घाटशिला. घाटशिला क्षेत्रों में मकर पर्व को लेकर व्यापक असर देखने को मिल रहा. शहर से लेकर हाइवे किनारे तक कई होटल और चाय दुकानें बंद हो गयी हैं. मजदूर मकर मनाने घर लौट गये हैं. घाटशिला स्टेशन परिसर स्थित अनेक होटल भी ताले नजर आये. गुरुवार को हाइवे किनारे अधिकांश ढाबे और चाय दुकानें नहीं खुलीं. जबकि ग्रामीण इलाकों में पारंपरिक उत्सव और मेलों को लेकर चहल-पहल बनी रही. मजदूरों के अपने-अपने गांव लौटने से व्यापारिक गतिविधियां सीमित रहीं, वहीं लोगों ने पर्व को पूरे उत्साह के साथ मनाया. होटल संचालकों ने बताया कि होटल में काम करने वाले अधिकतर मजदूर मकर पर्व मनाने अपने गांव चले गये हैं. इस क्षेत्र में मकर पर्व को बड़े धूमधाम से मनाने की परंपरा है, ऐसे में मजदूर कई दिनों के लिए घर चले जाते हैं. कर्मचारियों के अभाव में होटल बंद रखना मजबूरी हो जाती है. वहीं कुछ ऐसे होटल और दुकानें भी हैं, जो मजदूरों पर निर्भर नहीं हैं, लेकिन उनके संचालक भी पर्व के अवसर पर प्रतिष्ठान बंद कर स्वयं मकर उत्सव मनाने में जुट जाते हैं. स्थानीय लोगों के अनुसार मकर पर्व का असर आमतौर पर तीन से चार दिनों तक बना रहता है, जिस दौरान व्यापारिक गतिविधियां सीमित हो जाती है.
मकर पर्व पर बीडीओ ने सबर बस्तियों में बांटी मिठाई
घाटशिला. मकर संक्रांति पर घाटशिला की यूनिका शर्मा ने गुरुवार को प्रखंड क्षेत्र अंतर्गत गालूडीह के दारीसाईं सबर बस्ती का दौरा किया. दौरे के दौरान बीडीओ ने सबर बस्ती की स्थिति और सबरों के बन रहे आवास का जायजा लिया एवं संबंधित कर्मचारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिये. इस दौरान उन्होंने सबर समुदाय के लोगों से मुलाकात कर उन्हें मकर पर्व की शुभकामनाएं दीं और मिठाइयों का वितरण किया. उन्होंने बस्तियों में रह रहे बच्चों, महिलाओं एवं बुजुर्गों से संवाद किया और पर्व के महत्व पर प्रकाश डालते हुए आपसी भाईचारे, सौहार्द और सामाजिक एकता का संदेश दिया. कहा कि मकर संक्रांति नयी ऊर्जा और सकारात्मकता का पर्व है, जिसे सभी वर्गों के साथ मिलकर मनाना चाहिए. मौके पर जेइ गौरव गुप्ता उपस्थित थे.डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

