East Singhbhum News : प्रतिबंध के बाद भी हो रही थी भैंसा लड़ाई, सीओ को देखते मची भगदड़

Published by : ATUL PATHAK Updated At : 20 Feb 2026 12:17 AM

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सीओ को देखकर इधर-उधर छिपे आयोजन कमेटी के सदस्य

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पटमदा.

जिला प्रशासन की सख्त मनाही के बावजूद कमलपुर थाना के कांकू गांव में कानून की धज्जियां उड़ाई जा रही थीं. गुरुवार सुबह यहां मेले के नाम पर प्रतिबंधित ‘भैंसा लड़ाई’ का खेल चल रहा था, इसे पटमदा के सीओ डॉ राजेंद्र कुमार दास ने मौके पर पहुंचकर बंद कराया.

पशुपालक अपने-अपने पशुओं को लेकर भागे

पश्चिम बंगाल सीमा से सटे इस गांव में स्थानीय कमेटी द्वारा दो दिवसीय मेले का आयोजन किया गया था. जैसे ही सीओ डॉ राजेंद्र कुमार दास लाव-लश्कर के साथ मैदान में दाखिल हुए तो हड़कंप मच गया. भैंसा लड़ा रहे पशुपालक अपने-अपने पशुओं को लेकर तेजी से गांव की ओर भागे. आयोजन समिति के सदस्य इधर-उधर छिप गये. टेंट हाउस के कर्मचारी आनन-फानन में माइक और साउंड सिस्टम समेटने लगे. देखते ही देखते पूरा मेला वीरान हो गया. इस कार्रवाई के दौरान पुलिस बल की देरी पर सवाल भी उठे. सीओ डॉ दास ने बताया कि उन्होंने कमलपुर थाना प्रभारी को समय रहते सूचना दी थी, पर मौके पर समय पर फोर्स उपलब्ध नहीं कराया गया.

समय पर पुलिस टीम भेज दी गयी थी : थाना प्रभारी

दूसरी ओर, कमलपुर थाना प्रभारी अशोक कुमार ने सफाई देते हुए कहा कि सूचना मिलते ही पुलिस टीम भेज दी गयी थी. पर टीम के पहुंचने तक मैदान खाली हो चुका था. उन्होंने विलंब का कारण बताते हुए कहा कि पुलिस रातभर गश्त पर थी. इस कारण तैयार होने में थोड़ा समय लग गया. प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि मनोरंजन के नाम पर पशुओं के साथ क्रूरता किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं की जायेगी. ग्रामीण क्षेत्रों में इस तरह के आयोजनों पर जिला प्रशासन की पैनी नजर है.

भैंसा लड़ाई में 12 जनवरी को वृद्ध की हो गयी थी मौत

12 जनवरी को बोड़ाम थाना की बेलडीह पंचायत के जोबा गांव में भैंसा लड़ाई के दौरान भागने के क्रम में सुभाष कर्मकार (55) की मौत हो गयी थी, जबकि उसका पुत्र सागर गंभीर रूप से घायल हो गया था. उसका पैर टूट गया था. उसका एमजीएम में इलाज चल रहा था. राज्य में भैंसा लड़ाई पर प्रतिबंध के बाद भी गांवों में चोरी-छिपे जारी है. इसके लिए ग्रामीणों को जागरूक करने की जरूरत है.

झारखंड में भी लागू है पशु क्रूरता अधिनियम

यह केंद्रीय कानून है जो पशुओं को अनावश्यक दर्द या पीड़ा पहुंचाने को अपराध बनाता है. यह कानून झारखंड में भी प्रभावी है. इस अधिनियम का उद्देश्य पशुओं के प्रति क्रूरता को रोकना और गोजातीय पशुओं की रक्षा करना है.

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