बहरागोड़ा के पांच घाटों में पानीपड़ा से हो रही बालू चोरी, बंगाल सीमा का फायदा उठा रहे माफिया

सुवर्णरेखा नदी के पानीपड़ा घाट हैं बालू का भंडार यहीं हो रहा खनन और परिवहन | Prabhat Khabar Network
बहरागोड़ा के सुवर्णरेखा नदी घाटों पर बालू का अवैध खनन जारी है। बंगाल सीमा का फायदा उठाकर माफिया सक्रिय हैं, जिससे निर्माण कार्य प्रभावित हो रहे हैं।
संवाददाता, घाटशिला
बहरागोड़ा थाना क्षेत्र से करीब 13 किलोमीटर दूर पानीपड़ा-नागुड़साईं के पास सुवर्णरेखा नदी की चौड़ाई काफी अधिक है. यहां पूर्व में बम बरामद हो चुका है. नदी का पानी बीच में होने से दोनों किनारों पर दूर तक बालू जमा है. इस घाट का दूसरा छोर पश्चिम बंगाल की सीमा से सटा है. सीमावर्ती इलाका होने का फायदा उठाकर स्थानीय ट्रैक्टर मालिक और चालक मजदूरों के जरिए यहां से बालू का अवैध खनन कर आसपास के गांवों में बेच रहे हैं. पुलिस जब भी सूचना के आधार पर छापामारी के लिए निकलती है, तो दूरी अधिक होने के कारण भनक लगते ही ट्रैक्टर चालक वाहन लेकर फरार हो जाते हैं.
लीज प्रक्रिया लटकने से किल्लत शुरू, विकास कार्य प्रभावित
दूसरी ओर, बहरागोड़ा प्रखंड में नागुड़साई-पानीपड़ा, दीपापाल, नेकड़ाडीहा, डोमजुड़ी और वर्णीपाल बालू घाट सरकारी लीज (रिलीज) की प्रक्रिया में लटके हुए हैं. अब तक नेकड़ाडीहा और डोमजुड़ी को छोड़कर शेष सभी घाटों पर ग्राम सभा की औपचारिकता पूरी कर फाइलें विभाग को भेज दी गयी हैं. उक्त घाटों का वैध संचालन शुरू नहीं होने से क्षेत्र में बालू का बड़ा संकट खड़ा हो गया है.
एसएसपी के कड़े आदेश के बाद पुलिस हुई सख्त
उक्त घाटों से पहले अवैध बालू का खनन और परिवहन धड़ल्ले से जारी था. पूर्वी सिंहभूम के नये एसएसपी ने सभी थानों को स्पष्ट चेतावनी दी कि जिस क्षेत्र में अवैध कारोबार होगा, वहां के थानेदार सीधे तौर पर जिम्मेदार होंगे. इसके बाद पुलिस-प्रशासन ने मुस्तैदी दिखाते हुए सभी प्रमुख घाटों से अवैध बालू खनन और परिवहन पर पूर्णतः रोक लगा दी है. हालांकि, कुछ घाटों से अब भी रात में चोरी-छिपे ट्रैक्टरों से बालू का उठाव किया जा रहा है.
एक ट्रैक्टर बालू के लिए देने पड़ रहे 2200 से 2500 रुपये
नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) की रोक और प्रशासन की चौतरफा सक्रियता के कारण बहरागोड़ा में बालू की भारी किल्लत हो गयी है. इसके चलते अबुआ आवास, पीएम आवास, पीसीसी सड़क समेत निजी मकानों के निर्माण कार्य पूरी तरह प्रभावित हो रहे हैं. मॉनसून के कारण कई घाटों में पानी भर चुका है, जिससे संकट और गहरा गया है. वर्तमान में यदि कहीं से चोरी-छिपे बालू मिल रहा है, तो लोगों को एक ट्रैक्टर बालू के लिए 2200 से 2500 रुपये तक की भारी कीमत चुकानी पड़ रही है.
बहरागोड़ा के पानीपड़ा घाट से बालू के अवैध खनन और परिवहन के मामले की मुझे जानकारी नहीं है. अगर वहां ऐसी गतिविधि चल रही है, तो त्वरित छापामारी कर कड़ी कानूनी कार्रवाई की जायेगी. एनजीटी की रोक के प्रभावी होने के बाद किसी भी घाट से बालू का खनन और परिवहन पूरी तरह अवैध है.- राजाराम मुंडा, अंचलाधिकारी, बहरागोड़ा
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