी कमाई का खेल धड़ल्ले से चल रहा है. जंगल के आसपास के ग्रामीण सारा कुछ अपनी आंखों के सामने देखते हुए भी चुप्पी साधे रहते हैं, क्योंकि शराब व वन माफियाओं का खौफ इन्हें विरोध करने से रोकता है.

शिकायत करने के बाद भी नहीं होती है कार्रवाई

दलमा से सटे गांवों के लोगों ने अवैध शराब भट्ठियों और जंगलों की कटाई का विरोध किया था, लेकिन शिकायत करने के बाद भी कोई कार्रवाई नहीं हुई. बल्कि शिकायत करने वाले को उसका खामियाजा भुगतना पड़ा. कई बार उन्हें झूठे केस में फंसा दिया गया या फंसाने की धमकी दी गयी. उनके साथ मारपीट की गयी. डर से ग्रामीणों ने विरोध करना छोड़ दिया.

जगह-जगह वनरक्षी और रेंजर की तैनाती, फिर भी नहीं रुक रहा अवैध धंधा

वन विभाग ने वनों की सुरक्षा के लिए जगह-जगह वनरक्षी और रेंजर को लगाया है. वनरक्षी हर दिन जंगल के अंदर व तलहटी के गांवों का चक्कर लगाते हैं. वनों की हो रही अवैध कटाई को रोकने की भी जिम्मेवारी इन्हीं की है. वरीय पदाधिकारी दावा करते हैं के वन क्षेत्र पूरी तरह से सुरक्षित है. लेकिन ऐसे दावों के बीच पेड़ों की अवैध कटाई रोकने की बात तो दूर, यहां स्थायी रूप से चल रही अवैध शराब की भट्ठियां इस बात की गवाह हैं कि विभाग जंगलों की सुरक्षा के प्रति अपनी जवाबदेही नहीं निभा रहा है.

पेड़ों की कटाई और अवैध शराब की चुलाई के लिए वन विभाग जिम्मेदार : दलमा राजा

दलमा राजा राकेश हेंब्रम ने बताया कि पेड़ों की अवैध कटाई के लिए वन विभाग के अधिकारी जिम्मेदार हैं. हेंब्रम के मुताबिक, दलमा के जंगल के अंदर अवैध शराब की दर्जनों भट्ठियों का संचालन होता है. इसके लिए पेड़ों की अंधाधुंध कटाई की जा रही है. इसकी रोकथाम के लिए वे मुख्यमंत्री चंपाई सोरेन और डीएफओ से शिकायत करेंगे.

यहां चलती हैं अवैध शराब की भट्ठियां

एनएच से सटे कांदरबेड़ा, आसनबनी, फोदलोगोड़ा, हलुदबनी, पातीपानी, सालदोहा आदि गांव से सटे दलमा के घने जंगल में अवैध शराब की भट्ठियों का संचालन हो रहा है. इन भट्ठियों में बनी शराब जमशेदपुर की बस्तियों में सप्लाई की जाती है. वहीं, शराब माफियों को एनएच का भी फायदा मिलता है. वे छोटे-बड़े वाहनों में घाटशिला, चांडिल, कांड्रा व आदित्यपुर क्षेत्र में भी सप्लाई करते हैं.

वन-जंगल को बचाने के लिए किसी भी हद तक जायेंगे : जमुना टुडू

दलमा अभयारण्य के अंदर पेड़ों की कटाई और अवैध शराब भट्ठियों के संचालन का मामला गंभीर है. वन विभाग इस पर अविलंब ठोस कार्रवाई करे. अगर विभाग कार्रवाई नहीं करता है, तो वरीय पदाधिकारी व विभाग के मंत्री से इस मुद्दे पर वे बातचीत करेंगी. वन बचाने के लिए वे किसी भी हद तक जा सकती हैं. जंगल के अंदर पेड़ों की कटाई व शराब की चुलाई वन विभाग के पदाधिकारी व कर्मचारियों की मिलीभगत के बिना संभव नहीं है. ऐसा लगता है कि विभाग के अधिकारी भी शराब और वन माफिया के साथ मिले हैं.

पद्मश्री जमुना टुडू, पर्यावरणविद्

क्या कहते हैं वन विभाग के अधिकारी

वन परिक्षेत्र में हो रही जंगलों की अंधाधुंध कटाई और दलमा जंगल के अंदर शराब भट्ठियां चलाये जाने की उन्हें कोई जानकारी नहीं है. यदि वन परिक्षेत्र में ऐसा हो रहा है, तो इसे बंद कराया जायेगा. जल्द ही फॉरेस्ट गार्ड से वस्तुस्थिति की जानकारी लेंगे. शिकायत सही मिलने पर नियम व प्रावधान के तहत उनपर कार्रवाई की जायेगी. वन को नुकसान पहुंचाने वालों को बख्शा नहीं जायेगा.

दिनेश चंद्रा, रेंजर

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मिथिलेश झा PrabhatKhabar.com में पश्चिम बंगाल राज्य प्रमुख (State Head) के रूप में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 30 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव है. उनकी रिपोर्टिंग राजनीति, सामाजिक मुद्दों, जलवायु परिवर्तन, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि और अन्य समसामयिक विषयों पर केंद्रित रही है, जिससे वे क्षेत्रीय पत्रकारिता में एक विश्वसनीय और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित हुए हैं. अनुभव : पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार में 3 दशक से अधिक काम करने का अनुभव है. वर्तमान भूमिका : प्रभात खबर डिजिटल (prabhatkhabar.com) में पश्चिम बंगाल के स्टेट हेड की भूमिका में हैं. वे डिजिटल न्यूज कवर करते हैं. तथ्यात्मक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता को प्राथमिकता देते हैं. वर्तमान में बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 पर पूरी तरह से फोकस्ड हैं. भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस पश्चिम बंगाल रहा है, साथ ही उन्होंने झारखंड और छत्तीसगढ़ की भी लंबे समय तक ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है, जो उनकी क्षेत्रीय समझ और अनुभव को दर्शाता है. मुख्य विशेषज्ञता (Core Beats) : उनकी पत्रकारिता निम्नलिखित महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों में गहरी विशेषज्ञता को दर्शाती है :- राज्य राजनीति और शासन : झारखंड और पश्चिम बंगाल की राज्य की राजनीति, सरकारी नीतियों, प्रशासनिक निर्णयों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर निरंतर और विश्लेषणात्मक कवरेज. सामाजिक मुद्दे : आम जनता से जुड़े सामाजिक मुद्दों, जनकल्याण और जमीनी समस्याओं पर केंद्रित रिपोर्टिंग. जलवायु परिवर्तन और नवीकरणीय ऊर्जा : पर्यावरणीय चुनौतियों, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और रिन्यूएबल एनर्जी पहलों पर डेटा आधारित और फील्ड रिपोर्टिंग. डाटा स्टोरीज और ग्राउंड रिपोर्टिंग : डेटा आधारित खबरें और जमीनी रिपोर्टिंग उनकी पत्रकारिता की पहचान रही है. विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तीन दशकों से अधिक की निरंतर रिपोर्टिंग, विशेष और दीर्घकालिक कवरेज का अनुभव तथा तथ्यपरक पत्रकारिता के प्रति प्रतिबद्धता ने मिथिलेश झा को पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत के लिए एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है.

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