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East Singhbhum News : खेत जलमग्न<bha>;</bha> न बीज डाल पा रहे, न रोपनी कर पा रहे किसान

Updated at : 10 Jul 2025 12:01 AM (IST)
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East Singhbhum News : खेत जलमग्न<bha>;</bha> न बीज डाल पा रहे, न रोपनी कर पा रहे किसान

चिंता में डूबे किसान. इस बार कैसे होगी धान की खेती

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गालूडीह. घाटशिला-गालूडीह क्षेत्र के कमोवेश हर गांव में खेत जलमग्न हैं. खेतों की स्थिति तालाब जैसी हो गयी है. ऐसे में किसान न धान का बिचड़ा तैयार कर पा रहे हैं, न रोपनी. समय के साथ किसानों की चिंता बढ़ती जा रही है. किसान सभा के नेता दुलाल चंद्र हांसदा ने कहा कि हर साल किसान अल्प वृष्टि से परेशान रहते थे. इस साल अति वृष्टि ने किसानों की उम्मीदों पर पानी फेर दिया है. किसान काफी दिनों से मौसम बेहतर होने के इंतजार में हैं. रोहणी नक्षत्र के समय जिन किसानों ने बीज डाला था, उनका चारा तैयार है. लगातार बारिश से अधिकतर किसान धान का बीज नहीं डाल पाये हैं. कई किसानों ने बारिश के बीच बीज डाला, जो बर्बाद हो गया. खेत के डूबने से बीज बह गये या छोटे पौधे सड़ गये. दोबारा चारा देने की हिम्मत नहीं हो रही है. चूंकि, धान का बीज मंहगा है. किसानों को डर है कि फिर बीज डालने पर बर्बाद हुआ तो खेती नहीं कर पायेंगे. यह बारिश कब थमेगी पता नहीं. किसान अब बारिश थमने के इंतजार कर रहे हैं.

अभी चारा डालने का समय नहीं :

कृषि वैज्ञानिक दारीसाई अनुसंधान केंद्र के सह निदेशक डॉ एन सलाम ने कहा कि अभी चारा देने का समय नहीं है. बारिश थमने के बाद कम अवधि वाले चारा डालें. समय हाथ से निकल जायेगा, तो रोपनी से धान का उत्पादन पर बुरा प्रभाव पड़ेगा. खेत का मेढ़ काट दें. जहां चारा डाले, वहां बेड बना दें. ऊंची जमीन पर चारा दें, अन्यथा कोई उपाय नहीं है. जिनका चारा तैयार हो गया वे रोपनी कर सकते हैं. अगर खेत डूबा है, तो मेढ़ काट कर कुछ पानी बहा दें फिर रोपनी करें. अन्यथा छोटे पौधे बर्बाद हो जायेंगे.

अतिवृष्टि से सब्जी की खेती चौपट

घाटशिला में लगातार बारिश से किसानों पर आफत आ गयी है. खेतों में डूबने से सब्जियों के पौधे सड़ रहे हैं. सब्जियों के उत्पादन में भारी गिरावट आयी है. इसका असर कीमत पर पड़ा है. बाजार में हरी सब्जियों की कमी हो गयी है. दाम में बेतहाशा वृद्धि हो गयी है. स्थानीय सब्जी विक्रेताओं ने बताया कि बारिश से खेतों में तैयार सब्जियां नष्ट हो गयी हैं. लगभग 15-20 दिन पहले जो सब्जियां 15 से 20 रुपए प्रति किलो बिक रही थीं, अब 40 से 80 रुपये किलो पहुंच गयी हैं. कुंदरू और परवल पहले 20 रुपये किलो बिक रहे थे, अब 40 रुपए किलो हो गये हैं. लौकी पहले पांच से दस रुपये प्रति पीस थी, अब 40 रुपए किलो बिक रही है. खीरा भी 40 रुपये किलो बिक रहा है, जबकि पहले 10 से 15 रुपये किलो था. मिर्च 45 से 50 रुपये के बदले अब 150 रुपये किलो बिक रही है. करेला और बैंगन 80 रुपये किलो बिक रहे हैं. फूलगोभी 60 से 80 रुपये किलो हो गये हैं. लहसुन 100 रुपये किलो बिक रहा है. प्याज 25 रुपये में बिक रहा है. पपीता 40 रुपये किलो, जबकि आलू 20-22 रुपये किलो मिल रहा है. टमाटर भी 40 रुपये प्रति किलो है. वहीं, ग्रामीण क्षेत्रों से लोग जंगल से मशरूम लाकर बाजार में बेच रहे हैं. दुकानदारों का कहना है कि यदि बारिश इसी तरह जारी रही, तो सब्जियों के दाम और अधिक बढ़ सकते हैं.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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ATUL PATHAK

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