East Singhbhum News : सर्दी में भी हमारे घरों के बजट की सेहत बिगाड़ रहीं सब्जियां

Edited by ATUL PATHAK
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घाटशिला. सब्जियों के दाम नहीं घटने से मध्यम व गरीब वर्ग परेशान

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घाटशिला

. हरी सब्जियों के लिए स्वर्ण काल कही जाने वाली सर्दियों में भी इस वर्ष महंगाई से मध्यम वर्ग व गरीब परेशान है. पूर्वी सिंहभूम जिले के घाटशिला व आसपास के क्षेत्रों में हरी सब्जियों के दाम अब भी आसमान में हैं. विशेष रूप से अदरक, लहसुन और हरी मिर्च ने सब्जियों के स्वाद को बिगाड़ दिया है. आम लोगों की रसोई का बजट प्रभावित हो रहा है. बाजार में अधिकतर हरी सब्जियों के दाम 60 रुपये प्रति किलो से अधिक हैं.

लहसुन व अदरक 150 रुपये किलो हुए:

घाटशिला शहर के स्थानीय बाजार में लहसुन और अदरक 150 रुपये प्रति किलो, जबकि हरी मिर्च 100 रुपये प्रति किलो है. वहीं, मटर व सेम 60 रुपये प्रति किलो, टमाटर 60 रुपये प्रति किलो, बैंगन 60 रुपये प्रति किलो, करेला 80 रुपये प्रति किलो और लौकी 30 रुपये प्रति पीस के भाव से बिक रही है. इसके अलावा गाजर 60 रुपये प्रति किलो, नया आलू 30 रुपये प्रति किलो, पुराना आलू 20 रुपये प्रति किलो और प्याज 30 रुपये प्रति किलो बिक रहा है. बंधा गोभी और फूलगोभी 20-20 रुपये प्रति पीस की दर से बाजार में उपलब्ध है.

स्थानीय स्तर पर सिर्फ बंधागोभी, फूलगोभी व टमाटर उपलब्ध:

सब्जी दुकानदारों का कहना है कि फिलहाल घाटशिला क्षेत्र के किसानों से केवल बंधा गोभी, फूलगोभी और टमाटर की आवक हो रही है. अन्य सब्जियां जमशेदपुर और पश्चिम बंगाल से मंगाई जा रही हैं. इसके कारण कीमत अधिक हैं.

संभवत :

सप्ताह-15 दिनों में दाम में गिरावट देखने को मिल सकती है. इस वर्ष लगातार बारिश के कारण सब्जियों की खेती को नुकसान होता रहा है. इसका असर बाजार पर देखने को मिला है. लोगों को महंगी सब्जी खरीदनी पड़ रही है. लहसुन, अदरक, हरी मिर्च और हरा धनिया सहित अन्य सब्जियों के दामों में बढ़ोतरी दर्ज की गयी है. इससे मध्यमवर्ग के परिवारों के लिए घर का बजट संभालना मुश्किल हो गया है.

फूलगोभी से किसान का जीवन हो रहा सुगंधित

गालूडीह. घाटशिला प्रखंड की जोड़सा पंचायत स्थित चोड़िंदा गांव के किसान ने फूल गोभी की खेती से जीवन को सुगंधित बना रहे हैं. इस गांव के दर्जनों किसान सब्जी की खेती से जुड़े हैं. इनकी आय का मुख्य साधन खेती है. यहां के किसान मौसमी सब्जियों के साथ फूल गोभी की खेती करते हैं. किसान मुरली मनोहर शर्मा ने बताया कि चोड़िंदा की गोभी क्षेत्र में मशहूर है. इस बार उन्होंने करीब एक बीघा जमीन पर फूल गोभी की खेती की है. उत्पादों को जमशेदपुर और स्थानीय हाट बाजार में ले जाकर प्रति गोभी 30 से 40 रुपये में बेचते हैं.

हर साल 50 हजार तक कर रहे आय

किसानों के मुताबिक, धान की फसल काटने के पश्चात खेत में फूल गोभी लगाते हैं. यह अक्तूबर के अंत से लगाना शुरू हो जाता है. दिसंबर में सब्जी निकलने लगती है. निजी खर्च पर किसान खेती करते हैं. गांव के कई किसान गोभी खेती से जुडे़ हैं. गोभी की खेती से हर साल लगभग 50 हजार रुपये तक आमदनी हो जाती है.

सिंचाई की सुविधा मिले, तो बेहतर होगा उत्पादन:

जोड़सा पंचायत के कई गांवों में रबी के मौसम में फूल व बंधा गोभी के साथ टमाटर, बैंगन, पालक साग, चना-मटर की खेती होती है. किसानों ने कहा कि सिंचाई की सुविधा मिले, तो और बेहतर खेती होगी. अधिकतर किसान फूल और बंधा गोभी लगाते हैं. अभी बाजार में गोभी का दाम किसानों को अच्छा मिल रहा है. स्थानीय हाट-बाजार में जहां 30 रुपये, तो जमशेदपुर ले जाकर बेचने पर 40 से 50 रुपये तक प्रति गोभी मिल रही है. इससे किसानों को आमदनी हो रही है.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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