चाकुलिया में 10 वर्षों से जारी है बालू का काला खेल, करोड़ों डकार गये माफिया

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चाकुलिया में 10 वर्षों से जारी है बालू का काला खेल, करोड़ों डकार गये माफिया

बालीजुड़ी स्थित बालू घाट की तस्वीर (फाइल फोटो) | Prabhat Khabar Network

चाकुलिया में पिछले 10 वर्षों से बालू का अवैध खनन जारी है, जिससे सरकारी राजस्व को करोड़ों का नुकसान हुआ है। जानिए कैसे माफिया चला रहे हैं यह काला खेल।

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प्रतिनिधि, चाकुलिया

चाकुलिया प्रखंड क्षेत्र में बालू का अवैध कारोबार पिछले एक दशक से फल-फूल रहा है. क्षेत्र के तीन प्रमुख बालू घाटों (श्यामसुंदरपुर, चंदनपुर और बालीजुड़ी) की लंबे समय से नीलामी नहीं हुई है. ऐसे में बालू माफियाओं ने इसे अपनी कमाई का जरिया बना लिया है. विगत 10 वर्षों में माफियाओं ने करोड़ों का बालू अवैध तरीके से बेच दिया. इससे सरकारी राजस्व को चूना लगा, जबकि स्थानीय लोगों को महंगा बालू खरीदना पड़ रहा.

विगत एक वर्ष में श्यामसुंदरपुर और चाकुलिया पुलिस ने बालू लदे दर्जनों वाहन जब्त किये. हालांकि, इनमें से महज कुछ चुनिंदा वाहनों पर ही एफआइआर दर्ज की गयी, जबकि अधिकतर गाड़ियों को जिला खनन विभाग ने केवल जुर्माना वसूलकर थाने से छोड़ दिया, जिससे माफियाओं के हौसले बुलंद रहे.

10 वर्षों से नीलामी बंद, वन विभाग का पेच

श्यामसुंदरपुर घाट : वर्ष 2014-15 में रघुवर दास सरकार के दौरान इस घाट की नीलामी तीन वर्षों के लिए हुई थी.

चंदनपुर घाट : वर्ष 2013 में इसका संचालन पंचायत को सौंपा गया था, जिसे तत्कालीन मुखिया लक्ष्मी रानी हांसदा चला रही थीं. बाद में वन विभाग का पेच फंसने के कारण इसे नीलामी से बाहर कर दिया गया.

बालीजुड़ी घाट : इस घाट की आज तक कभी नीलामी ही नहीं हुई. साल 2016 से अब तक तीनों घाटों की नीलामी बंद है. इस दौरान कई अधिकारी आये और गये, लेकिन सफेदपोशों के संरक्षण में अवैध खनन का खेल बदस्तूर जारी रहा.

अंधेरे में कार्रवाई, हमेशा अज्ञात पर दर्ज हुआ मुकदमा

अवैध खनन के बाद बालू को खपाने के लिए माफिया ग्रामीणों की निजी जमीन या वन भूमि पर अवैध डंपिंग यार्ड बनाते थे. आश्चर्य की बात यह है कि ग्रामीण इलाकों की निगरानी करने वाले चौकीदारों की नाक के नीचे करोड़ों का बालू डंप होता रहा, लेकिन जब भी छापेमारी हुई, कार्रवाई के नाम पर केवल खानापूर्ति की गयी. जमीन मालिकों पर कोई कार्रवाई नहीं हुई और मुकदमा हमेशा अज्ञात लोगों के खिलाफ दर्ज कर फाइलों को बंद कर दिया गया.

एनजीटी के नियमों की धज्जियां, कोलकाता तक हो रही सप्लाई

हर साल 10 जून से राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण (एनजीटी) के तहत नदी से बालू उठाव पर पूरी तरह प्रतिबंध रहता है. इसके बावजूद माफियाओं ने रोक के बाद भी लगभग एक महीने तक तीनों घाटों से जमकर बालू निकाला. इस बार माफियाओं ने जमशेदपुर के बजाय कोलकाता और हल्दिया (पश्चिम बंगाल) जैसे नये बाजारों में ऊंचे दामों पर बालू की सप्लाई की.

एसएसपी का सख्त फरमान: थाना प्रभारियों पर लटकी तलवार

लंबे समय से चल रहे इस खेल पर तब लगाम लगी जब जमशेदपुर के नये एसएसपी एहतेशाम वकारिब ने कड़ा आदेश जारी किया. उन्होंने स्पष्ट किया कि जिस थाना क्षेत्र में बालू का अवैध खनन या परिवहन पकड़ा जायेगा, वहां के थाना प्रभारी सीधे तौर पर जिम्मेदार होंगे. इस सख्त आदेश के बाद पुलिस प्रशासन हरकत में आया और फिलहाल क्षेत्र में बालू की ढुलाई पूरी तरह से बंद है.


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