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East Singhbhum News : जेटेट और प्रतियोगी परीक्षाओं में भूमिज भाषा को शामिल किया जाये

Updated at : 12 Dec 2025 12:09 AM (IST)
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East Singhbhum News : जेटेट और प्रतियोगी परीक्षाओं में भूमिज भाषा को शामिल किया जाये

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विधायक संजीव सरदार ने विधानसभा सत्र में उठाया समाज का मुद्दा, रखी मांग

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पोटका. पोटका विधायक संजीव सरदार ने भूमिज समुदाय के अत्यंत संवेदनशील मुद्दे को सदन में उठाते हुए जेटेट, जेएसससी और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं में भूमिज भाषा को पुनः शामिल करने की मांग की. उन्होंने कहा कि भूमिज समुदाय की जनसंख्या चार लाख से अधिक है. यह झारखंड के पूर्वी सिंहभूम, पश्चिमी सिंहभूम व सरायकेला-खरसावां जिले में प्रमुख रूप से निवास करते हैं. पूर्व की परीक्षाओं में भूमिज भाषा शामिल थी और बड़ी संख्या में अभ्यर्थियों ने भूमिज भाषा में परीक्षा देकर नियुक्तियां प्राप्त की थीं, लेकिन 2023 में जारी संशोधित नियमावालियों में भूमिज भाषा को सूची से हटा दिया गया, जिससे भूमिज समुदाय में गहरा असंतोष है. उन्होंने कहा कि यह निर्णय संविधान के अनुच्छेद 350 (ए) में प्रदत्त स्थानीय जनजातीय भाषा अधिकारों का उल्लंघन है. उन्होंने सदन के माध्यम से मांग रखी कि आगामी दसवीं, जेटेट, जेएसससी की सभी प्रतियोगी परीक्षाओं में भूमिज भाषा को पुनः शामिल किया जाये.

सरकार गंभीरता से विचार करेगी : दीपक बिरुवा

सदन में जवाब देते हुए मंत्री दीपक बिरुवा ने कहा कि लगभग 5 लाख लोग भूमिज समाज से आते हैं और पहले की परीक्षाओं में भूमिज भाषा शामिल थी, परंतु बाद में नियमावली में बदलाव के दौरान यह भाषा सूची से हट गयी. मंत्री ने बताया कि राज्य में सिविल सेवा की तर्ज पर परीक्षा प्रणाली को सुधारने के लिए 2012 में विशेषज्ञ समिति बनी थी और उसके अनुरूप कई भाषाओं को सम्मिलित किया गया था. इसके बाद फिर परीक्षाओं में भाषा को लेकर विधानसभा की एक समिति बनायी गयी थी, लेकिन उसमें भी भूमिज भाषा को शामिल नहीं किया गया. मंत्री के जवाब में विधायक ने कहा की यदि आदिवासियों की सरकार में ही आदिवासी भाषा का संरक्षण नहीं हुआ, तो समाज खत्म हो जायेगा. भूमिज भाषा सूची से हटेगी तो आने वाली पीढ़ियां प्रतियोगी परीक्षाओं से वंचित हो जायेगी. उन्होंने स्पष्ट कहा कि भूमिज भाषा को परीक्षा सूची में शामिल करना सिर्फ भाषा का नहीं, अस्तित्व, पहचान और सामाजिक सम्मान का मामला है. विधायक के आग्रह के बाद मंत्री दीपक बिरुवा ने कहा की निश्चित ही यह मामला जनजातीय समुदाय और उसकी भाषा से जुड़ा है. सरकार इसपर गंभीरता से विचार करेगी.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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ATUL PATHAK

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ATUL PATHAK is a contributor at Prabhat Khabar.

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