East Singhbhum : डुमकाकोचा पहुंचा बाघ, खौफ में जंगल नहीं जा रहे ग्रामीण, बैल-बकरी को बांधा

Updated at : 12 Feb 2025 11:51 PM (IST)
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East Singhbhum : डुमकाकोचा पहुंचा बाघ, खौफ में जंगल नहीं जा रहे ग्रामीण, बैल-बकरी को बांधा

घाटशिला वन क्षेत्र में गांव से सटे जंगल में मिले बाघ के पंजे के नये निशान, वन विभाग की टीम पहुंची, डुमकाकोचा-मिर्गीटांड़ पहाड़ पर है गांव. पहले हाथी का भय था, अब बाघ घूम रहा

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गालूडीह. घाटशिला वन क्षेत्र के गालूडीह थानांतर्गत बाघुड़िया पंचायत के डुमकाकोचा गांव के पास जंगल रास्ते पर बुधवार की सुबह बाघ के पंजे के नये निशान मिले. ग्रामीणों की सूचना पर वन विभाग की टीम पहुंची. बाघ के पदचिह्न मिलने से ग्रामीण डरे-सहमे हुए हैं. ग्रामीणों ने बैल-बकरी को घर के बाहर बांध कर रखा. उन्हें चरने के लिए नहीं छोड़ा. ग्रामीण लकड़ी-पत्ता लाने जंगल में नहीं गये. वन विभाग ने ग्रामीणों को अलर्ट किया है.

बाघ को ट्रेस करने में जुटी रही टीम, दलमा की ओर लौटने की संभावना

वनरक्षी बलराम मुंडा, श्रीकांत भकत, रंजू सोरेन और नरेश महतो डुमकाकोचा जंगल में दिनभर बाघ को ट्रेस करने में लगे रहे. ज्ञात हो कि मंगलवार को माकुली जंगल के पास पंजे के निशान मिले थे. आशंका है कि रात में बाघ विचरण करते हुए बासाडेरा, मिर्गीटांड़ होते हुए डुमकाकोचा पहुंचा. हालांकि, बाघ को किसी ने देखा नहीं है. आशंका है बाघ पश्चिम दिशा में आगे बढ़ा है. संभावना है बाघ दलमा की ओर लौट रहा है.

शिक्षक, बच्चे और अभिभावक सहमे

ग्रामीणों ने कहा डुमकाकोचा में कई जगहो पर पंजे के निशान मिले हैं. गांव जंगल से सटा है. यहां प्राथमिक विद्यालय है. शिक्षक, बच्चे और अभिभावक भी सहम गये हैं. दो सप्ताह पहले बाघ के पंजे के निशान मिलने से बच्चे स्कूल नहीं आ रहे थे. अब फिर से वही स्थिति है.

दलमा में कैमरे लगे, लेकिन बाघ कैद नहीं : वन विभाग

वनरक्षी बलराम मुंडा ने बताया कि पदचिह्न देख लगता है बाघ दलमा जंगल की ओर बढ़ रहा है. दलमा जंगल में ट्रैकिंग कैमरे लगाये गये हैं. अबतक बाघ की तस्वीर कैद नहीं हुई है. यदि ग्रामीणों को बाघ दिखे, तो सूचना दें. जंगल व सुनसान जगहों पर अकेले न जायें.

क्या कहते हैं ग्रामीण

फिर से बाघ के पदचिह्न मिलने से डर का माहौल है. ग्रामीण जंगल जाने से डर रहे हैं. पशुओं को घर में बांधकर चारा खिला रहे हैं.

– महेश्वर सिंह, ग्रामीण, डुमकाकोचा

————————————लोग भयभीत हैं. अपने घरों में कैद हो गये हैं. पहले हाथी का डर था, अब बाघ घूम रहा है. ग्रामीणों का जीना मुश्किल हो गया है.

– सुशीला सिंह, ग्रामीण, डुमकाकोचा

—————————-

बाघ के डर से दिहाड़ी ग्रामीणों का शाम में घर लौटना मुश्किल हो गया है. लोग खेती बी टीक से नहीं कर पा रहे हैं.

– बनमाली सिंह, ग्रामीण, डुमकाकोचा

————————————-ग्रामीण खेतों में जाने से कतरा रहे हैं. फसल बर्बाद होने का खतरा है. वन विभाग जल्द बाध को पकड़ने की कोशिश करे.

– बुटू सिंह, ग्रामीण, डुमकाकोचा

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